महाराष्ट्र सरकार ने 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों पर प्रतिबंध लगाया, भौतिक-डिजिटल प्रतियाँ होंगी जब्त
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग ने 7 अगस्त 2026 को एक असाधारण राजपत्र अधिसूचना जारी करते हुए आतंकवादी संगठनों से जुड़े 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों, पत्रिकाओं और साहित्य पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन प्रकाशनों की सभी भौतिक एवं डिजिटल प्रतियाँ सरकार के पक्ष में जब्त की जाएंगी। यह कार्रवाई आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार पर लगाम लगाने की दिशा में राज्य का अब तक का सबसे बड़ा एकल प्रशासनिक कदम मानी जा रही है।
प्रतिबंध का आधार क्या है
राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, मुंबई एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) की जाँच, खुफिया एजेंसियों से प्राप्त इनपुट और साइबर निगरानी रिपोर्टों से यह सामने आया कि कट्टरपंथी साहित्य एवं डिजिटल सामग्री का प्रसार लगातार जारी था। अधिसूचना में कहा गया कि ऐसी सामग्री हिंसक चरमपंथ और जिहाद का महिमामंडन करती है, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करती है, आतंकवादी संगठनों में भर्ती को बढ़ावा देती है और भारत की संप्रभुता, अखंडता, राज्य की सुरक्षा एवं सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है।
सरकारी अधिसूचना में उद्धृत किया गया: 'खुफिया जानकारी, साइबर निगरानी रिपोर्ट और एटीएस की जांच से पता चला है कि आतंकवादी और गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल या उनका समर्थन करने वाले संगठनों से जुड़े कट्टरपंथी और चरमपंथी साहित्य, प्रकाशन और प्रचार सामग्री का लगातार प्रसार किया जा रहा है।'
एटीएस की भूमिका और कानूनी आधार
मुंबई एटीएस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने 17 मार्च को राज्य सरकार को एक पत्र भेजकर सूचित किया था कि कुछ समाचार पत्रों, पुस्तकों, दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों को जब्त करना आवश्यक है, क्योंकि वे भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा तथा सार्वजनिक व्यवस्था के विरुद्ध गतिविधियों से सीधे जुड़ी हैं। इसी पत्र के आधार पर राज्य सरकार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 98(1) के तहत यह अधिसूचना जारी की।
गौरतलब है कि बीएनएसएस 2023 पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह लागू हुई है और इसकी धारा 98(1) राज्य को ऐसी सामग्री पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो।
सामग्री की प्रकृति और खतरे का दायरा
अधिकारियों के अनुसार, प्रतिबंधित सामग्री में मुद्रित पत्रिकाएँ, पुस्तकें, पर्चे और डिजिटल फ़ाइलें शामिल हैं जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में आतंकवाद-रोधी एजेंसियाँ ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण के बढ़ते मामलों पर नज़र रख रही हैं। प्रतिबंधित 114 प्रकाशनों की सूची राजपत्र अधिसूचना के साथ संलग्न की गई है।
आगे क्या होगा
अधिसूचना के लागू होते ही राज्य पुलिस और एटीएस को इन प्रकाशनों की भौतिक एवं डिजिटल प्रतियाँ जब्त करने का अधिकार मिल गया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिबंधित सामग्री रखने या वितरित करने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है। नागरिक अधिकार संगठनों की ओर से इस प्रतिबंध की विस्तृत समीक्षा की माँग उठने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसे कदमों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस होती रही है।