ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन: सिंधिया ने नई दिल्ली में की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, ₹5,500 करोड़ निवेश का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार, 26 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें मध्य प्रदेश के ग्वालियर में प्रस्तावित एशिया के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) की कार्य योजना और क्रियान्वयन प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। यह बैठक ग्वालियर स्थल के निरीक्षण और बेंगलुरु में निवेशकों से हुई चर्चा के बाद आयोजित की गई।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री सिंधिया के कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैठक में परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से मंथन हुआ। सिंधिया ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना से जुड़े सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए और निर्धारित समयसीमा के अनुरूप जमीनी कार्यों में तेज़ी लाई जाए।
गौरतलब है कि 30 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) और मध्य प्रदेश सरकार के बीच TMZ की स्थापना के लिए औपचारिक एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे।
निवेश और रोज़गार का आँकड़ा
MoU के बाद नई दिल्ली में आयोजित पहली निवेशक राउंडटेबल में ₹3,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे लगभग 14,000 रोज़गार अवसर सृजित होने का अनुमान है। इसके बाद 4 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित इन्वेस्टर्स मीट में अतिरिक्त ₹2,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए। इस प्रकार अब तक कुल प्रस्तावित निवेश ₹5,500 करोड़ और संभावित रोज़गार अवसर 18,000 तक पहुँच गए हैं।
परियोजना की रूपरेखा
TMZ के प्रथम चरण में 170 एकड़ का प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक क्लस्टर विकसित किया जाना है। इसमें दूरसंचार एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा नवाचार से जुड़ी गतिविधियों के लिए एकीकृत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। यह परियोजना अपनी तरह की एशिया में पहली पहल बताई जा रही है।
आम जनता और उद्योग पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार दूरसंचार उपकरणों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देने की नीति पर ज़ोर दे रही है। ग्वालियर जैसे टियर-2 शहर में इस स्तर का औद्योगिक क्लस्टर न केवल स्थानीय रोज़गार के द्वार खोलेगा, बल्कि मध्य प्रदेश को देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित कर सकता है।
क्या होगा आगे
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जमीनी स्तर पर कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़े। परियोजना के अगले चरण में और निवेशक बैठकें अपेक्षित हैं, जिनसे प्रस्तावित निवेश और रोज़गार आँकड़ों में और इज़ाफा हो सकता है।