गुजरात में सार्वभौमिक शपथ पत्र लागू, अब एक ही प्रारूप से मिलेंगी सभी सरकारी सेवाएँ
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 1 जून 2026 को राज्यव्यापी सार्वभौमिक शपथ पत्र (Universal Affidavit) लागू कर दिया, जिसे अब गांधीनगर से लेकर राज्य के हर जिले, तालुका और ग्रामीण सेवा केंद्र में अनिवार्य रूप से स्वीकार किया जाएगा। इस प्रशासनिक सुधार के तहत नागरिकों को सरकारी योजनाओं, प्रमाण पत्रों और सार्वजनिक सेवाओं के लिए अलग-अलग विभागों के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रारूपों में शपथ पत्र जमा करने की बाध्यता समाप्त हो गई है।
क्या है सार्वभौमिक शपथ पत्र
गुजरात के विधि विभाग ने यह मानकीकृत प्रारूप उन सभी सेवाओं के लिए जारी किया है जहाँ मौजूदा कानूनों या नियमों के तहत शपथ पत्र अनिवार्य है, किंतु कोई विशिष्ट प्रारूप पहले से निर्धारित नहीं था। अब पूरे गुजरात में एक ही मानकीकृत शपथ पत्र को सभी विभाग, सेवा केंद्र और प्राधिकरण मान्यता देंगे।
विधि विभाग ने नागरिकों की सुविधा के लिए यह प्रारूप गुजराती और अंग्रेजी — दोनों भाषाओं में तैयार किया है, ताकि भाषाई बाधा न बने।
पुरानी व्यवस्था की समस्याएँ
अब तक की व्यवस्था में आवेदकों को हर विभाग के लिए अलग प्रारूप में तैयार शपथ पत्र जमा करने पड़ते थे। सरकार के अनुसार, इन दस्तावेज़ी भिन्नताओं के कारण अनावश्यक जटिलताएँ उत्पन्न होती थीं, नागरिकों का समय बर्बाद होता था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी होती थी।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकारें डिजिटल शासन और 'ईज़ ऑफ लिविंग' के तहत नागरिक सेवाओं को सरल बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। गौरतलब है कि केंद्र सरकार भी विभिन्न स्तरों पर स्व-घोषणा प्रणाली को बढ़ावा दे रही है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी लागू
यह सुधार केवल भौतिक कार्यालयों तक सीमित नहीं है। सार्वभौमिक शपथ पत्र को डिजिटल गुजरात पोर्टल और जन सेवा केंद्रों पर भी लागू किया जाएगा। इससे ऑनलाइन आवेदन करने वाले नागरिक भी विभिन्न विभागों और सेवाओं में एक ही शपथ पत्र प्रारूप का उपयोग कर सकेंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है, 'अब से, उन सेवाओं के लिए जहाँ कानून या नियमों के तहत शपथ पत्र की आवश्यकता होती है, लेकिन कोई विशिष्ट प्रारूप निर्धारित नहीं किया गया है, इस एकल मानक प्रारूप को पूरे राज्य में स्वीकार किया जाएगा।'
स्व-घोषणा व्यवस्था अप्रभावित
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन सेवाओं के लिए शपथ पत्र की कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है, उनके लिए सामान्य प्रशासन विभाग के संकल्प के अंतर्गत निर्धारित स्व-घोषणा (Self-Declaration) की सरलीकृत प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रहेगी। ऐसे मामलों में शपथ पत्र को अनिवार्य नहीं बनाया गया है।
आम नागरिक पर असर
इस कदम से राज्य के करोड़ों नागरिकों को राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, सरकारी योजनाओं के लाभ और अन्य सेवाओं के लिए आवेदन करते समय बार-बार नोटरी या अलग-अलग प्रारूप तैयार कराने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के निवासियों के लिए यह राहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहाँ दस्तावेज़ी प्रक्रियाओं में अधिक समय और संसाधन लगते थे।
यह सुधार गुजरात के प्रशासनिक सरलीकरण की दिशा में एक और कदम है, और आने वाले समय में इसकी प्रभावशीलता की समीक्षा की जाएगी।