ग्वालियर में बनेगा भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, ₹3,500 करोड़ निवेश और 14,000 रोज़गार का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) की स्थापना मध्य प्रदेश के ग्वालियर में की जाएगी — यह देश को वैश्विक टेलीकॉम उत्पादन केंद्र बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। 30 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय संचार मंत्रालय और मध्य प्रदेश सरकार के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के बीच इस परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस परियोजना से ₹3,500 करोड़ का निवेश आने और 14,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सृजित होने का अनुमान है।
परियोजना का स्वरूप और दायरा
ग्वालियर में लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन विकसित किया जाएगा। यह परिसर मोबाइल फोन, नेटवर्क उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स, सेमीकंडक्टर तथा 5G और 6G जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों के अनुसंधान, डिज़ाइन, विकास, परीक्षण और उत्पादन का एकीकृत केंद्र होगा। परियोजना के पहले चरण में केंद्र सरकार ने आधारभूत ढाँचे के विकास के लिए ₹500 करोड़ की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता को मंज़ूरी दे दी है।
कौन-सी कंपनियाँ करेंगी निवेश
डिक्सन टेक्नोलॉजीज, HFCL और तेजस नेटवर्क्स जैसी प्रमुख घरेलू कंपनियाँ इस जोन में निवेश करेंगी। इन कंपनियों की मौजूदगी से परियोजना को तकनीकी और वित्तीय दोनों स्तरों पर मज़बूती मिलेगी। गौरतलब है कि डिक्सन और HFCL पहले से ही भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम उपकरण क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
संस्थागत ढाँचा: SPV का गठन
परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) बनाया जाएगा, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। यह व्यवस्था निवेश प्रबंधन और दीर्घकालिक विकास के लिए एक मज़बूत संस्थागत आधार प्रदान करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार सहकारी संघवाद के ज़रिए राज्यों के साथ मिलकर औद्योगिक नीति को ज़मीन पर उतारने पर ज़ोर दे रही है।
नेताओं की प्रतिक्रिया
MoU हस्ताक्षर समारोह में केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उपस्थित रहे। सिंधिया ने इसे मध्य प्रदेश और देश दोनों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और 'विकसित भारत 2047' के विज़न को नई गति देगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अब ऐसा राष्ट्र बनना होगा जिस पर दुनिया निर्भर हो, न कि जो दुनिया पर निर्भर हो।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र पर असर
सिंधिया के अनुसार, इस परियोजना से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के युवाओं को अपने ही प्रदेश में उच्च-गुणवत्ता वाले तकनीकी रोज़गार मिलेंगे। यह इलाका ऐतिहासिक रूप से औद्योगिक विकास में पिछड़ा माना जाता रहा है, और इस हाई-टेक निवेश से वहाँ के युवाओं के पलायन को रोकने में मदद मिल सकती है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश तेज़ी से देश के अग्रणी इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में शुमार होने की राह पर है।