30 जुलाई 2026
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ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, केंद्र देगा ₹493 करोड़ की पूरी मदद

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ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, केंद्र देगा ₹493 करोड़ की पूरी मदद

सारांश

ग्वालियर में ₹493 करोड़ की केंद्रीय सहायता से देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन बनेगा — 350 एकड़ में 5G, 6G, सेमीकंडक्टर और फाइबर ऑप्टिक्स के लिए एकीकृत इकोसिस्टम। यह भारत को वैश्विक दूरसंचार उत्पादन का केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा दांव है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार 30 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) के लिए MoU पर हस्ताक्षर करेंगे।
यह देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन होगा, जो ग्वालियर में लगभग 350 एकड़ में विकसित होगा।
पहले चरण के बुनियादी ढाँचे के लिए केंद्र सरकार ने ₹493 करोड़ की 100% वित्तीय सहायता मंजूर की है।
जोन में मोबाइल फोन , नेटवर्क उपकरण , फाइबर ऑप्टिक्स , सेमीकंडक्टर और 5G/6G R&D सुविधाएँ होंगी।
परियोजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और MSME व स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर खोलेगी।

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 30 जुलाई 2026 को घोषणा की कि केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार मिलकर ग्वालियर में भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करेंगे। यह ऐतिहासिक MoU नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) और मध्य प्रदेश के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के बीच हस्ताक्षरित किया जाएगा।

परियोजना का स्वरूप और आकार

प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन लगभग 350 एकड़ भूमि पर प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिससे निवेशकों को तत्काल उत्पादन शुरू करने की सुविधा मिलेगी। परियोजना के पहले चरण में बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने ₹493 करोड़ की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है।

इस एकीकृत जोन में मोबाइल फोन, दूरसंचार नेटवर्क उपकरण, फाइबर ऑप्टिक उत्पाद, सेमीकंडक्टर तथा अगली पीढ़ी की 5G और 6G तकनीकों के अनुसंधान, विकास और उत्पादन के लिए समर्पित सुविधाएँ विकसित की जाएंगी।

सरकार का विज़न और मंत्री का बयान

इस पहल को भारत के दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए सिंधिया ने कहा, 'टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और विकसित भारत 2047 के विज़न को नई गति देगा। इससे देश में दूरसंचार विनिर्माण के लिए विश्वस्तरीय इकोसिस्टम तैयार होगा।'

उन्होंने यह भी कहा कि 'ग्वालियर में देश के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना से न केवल दूरसंचार विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निवेश आकर्षित होगा, रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और नवाचार तथा निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा।'

राष्ट्रीय मिशनों से जुड़ाव

अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट योजनाओं जैसी राष्ट्रीय पहलों को और मज़बूत करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

गौरतलब है कि इस जोन के माध्यम से अनुसंधान, नवाचार और विनिर्माण को एकीकृत करने वाला व्यापक इकोसिस्टम तैयार होगा, जिससे एमएसएमई (MSME) और स्टार्टअप्स को भी नए अवसर मिलेंगे।

समारोह और आगे की राह

MoU हस्ताक्षर समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री सिंधिया तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। संचालन शुरू होने के बाद यह TMZ भारत को वैश्विक दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में एक प्रमुख उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — भारत में 'प्लग-एंड-प्ले' औद्योगिक जोन की अवधारणा वर्षों से कागज़ पर आकर्षक रही है, पर ज़मीन पर देरी एक पुरानी समस्या है। ₹493 करोड़ की 100% केंद्रीय फंडिंग राज्य पर वित्तीय बोझ नहीं डालती, जो एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन 5G और 6G R&D के दावे तब तक अधूरे हैं जब तक निजी क्षेत्र की प्रतिबद्धता और रोज़गार सृजन के ठोस लक्ष्य सार्वजनिक न हों — जो अभी तक स्पष्ट नहीं किए गए।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन क्या है?
यह भारत का पहला समर्पित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) है, जो ग्वालियर में लगभग 350 एकड़ में प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसमें मोबाइल फोन, नेटवर्क उपकरण, सेमीकंडक्टर और 5G/6G तकनीक के उत्पादन व अनुसंधान की सुविधाएँ होंगी।
इस परियोजना के लिए कितना पैसा मंजूर हुआ है?
केंद्र सरकार ने पहले चरण के बुनियादी ढाँचे के लिए ₹493 करोड़ की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता मंजूर की है। यह पूरी राशि केंद्र सरकार देगी, राज्य पर कोई वित्तीय भार नहीं होगा।
MoU पर हस्ताक्षर कब और कहाँ होंगे?
MoU 30 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हस्ताक्षरित किया जाएगा। इस समारोह में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मुख्यमंत्री मोहन यादव और दोनों सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
इस जोन से किन्हें फायदा होगा?
बड़े निवेशकों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े MSME और स्टार्टअप्स को नए अवसर मिलेंगे। अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना रोज़गार सृजन, निवेश आकर्षण और निर्यात को बढ़ावा देगी।
यह परियोजना राष्ट्रीय मिशनों से कैसे जुड़ी है?
यह TMZ इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट योजनाओं को मज़बूत करेगा। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत 2047 जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अनुरूप है।
राष्ट्र प्रेस
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