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गुजरात के सरकारी दफ्तरों की 100 अंकों में रैंकिंग: स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान शुरू

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गुजरात के सरकारी दफ्तरों की 100 अंकों में रैंकिंग: स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान शुरू

सारांश

गुजरात में सरकारी दफ्तरों की स्वच्छता अब नारों तक सीमित नहीं — 100 अंकों की अनिवार्य रैंकिंग, कबाड़ बेचकर हुई कमाई का हिसाब और 25 दिसंबर को प्रमाण-पत्र के साथ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रशासनिक स्वच्छता को जवाबदेह बनाने की कोशिश की है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान चलाया जा रहा है।
सरकारी दफ्तरों का मूल्यांकन 100 अंकों के पैमाने पर होगा — 50% स्वच्छता व ई-वेस्ट निस्तारण, 30% रिकॉर्ड वर्गीकरण, 20% लंबित फाइलों के निपटारे के लिए।
सचिवालय, जिला और तालुका स्तर के दफ्तरों को बेस्ट , इमर्जिंग और एस्पायरिंग — तीन श्रेणियों में बाँटा जाएगा।
रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2026 तक जमा होगी; उच्चस्तरीय समिति 30 नवंबर तक अंतिम सूची तैयार करेगी।
चुने गए दफ्तरों को 25 दिसंबर 2026 को प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे।
आधार-रेखा 30 जून 2026 की स्थिति होगी; अभियान से पहले और बाद की तुलना सरकार करेगी।

गुजरात के सभी सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान के तहत स्वच्छता और रिकॉर्ड प्रबंधन का 100 अंकों के पैमाने पर मूल्यांकन किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य सरकारी दफ्तरों में वर्षों से जमा कबाड़, ई-वेस्ट और अनुपयोगी सामग्री का निस्तारण करना है। गांधीनगर स्थित सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश पर यह पहल पूरे राज्य में लागू की जा रही है।

मूल्यांकन का ढाँचा

सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार, दफ्तरों का मूल्यांकन 100 अंकों के आधार पर तीन मानदंडों पर होगा। इसमें 50 प्रतिशत अंक कबाड़, ई-कचरे और इस्तेमाल न होने वाली चीजों को हटाने तथा दफ्तर की साफ-सफाई के लिए, 30 प्रतिशत अंक रिकॉर्ड के वर्गीकरण के लिए और 20 प्रतिशत अंक लंबित फाइलों के निपटारे के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह भारांश स्पष्ट करता है कि सरकार की प्राथमिकता भौतिक स्वच्छता और ई-वेस्ट प्रबंधन को सबसे ऊपर रखना है।

अभियान का दायरा और निगरानी व्यवस्था

इस अभियान में सचिवालय के विभाग, गांधीनगर में विभागाध्यक्षों के दफ्तर और जिला व तालुका स्तर के सरकारी दफ्तर शामिल होंगे। जिला स्तर पर इसकी कमान कलेक्टर के हाथों में होगी, जबकि तालुका स्तर पर मामलेदार देखरेख करेंगे। दफ्तरों को प्रदर्शन के आधार पर तीन श्रेणियों — बेस्ट, इमर्जिंग और एस्पायरिंग — में बाँटा जाएगा।

रिपोर्टिंग और समयसीमा

सरकार ने अभियान की प्रगति मापने के लिए 30 जून 2026 की स्थिति को आधार-रेखा माना है, जबकि 17 अक्टूबर की अंतिम स्थिति से सुधार का आकलन किया जाएगा। सभी दफ्तरों को 31 अक्टूबर तक रिपोर्ट जमा करनी होगी, जिसके साथ तस्वीरें और संबंधित दस्तावेज भी अनिवार्य होंगे। रिपोर्ट में निपटाई गई पुरानी और लंबित फाइलों की संख्या, वर्गीकृत रिकॉर्ड, खाली कराई गई कार्यालय-स्थान और कबाड़ बेचकर हुई आमदनी का ब्यौरा शामिल करना होगा।

पुरस्कार और उच्चस्तरीय समीक्षा

एक उच्चस्तरीय समिति दफ्तरों के कामकाज की समीक्षा करेगी और 30 नवंबर तक अंतिम सूची तैयार करेगी। चुने गए दफ्तरों को 25 दिसंबर 2026 को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। यह अभियान महात्मा गांधी की जयंती की 'स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत, विकसित भारत' थीम के तहत चलाया जा रहा है, जो इसे राष्ट्रीय स्वच्छ भारत मिशन से भी जोड़ता है।

आम जनता और राज्य को क्या मिलेगा

इस अभियान से राज्य सरकार को पूरे गुजरात का एकीकृत डेटा मिलेगा — निपटाई गई फाइलों की संख्या, हटाए गए स्क्रैप और ई-वेस्ट की मात्रा तथा खाली कराई गई कार्यालय-स्थान की जानकारी। गौरतलब है कि सरकारी दफ्तरों में वर्षों से अनुपयोगी सामग्री का अंबार लगना प्रशासनिक दक्षता और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन दोनों के लिए एक पुरानी चुनौती रही है। इस पहल से कार्यस्थलों के बेहतर संगठन और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह मूल्यांकन सिर्फ एक बार का 'सफाई दिवस' बनकर रह जाएगा। गुजरात में पहले भी ऐसे अभियान चले हैं जिनका दीर्घकालिक असर सीमित रहा, क्योंकि संस्थागत परिवर्तन के बिना कबाड़ फिर जमा होता है। तालुका स्तर तक निगरानी की ज़िम्मेदारी सौंपना सराहनीय है, लेकिन डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग का बोझ पहले से काम के दबाव में दबे कर्मचारियों पर पड़ेगा। इस अभियान की सफलता तब मानी जाएगी जब 25 दिसंबर के प्रमाण-पत्र से आगे बढ़कर स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन की नींव रखी जाए।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान क्या है?
यह गुजरात सरकार का एक अभियान है जो 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा है, जिसमें राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, रिकॉर्ड प्रबंधन और ई-वेस्ट निस्तारण का 100 अंकों के पैमाने पर मूल्यांकन होगा। यह अभियान महात्मा गांधी जयंती की थीम 'स्वच्छता में सहभाग, स्वच्छ भारत, विकसित भारत' के तहत चलाया जा रहा है।
दफ्तरों की रैंकिंग के 100 अंक कैसे बाँटे गए हैं?
100 अंकों में से 50 अंक कबाड़, ई-वेस्ट और इस्तेमाल न होने वाली चीजों को हटाने तथा दफ्तर की साफ-सफाई के लिए, 30 अंक रिकॉर्ड के वर्गीकरण के लिए और 20 अंक लंबित फाइलों के निपटारे के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह भारांश स्पष्ट करता है कि भौतिक स्वच्छता और ई-वेस्ट प्रबंधन को सर्वाधिक प्राथमिकता दी गई है।
इस अभियान की अंतिम समयसीमा और पुरस्कार प्रक्रिया क्या है?
सभी सरकारी दफ्तरों को 31 अक्टूबर 2026 तक रिपोर्ट, तस्वीरें और दस्तावेज जमा करने होंगे। इसके बाद उच्चस्तरीय समिति 30 नवंबर तक अंतिम सूची तैयार करेगी और चुने गए दफ्तरों को 25 दिसंबर 2026 को प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे।
इस अभियान में कौन-कौन से कार्यालय शामिल होंगे?
अभियान में गांधीनगर स्थित सचिवालय के विभाग, विभागाध्यक्षों के दफ्तर और जिला व तालुका स्तर के सरकारी कार्यालय शामिल हैं। जिला स्तर पर कलेक्टर और तालुका स्तर पर मामलेदार अभियान की देखरेख करेंगे।
प्रगति मापने के लिए आधार-रेखा क्या होगी?
30 जून 2026 की कार्यालय स्थिति को आधार-रेखा माना जाएगा और 17 अक्टूबर 2026 की अंतिम स्थिति से अभियान के दौरान हुई प्रगति को मापा जाएगा। दफ्तरों को निपटाई गई फाइलों की संख्या, खाली कराई गई जगह और कबाड़ बेचकर हुई आमदनी का पूरा ब्यौरा देना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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