हरियाणा में एटीएस का गठन: पंचकूला और गुरुग्राम में बनेंगे दो विशेष थाने, आईजी करेंगे नेतृत्व
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा सरकार ने 11 जून 2026 को राज्य में आतंकवाद-रोधी दस्ता (एटीएस) के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। गृह विभाग द्वारा जारी इस अधिसूचना के तहत एटीएस आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच, निगरानी और निपटान का काम करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार का यह कदम राज्य में सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
कानूनी आधार और प्रशासनिक संरचना
हरियाणा पुलिस अधिनियम-2007 की धारा 17 की उपधारा (1) और (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल ने एटीएस के गठन को स्वीकृति दी है। अधिसूचना के अनुसार, एटीएस का प्रमुख कम-से-कम पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रैंक का अधिकारी होगा। यह अधिकारी अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) के प्रमुख के माध्यम से पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सीधे रिपोर्ट करेगा।
दो विशेष थाने: जिलों का विभाजन
एटीएस के संचालन के लिए हरियाणा में दो अलग थाने स्थापित किए जाएंगे — एक पंचकूला में और दूसरा गुरुग्राम में। पंचकूला एटीएस थाने के अधिकार क्षेत्र में पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, कैथल, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद, सिरसा, रोहतक, भिवानी और चरखी दादरी जिले आएंगे। वहीं, गुरुग्राम थाने के तहत सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिलों में आतंकवाद संबंधी मामलों की जांच होगी।
डीजीपी की पूर्व घोषणा और तैयारी
गौरतलब है कि हरियाणा के डीजीपी अजय सिंघल ने पहले ही संकेत दिया था कि राज्य सरकार एक समर्पित एटीएस बनाने की प्रक्रिया में है। उन्होंने बताया था कि यह दस्ता अत्याधुनिक संसाधनों और विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मियों से लैस होगा। आईजी के नेतृत्व में दो से तीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रशासन, समन्वय और जांच कार्यों की देखरेख करेंगे।
केंद्रीय दिशानिर्देशों के अनुरूप संचालन
एटीएस केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार कार्य करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत के कई राज्य आतंकवाद और संगठित अपराध के आपसी संबंध को लेकर सतर्क हैं। हरियाणा, जो दिल्ली-एनसीआर से सटा है और कई राष्ट्रीय राजमार्गों का केंद्र है, रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। एटीएस के गठन से राज्य पुलिस को जांच में विशेषज्ञता और केंद्रीकृत समन्वय का लाभ मिलने की उम्मीद है।