ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन: ₹5,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, CM मोहन यादव ने बेंगलुरु में बताई MP की ताकत
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में आयोजित राउंड टेबल बैठक में निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश आधुनिक तकनीक और निवेश के लिए देश का सबसे अनुकूल राज्य बन चुका है। यह बैठक ग्वालियर में विकसित हो रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) में निवेश आकर्षित करने के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें 25 से अधिक टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मध्य प्रदेश में निवेश की बड़ी तस्वीर
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियों के परिणामस्वरूप पौने तीन वर्षों में लगभग सभी क्षेत्रों में ₹15 लाख करोड़ से अधिक का निवेश मध्यप्रदेश में उतर चुका है। उन्होंने कहा कि देश के भौगोलिक केंद्र में स्थित होने, मजबूत बुनियादी ढाँचे और सरप्लस बिजली की उपलब्धता मध्यप्रदेश को अन्य राज्यों से अलग बनाती है।
यादव ने धार के 'पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क' का उल्लेख किया, जिसका भूमिपूजन 2025 में हुआ था और उसी दौरान पार्क का एक-एक प्लॉट बुक हो गया। इसी प्रकार मोहासा-बाबई के नवकरणीय ऊर्जा उपकरण पार्क के तीन चरण पूरी तरह बुक होने के बाद अब चौथे चरण पर कार्य शुरू हो चुका है।
ग्वालियर TMZ: क्या है खास
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बैठक में कहा कि ग्वालियर में देश का पहला समर्पित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन स्थापित किया जा रहा है। यह पार्क टेलीकॉम के सभी 7 प्रमुख वर्टिकल्स — OEM, ऑप्टिकल फायबर केबल, डेटा सेंटर व उपकरण, सेमीकंडक्टर चिपसेट, एक्टिव-पैसिव कंपोनेंट्स, TSP-IT सेवाएं और EMS/PCB विनिर्माण — को एक ही इको-सिस्टम में समाहित करेगा।
गौरतलब है कि जुलाई 2026 में मध्यप्रदेश सरकार और केंद्रीय दूरसंचार विभाग ने 51:49 की इक्विटी भागीदारी वाले एसपीवी के ज़रिए इस परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें MPIDIC मास्टर डेवलपर है। यहाँ सिम से लेकर सैटेलाइट कम्युनिकेशन उपकरण, 5G और 6G उपकरण, ऑप्टिकल फायबर और IoT से जुड़े उत्पाद बनाए जाएंगे।
अभूतपूर्व प्रोत्साहन पैकेज
अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने प्रेजेंटेशन में बताया कि ₹12,000 करोड़ के कैपेक्स पर लगभग ₹8,000 करोड़ का वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज दिया जाएगा — जिसे मंत्री सिंधिया ने 'विश्व स्तर पर अभूतपूर्व' बताया। निवेशकों को 170 एकड़ के विकसित पार्क में ₹1 टोकन प्रीमियम पर भूमि, 30 वर्षों के लिए ₹1 प्रति वर्गमीटर लीज रेंट और 100% स्टाम्प ड्यूटी छूट दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त प्लांट व मशीनरी पर 50% प्रत्यक्ष पूंजीगत अनुदान, 5 वर्षों तक ₹2 प्रति यूनिट बिजली सब्सिडी, प्रति कर्मचारी ₹5,000 मासिक सहायता और ₹30,000 वार्षिक कौशल प्रशिक्षण अनुदान का प्रावधान भी किया गया है। केंद्र और राज्य के संयुक्त SPV के माध्यम से निवेशकों की हर समस्या का समाधान 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।
रोड-शो से अब तक के निवेश प्रस्ताव
मंत्री सिंधिया ने बताया कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में आयोजित रोड-शो से अब तक लगभग 24-25 कंपनियों से ₹5,500 करोड़ से अधिक के निवेश और 17,000 से अधिक रोजगार सृजन के प्रस्ताव मिल चुके हैं। दिल्ली निवेशक सम्मेलन से ₹3,500 करोड़ के निवेश और 14,000 रोजगार की प्रतिबद्धताएं आईं, जबकि मुंबई से ₹2,000 करोड़ और 4,000 रोजगार के प्रस्ताव प्राप्त हुए।
केंद्रीय दूरसंचार सचिव अमित अग्रवाल ने कहा कि यह भारत का एकमात्र ऐसा समर्पित मैन्युफैक्चरिंग जोन है जहाँ टेलीकॉम सेक्टर का संपूर्ण इको-सिस्टम एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगा। उन्होंने बताया कि 'मेक इन इंडिया' के तहत ₹500 करोड़ की लागत से 5G, IoT और सैटेलाइट उपकरणों के लिए साझा टेस्टिंग व सर्टिफिकेशन लैब स्थापित की जा रही है।
ग्वालियर की रणनीतिक स्थिति
मंत्री सिंधिया ने रेखांकित किया कि ग्वालियर को दिल्ली के 'काउंटर मैग्नेट सिटी' के रूप में विकसित किया गया है। यह शहर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से सीधी हवाई सेवा से जुड़ा है। ₹5,500 करोड़ की लागत से 6-लेन आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेस-वे तैयार हो रहा है, जिससे आगरा की दूरी मात्र 40 मिनट में तय होगी। इसके साथ ₹600 करोड़ का नया एयरपोर्ट, ₹600 करोड़ का आधुनिक रेलवे स्टेशन और 40-50 इंजीनियरिंग कॉलेजों से प्रतिवर्ष 10,000-12,000 प्रशिक्षित इंजीनियर्स की उपलब्धता इसे विनिर्माण का आदर्श केंद्र बनाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सर्विस-ड्रिवन से प्रोडक्ट-ड्रिवन अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और टेलीकॉम उपकरण निर्यात में तेज वृद्धि दर्ज की जा रही है। आगामी भूमि-पूजन के बाद प्रथम चरण बंद हो जाएगा, जिसके बाद दूसरे चरण में रियायतें इस स्तर पर उपलब्ध नहीं होंगी।