30 जुलाई 2026
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गुमला में डायन-बिसाही के शक में महिला की कुल्हाड़ी से हत्या, आरोपी ने थाने पहुँचकर किया आत्मसमर्पण

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गुमला में डायन-बिसाही के शक में महिला की कुल्हाड़ी से हत्या, आरोपी ने थाने पहुँचकर किया आत्मसमर्पण

सारांश

झारखंड के गुमला में डायन-बिसाही के शक में 40 वर्षीय तारामुनी देवी की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई। आरोपी पहले भी 2025 में इसी महिला पर हमला कर चुका था, फिर भी उसे छोड़ दिया गया था। घटना राज्य में डायन-प्रथा के विरुद्ध कानून की सीमाओं पर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

30 जुलाई 2026 को झारखंड के गुमला जिले के खटगांव गाँव में 40 वर्षीय तारामुनी देवी की टांगी (कुल्हाड़ी) से हत्या की गई।
आरोपी डुंगडुंग ने डायन-बिसाही का आरोप लगाकर हमला किया और बाद में पालकोट थाने में आत्मसमर्पण कर दिया।
आरोपी वर्ष 2025 में भी तारामुनी देवी पर इसी तरह हमला कर चुका था; तब पुलिस ने बाउंड भरवाकर छोड़ दिया था।
मृतका के पति अनमोल केरकेट्टा की शिकायत पर FIR दर्ज; आरोपी हिरासत में।
प्रारंभिक जाँच में सामने आया कि आरोपी तीन वर्षों से मिर्गी से पीड़ित था और उसे भ्रम था कि महिला ने उसे बीमार किया है।

झारखंड के गुमला जिले के पालकोट थाना क्षेत्र अंतर्गत खटगांव गाँव में 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) को डायन-बिसाही के संदेह में 40 वर्षीय तारामुनी देवी की टांगी (कुल्हाड़ी) से वार करके हत्या कर दी गई। घटना के तुरंत बाद आरोपी स्वयं पालकोट थाने पहुँचा और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब तारामुनी देवी गाँव के स्कूल के पास बर्तन धो रही थीं।

घटनाक्रम: कैसे हुई हत्या

पुलिस के अनुसार, गाँव का ही निवासी डुंगडुंग उस स्थान पर पहुँचा जहाँ तारामुनी देवी बर्तन धो रही थीं। उसने उन पर डायन-बिसाही करने का आरोप लगाते हुए टांगी से हमला कर दिया। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आने के कारण महिला की मौके पर ही मृत्यु हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

पहले भी हो चुका था हमला

मृतका के भतीजे रंजीत केरकेट्टा ने बताया कि आरोपी ने वर्ष 2025 में भी तारामुनी देवी पर इसी प्रकार टांगी से जानलेवा हमला किया था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हुई थीं, लेकिन उनकी जान बच गई थी। उस समय पुलिस ने आरोपी से बाउंड भरवाकर उसे छोड़ दिया था। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद भी आरोपी लगातार तारामुनी देवी को डायन बताकर धमकी देता रहा और अंततः उसने उनकी हत्या कर दी।

प्राथमिकी और जाँच

मृतका के पति अनमोल केरकेट्टा की शिकायत पर पालकोट थाने में आरोपी के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और मामले के सभी पहलुओं की जाँच की जा रही है।

आरोपी की मानसिक स्थिति

प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपी पिछले करीब तीन वर्षों से मिर्गी की बीमारी से पीड़ित था। उसे यह भ्रम था कि तारामुनी देवी ने डायन-बिसाही के ज़रिये उसे बीमार किया है। पुलिस इस पहलू की भी जाँच कर रही है।

डायन-बिसाही: झारखंड की गंभीर समस्या

गौरतलब है कि झारखंड में डायन-बिसाही के नाम पर हिंसा की घटनाएँ लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। राज्य में इसके विरुद्ध कानून मौजूद होने के बावजूद ऐसी घटनाएँ विशेष रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सामने आती रहती हैं। यह घटना एक बार फिर इस सामाजिक कुरीति की भयावहता को उजागर करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तंत्र की विफलता का प्रमाण है — आरोपी 2025 में भी इसी महिला पर हमला कर चुका था और पुलिस ने महज बाउंड भरवाकर उसे छोड़ दिया था। झारखंड में डायन-प्रथा के विरुद्ध कानून मौजूद है, फिर भी यह दूसरा हमला रोका नहीं जा सका — जो यह सवाल उठाता है कि पहली घटना के बाद पुनर्वास या कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। आरोपी की मिर्गी और मानसिक भ्रम की जानकारी पहले से थी या नहीं, यह जाँच का अहम बिंदु है। बिना सामाजिक जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप के, कानून अकेले इस कुरीति को नहीं रोक सकता।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुमला में डायन-बिसाही के शक में किसकी हत्या हुई?
झारखंड के गुमला जिले के खटगांव गाँव में 30 जुलाई 2026 को 40 वर्षीय तारामुनी देवी की कुल्हाड़ी (टांगी) से वार कर हत्या की गई। आरोपी ने उन पर डायन-बिसाही का आरोप लगाया था।
आरोपी ने आत्मसमर्पण क्यों किया?
हत्या करने के तुरंत बाद आरोपी डुंगडुंग स्वयं पालकोट थाने पहुँचा और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
क्या आरोपी पहले भी इस महिला पर हमला कर चुका था?
हाँ, मृतका के भतीजे रंजीत केरकेट्टा के अनुसार आरोपी ने वर्ष 2025 में भी तारामुनी देवी पर टांगी से जानलेवा हमला किया था। उस समय पुलिस ने बाउंड भरवाकर आरोपी को छोड़ दिया था और महिला गंभीर रूप से घायल हुई थीं लेकिन बच गई थीं।
आरोपी की मानसिक स्थिति कैसी थी?
प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि आरोपी पिछले करीब तीन वर्षों से मिर्गी की बीमारी से पीड़ित था। उसे भ्रम था कि तारामुनी देवी ने डायन-बिसाही के ज़रिये उसे बीमार किया है। पुलिस इस पहलू की भी जाँच कर रही है।
झारखंड में डायन-बिसाही के विरुद्ध क्या कानून है?
झारखंड में डायन-प्रथा के विरुद्ध राज्य स्तरीय कानून लागू है, जो इस तरह के अंधविश्वास-जनित हिंसा को दंडनीय अपराध मानता है। इसके बावजूद राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ऐसी घटनाएँ सामने आती रहती हैं, जो कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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