गुजरात के सरकारी दफ्तरों की 100 अंकों में रैंकिंग: स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान शुरू
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के सभी सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान के तहत स्वच्छता और रिकॉर्ड प्रबंधन का 100 अंकों के पैमाने पर मूल्यांकन किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य सरकारी दफ्तरों में वर्षों से जमा कबाड़, ई-वेस्ट और अनुपयोगी सामग्री का निस्तारण करना है। गांधीनगर स्थित सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश पर यह पहल पूरे राज्य में लागू की जा रही है।
मूल्यांकन का ढाँचा
सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार, दफ्तरों का मूल्यांकन 100 अंकों के आधार पर तीन मानदंडों पर होगा। इसमें 50 प्रतिशत अंक कबाड़, ई-कचरे और इस्तेमाल न होने वाली चीजों को हटाने तथा दफ्तर की साफ-सफाई के लिए, 30 प्रतिशत अंक रिकॉर्ड के वर्गीकरण के लिए और 20 प्रतिशत अंक लंबित फाइलों के निपटारे के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह भारांश स्पष्ट करता है कि सरकार की प्राथमिकता भौतिक स्वच्छता और ई-वेस्ट प्रबंधन को सबसे ऊपर रखना है।
अभियान का दायरा और निगरानी व्यवस्था
इस अभियान में सचिवालय के विभाग, गांधीनगर में विभागाध्यक्षों के दफ्तर और जिला व तालुका स्तर के सरकारी दफ्तर शामिल होंगे। जिला स्तर पर इसकी कमान कलेक्टर के हाथों में होगी, जबकि तालुका स्तर पर मामलेदार देखरेख करेंगे। दफ्तरों को प्रदर्शन के आधार पर तीन श्रेणियों — बेस्ट, इमर्जिंग और एस्पायरिंग — में बाँटा जाएगा।
रिपोर्टिंग और समयसीमा
सरकार ने अभियान की प्रगति मापने के लिए 30 जून 2026 की स्थिति को आधार-रेखा माना है, जबकि 17 अक्टूबर की अंतिम स्थिति से सुधार का आकलन किया जाएगा। सभी दफ्तरों को 31 अक्टूबर तक रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसके साथ तस्वीरें और संबंधित दस्तावेज भी अनिवार्य होंगे। रिपोर्ट में निपटाई गई पुरानी और लंबित फाइलों की संख्या, वर्गीकृत रिकॉर्ड, खाली कराई गई कार्यालय-स्थान और कबाड़ बेचकर हुई आमदनी का ब्यौरा शामिल करना होगा।
पुरस्कार और उच्चस्तरीय समीक्षा
एक उच्चस्तरीय समिति दफ्तरों के कामकाज की समीक्षा करेगी और 30 नवंबर तक अंतिम सूची तैयार करेगी। चुने गए दफ्तरों को 25 दिसंबर 2026 को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। यह अभियान महात्मा गांधी की जयंती की 'स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत, विकसित भारत' थीम के तहत चलाया जा रहा है, जो इसे राष्ट्रीय स्वच्छ भारत मिशन से भी जोड़ता है।
आम जनता और राज्य को क्या मिलेगा
इस अभियान से राज्य सरकार को पूरे गुजरात का एकीकृत डेटा मिलेगा — निपटाई गई फाइलों की संख्या, हटाए गए स्क्रैप और ई-वेस्ट की मात्रा तथा खाली कराई गई कार्यालय-स्थान की जानकारी। गौरतलब है कि सरकारी दफ्तरों में वर्षों से अनुपयोगी सामग्री का अंबार लगना प्रशासनिक दक्षता और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन दोनों के लिए एक पुरानी चुनौती रही है। इस पहल से कार्यस्थलों के बेहतर संगठन और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।