गुजरात में EV बिक्री 55% उछली: पहले क्वार्टर में 8,577 वाहन पंजीकृत, सरकारी नीतियों का दिखा असर
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाज़ार ने 2026 की शुरुआत में ऐतिहासिक रफ़्तार पकड़ी है। राज्य में चालू वर्ष की पहली तिमाही में ही 8,577 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हो चुके हैं, जबकि पिछले पूरे वर्ष में यह संख्या केवल 5,545 थी — यानी वृद्धि दर लगभग 55 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार की सब्सिडी, कर-छूट और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की नीतियाँ इस उछाल की प्रमुख वजह मानी जा रही हैं।
बिक्री के आँकड़े क्या कहते हैं
आँकड़ों के अनुसार, गुजरात में पिछले वर्ष भर में 5,545 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हुआ था। इस वर्ष केवल पहली तिमाही में ही 8,577 वाहन पंजीकृत हो चुके हैं — यह वृद्धि 55% से अधिक है। गांधीनगर स्थित फेडरेशन ऑफ ऑटो डीलर्स एसोसिएशन के प्रमुख प्रणव शाह के अनुसार, ईवी से संबंधित पूछताछ में 200 से 300 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों की खपत घटाकर विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की अपील के बाद उपभोक्ताओं की रुचि और तेज़ हुई है।
सरकारी प्रोत्साहन: क्या मिल रहा है ग्राहकों को
गुजरात सरकार ने 2026-27 के बजट में हरित विकास को प्राथमिकता दी है। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों को वाहन की श्रेणी के अनुसार ₹30,000 से ₹1 लाख तक की बचत हो रही है।
प्रणव शाह ने बताया कि सामान्य वाहनों में आरटीओ पंजीकरण शुल्क ₹60,000 तक पहुँच जाता है, जबकि इलेक्ट्रिक कारों के लिए यह शुल्क मात्र ₹10,000 के आसपास रहता है — यानी औसतन ₹50,000 की सीधी बचत। दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों में पंजीकरण शुल्क नाममात्र का है। इसके अलावा अहमदाबाद सहित कई नगर निगम क्षेत्रों में पारंपरिक वाहनों पर 2.5% से 7% रोड टैक्स लगता है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए यह पूरी तरह माफ है और केवल ₹25 का टोकन शुल्क लिया जाता है।
खरीदारों की राय
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदार मानित शाह ने कहा कि ईवी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे प्रदूषण नहीं होता। उन्होंने बताया कि अधिकांश घरों में सोलर पैनल लगने से ईवी चार्जिंग और भी किफायती हो गई है, जिससे खर्च और पर्यावरण दोनों पर सकारात्मक असर पड़ रहा है।
एक अन्य खरीदार पंकित शाह ने कहा कि कम आरटीओ शुल्क और ईंधन की तुलना में चार्जिंग की कम लागत मिलकर लंबी अवधि में उपभोक्ताओं की अच्छी-खासी बचत करा रही हैं। उनके अनुसार, पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की तुलना में ईवी अधिक लाभदायक साबित हो रहे हैं।
बाज़ार में बढ़ते विकल्प
कुछ वर्ष पहले तक गुजरात में सीमित कंपनियों के ईवी मॉडल उपलब्ध थे। अब लगभग सभी प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियाँ अपने इलेक्ट्रिक मॉडल बाज़ार में उतार रही हैं, जिससे ग्राहकों को कीमत, फीचर्स और रेंज के आधार पर व्यापक विकल्प मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिस्पर्धा आगे चलकर कीमतें और नीचे ला सकती है।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर स्वच्छ ऊर्जा नीतियाँ और मज़बूत हो रही हैं। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और नए मॉडलों की बढ़ती उपलब्धता के साथ, विशेषज्ञों का अनुमान है कि गुजरात का ईवी बाज़ार आने वाली तिमाहियों में और तेज़ रफ़्तार पकड़ेगा।