ग्वालियर में एशिया का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, 29 अक्टूबर को अमित शाह करेंगे भूमिपूजन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की पहल से मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एशिया का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) आकार ले रहा है। इस परियोजना के भूमिपूजन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 29 अक्टूबर 2026 को शामिल होंगे। शाह ने सिंधिया के आमंत्रण को स्वीकार कर समारोह में उपस्थित रहने की सहमति प्रदान की है।
परियोजना का स्वरूप और स्थान
यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन ग्वालियर के श्रीमंत माधवराव सिंधिया काउंटर मैग्नेट सिटी (SADA) क्षेत्र में प्रस्तावित है। मध्य प्रदेश सरकार ने परियोजना के लिए लगभग 170 एकड़ भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराई है। केंद्र की मोदी सरकार प्रथम चरण के बुनियादी ढाँचे के लिए ₹493 करोड़ की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता दे रही है।
परियोजना के क्रियान्वयन हेतु गठित विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) में मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी निर्धारित की गई है। यह साझेदारी परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन और निवेशकों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
निवेश प्रतिबद्धताएँ और रोज़गार संभावनाएँ
TMZ के लिए निवेश आकर्षित करने को लेकर सिंधिया ने दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में निवेशक रोड शो और बैठकें आयोजित कीं। दिल्ली रोड शो में कंपनियों की ओर से लगभग ₹3,500 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता मिली, जिससे करीब 14,000 रोज़गार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
4 अगस्त को मुंबई में आयोजित रोड शो में लगभग ₹2,000 करोड़ के निवेश और करीब 4,000 रोज़गार अवसरों की प्रतिबद्धता प्राप्त हुई। बेंगलुरु की निवेशक बैठक में टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों ने रुचि दिखाते हुए लगभग ₹700–800 करोड़ के अतिरिक्त निवेश प्रस्ताव रखे।
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप TMZ के लिए अब तक ₹5,500 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव और 18,000 से अधिक रोज़गार अवसरों की संभावना उभरी है।
तकनीकी फ़ोकस और प्लग-एंड-प्ले मॉडल
TMZ को विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की तर्ज पर प्लग-एंड-प्ले मॉडल के तहत विकसित करने की योजना है। इस मॉडल के अंतर्गत कंपनियों को तैयार बुनियादी ढाँचा, साझा सुविधाएँ और औद्योगिक वातावरण मिलेगा, जिससे वे कम समय में उत्पादन शुरू कर सकें।
टेलीकॉम उपकरणों और कंपोनेंट्स के निर्माण के साथ-साथ डिज़ाइन, अनुसंधान एवं विकास, परीक्षण, तथा ऑप्टिकल फाइबर, सेमीकंडक्टर और 5G/6G जैसी उन्नत तकनीकों से जुड़े उद्योगों के विकास पर भी ज़ोर रहेगा। जुलाई 2026 में केंद्रीय दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच इस परियोजना को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र पर असर
सिंधिया ने हाल ही में SADA क्षेत्र में TMZ के लिए चिह्नित भूमि का स्थल निरीक्षण किया और वरिष्ठ अधिकारियों को परियोजना के कार्यों को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने तथा निवेशकों के लिए बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यह ऐसे समय में आया है जब ग्वालियर-चंबल क्षेत्र औद्योगिक निवेश की दृष्टि से ऐतिहासिक रूप से पिछड़ा माना जाता रहा है।
TMZ में 24 से अधिक विनिर्माण इकाइयों को एक साथ विकसित करने का लक्ष्य है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार, तकनीकी कौशल और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे। गौरतलब है कि यह परियोजना भारत को वैश्विक टेलीकॉम विनिर्माण श्रृंखला में मज़बूती से स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी है।
आगे क्या
29 अक्टूबर 2026 को गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में भूमिपूजन समारोह के साथ परियोजना का औपचारिक शुभारंभ होगा। इसके बाद बुनियादी ढाँचे के निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी और निवेशकों के साथ अनुबंध की अगली कड़ी पूरी की जाएगी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार परियोजना के क्रियान्वयन में केंद्र के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर काम कर रही है।