26 जून 2026
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गुजरात सरकार का ऊर्जा संरक्षण अभियान: सरकारी दफ्तरों में एसी 24°C पर अनिवार्य, 45 दिन में एक्शन प्लान

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गुजरात सरकार का ऊर्जा संरक्षण अभियान: सरकारी दफ्तरों में एसी 24°C पर अनिवार्य, 45 दिन में एक्शन प्लान

सारांश

गुजरात सरकार ने सरकारी दफ्तरों में एसी को 24°C पर लॉक करने से लेकर ऑक्यूपेंसी सेंसर, LED अपग्रेड और सोलर पैनल तक — एक बहु-स्तरीय ऊर्जा संरक्षण अभियान शुरू किया है। 45 दिन में एक्शन प्लान और वार्षिक ऑडिट की बाध्यता इसे महज घोषणा से आगे ले जाती है।

मुख्य बातें

गुजरात के सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों में एसी का डिफॉल्ट तापमान 24 डिग्री सेल्सियस अनिवार्य किया गया।
सभी विभागों को 45 दिनों के भीतर 'ऑफिस एनर्जी एफिशिएंसी एक्शन प्लान' जमा करना होगा।
गलियारों, मीटिंग रूम और पार्किंग में ऑक्यूपेंसी सेंसर व टाइमर-आधारित ऑटोमेशन लगाए जाएंगे।
स्ट्रीट लाइटिंग को सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार समायोजित करने से प्रतिदिन लगभग 60 मिनट बिजली बचत संभव।
भविष्य में केवल 5-स्टार रेटेड उपकरण खरीदे जाएंगे; पारंपरिक लाइटिंग को LED से बदला जाएगा।
यह पहल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल के नेतृत्व में लागू हो रही है।

गुजरात सरकार ने 26 जून 2026 को राज्य के सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और सार्वजनिक भवनों में ऊर्जा संरक्षण अभियान की शुरुआत की, जिसके तहत एयर कंडीशनर का डिफॉल्ट तापमान 24 डिग्री सेल्सियस पर रखना अनिवार्य कर दिया गया है। ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग और सड़क एवं भवन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से संचालित इस पहल का लक्ष्य बिना कामकाज प्रभावित किए बिजली की अनावश्यक खपत घटाना और वित्तीय अनुशासन तथा पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।

मुख्य निर्देश और अनिवार्यताएँ

भारतीय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के दिशानिर्देशों के अनुरूप सरकारी कार्यालयों में एसी का डिफॉल्ट तापमान 24°C निर्धारित किया गया है। कार्यालय समय के बाद, सप्ताहांत और सार्वजनिक अवकाशों पर सभी लाइट, पंखे, एसी और कंप्यूटर सिस्टम बंद रखना अनिवार्य होगा। अवकाश पर गए या फील्ड ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के कक्षों में विद्युत उपकरणों की दैनिक निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।

वाटर कूलरों को शाम 6 बजे के बाद बंद कर सुबह 9 बजे से दोबारा चालू करने का निर्देश दिया गया है। प्रत्येक प्रमुख विभाग में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो इन उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा।

तकनीकी उपाय और स्मार्ट ऑटोमेशन

बिजली की बर्बादी रोकने के लिए कार्यालयों में ऑक्यूपेंसी सेंसर और टाइमर-आधारित ऑटोमेशन सिस्टम लगाए जाएंगे, जो गलियारों, मीटिंग रूम, पार्किंग और शौचालयों में उपयोग होंगे। शहरी क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटिंग को सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार समायोजित किया जाएगा, जिससे प्रतिदिन लगभग 60 मिनट तक बिजली की बचत होने की संभावना है।

कम ट्रैफिक वाले समय में रात 12 बजे से 4 बजे तक बीच-बीच की स्ट्रीट लाइटें बंद रखने का पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया जाएगा। सरकारी भवनों में पारंपरिक लाइटिंग को चरणबद्ध तरीके से एलईडी लाइटों से बदला जाएगा और भविष्य में केवल 5-स्टार रेटेड उपकरणों की ही खरीद की जाएगी।

सौर ऊर्जा और नवीकरणीय स्रोतों पर ज़ोर

जिन सरकारी भवनों में पर्याप्त खुली जगह है, वहाँ सोलर पावर सिस्टम लगाने की सलाह दी गई है। गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी (GEDA) मौजूदा सोलर इंस्टॉलेशन की जाँच करेगी और खराब सिस्टम को फिर से सक्रिय करने का कार्य करेगी। कार्यालयों में प्राकृतिक रोशनी के अधिकतम उपयोग पर भी जोर दिया गया है।

जवाबदेही ढाँचा और पुरस्कार व्यवस्था

सभी विभागों को 45 दिनों के भीतर 'ऑफिस एनर्जी एफिशिएंसी एक्शन प्लान' जमा करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, त्रैमासिक ऊर्जा खपत रिपोर्ट और वार्षिक ऊर्जा ऑडिट भी कराना जरूरी होगा। बिजली बचत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कार्यालयों को इस पहल के तहत सम्मानित किया जाएगा। सरकारी कर्मचारियों को सीढ़ियों के अधिक उपयोग और लिफ्ट के कम इस्तेमाल के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

यह पहल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल के नेतृत्व में लागू की जा रही है। गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में गर्मी के मौसम में बिजली की माँग रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच रही है और केंद्र सरकार भी राज्यों से ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करने का आग्रह कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — भारत में ऐसे निर्देश अक्सर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति तक सिमट जाते हैं। गुजरात ने त्रैमासिक ऊर्जा रिपोर्ट और वार्षिक ऑडिट को अनिवार्य कर जवाबदेही का एक ढाँचा ज़रूर खड़ा किया है, जो पिछली ऐसी पहलों से इसे अलग बनाता है। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में पीक समर डिमांड ने ग्रिड पर दबाव बढ़ाया है — इसलिए यह महज प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि एक व्यापक ऊर्जा-नीति संकेत भी है। सवाल यह है कि पुरस्कार-आधारित प्रोत्साहन बिना दंडात्मक प्रावधान के अनुपालन सुनिश्चित कर पाएगा या नहीं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात सरकार के ऊर्जा संरक्षण अभियान में एसी के लिए क्या नियम बनाया गया है?
गुजरात सरकार ने सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों में एयर कंडीशनर का डिफॉल्ट तापमान 24 डिग्री सेल्सियस पर रखना अनिवार्य किया है। यह नियम भारतीय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के दिशानिर्देशों के अनुरूप है।
गुजरात के सरकारी विभागों को एनर्जी एक्शन प्लान कब तक जमा करना होगा?
सभी विभागों को 45 दिनों के भीतर 'ऑफिस एनर्जी एफिशिएंसी एक्शन प्लान' जमा करना अनिवार्य होगा। इसके साथ त्रैमासिक ऊर्जा खपत रिपोर्ट और वार्षिक ऊर्जा ऑडिट भी कराना जरूरी होगा।
इस अभियान के तहत स्ट्रीट लाइटिंग में क्या बदलाव होंगे?
शहरी क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटिंग को सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार समायोजित किया जाएगा, जिससे प्रतिदिन लगभग 60 मिनट बिजली की बचत होने की संभावना है। रात 12 बजे से 4 बजे तक कम ट्रैफिक वाले समय में बीच-बीच की स्ट्रीट लाइटें बंद रखने का पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू होगा।
गुजरात सरकार के इस ऊर्जा अभियान की निगरानी कौन करेगा?
प्रत्येक प्रमुख विभाग में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो इन उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा। यह अभियान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल के नेतृत्व में लागू हो रहा है।
क्या इस अभियान में बिजली बचाने वाले कार्यालयों को कोई पुरस्कार मिलेगा?
हाँ, सरकार ने घोषणा की है कि बिजली बचत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कार्यालयों को इस पहल के तहत सम्मानित किया जाएगा। यह प्रोत्साहन-आधारित व्यवस्था अनुपालन को प्रेरित करने के लिए बनाई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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