7 अगस्त 2026
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महाराष्ट्र सरकार ने 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों पर प्रतिबंध लगाया, भौतिक-डिजिटल प्रतियाँ होंगी जब्त

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महाराष्ट्र सरकार ने 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों पर प्रतिबंध लगाया, भौतिक-डिजिटल प्रतियाँ होंगी जब्त

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने एटीएस जाँच और साइबर निगरानी के आधार पर 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों पर प्रतिबंध लगाया — भौतिक और डिजिटल दोनों। बीएनएसएस 2023 की धारा 98(1) के तहत जारी यह राजपत्र अधिसूचना राज्य की आतंकवाद-रोधी कार्रवाई का अब तक का सबसे व्यापक प्रशासनिक कदम है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र गृह विभाग ने 7 अगस्त 2026 को असाधारण राजपत्र अधिसूचना जारी कर 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों पर प्रतिबंध लगाया।
प्रतिबंधित सामग्री की सभी भौतिक एवं डिजिटल प्रतियाँ सरकार के पक्ष में जब्त की जाएंगी।
कार्रवाई का आधार मुंबई एटीएस की जाँच, खुफिया इनपुट और साइबर निगरानी रिपोर्टें हैं।
एटीएस अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने 17 मार्च को राज्य सरकार को पत्र भेजकर जब्ती की सिफारिश की थी।
प्रतिबंध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 98(1) के तहत जारी किया गया है।

महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग ने 7 अगस्त 2026 को एक असाधारण राजपत्र अधिसूचना जारी करते हुए आतंकवादी संगठनों से जुड़े 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों, पत्रिकाओं और साहित्य पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन प्रकाशनों की सभी भौतिक एवं डिजिटल प्रतियाँ सरकार के पक्ष में जब्त की जाएंगी। यह कार्रवाई आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार पर लगाम लगाने की दिशा में राज्य का अब तक का सबसे बड़ा एकल प्रशासनिक कदम मानी जा रही है।

प्रतिबंध का आधार क्या है

राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, मुंबई एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) की जाँच, खुफिया एजेंसियों से प्राप्त इनपुट और साइबर निगरानी रिपोर्टों से यह सामने आया कि कट्टरपंथी साहित्य एवं डिजिटल सामग्री का प्रसार लगातार जारी था। अधिसूचना में कहा गया कि ऐसी सामग्री हिंसक चरमपंथ और जिहाद का महिमामंडन करती है, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करती है, आतंकवादी संगठनों में भर्ती को बढ़ावा देती है और भारत की संप्रभुता, अखंडता, राज्य की सुरक्षा एवं सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है।

सरकारी अधिसूचना में उद्धृत किया गया: 'खुफिया जानकारी, साइबर निगरानी रिपोर्ट और एटीएस की जांच से पता चला है कि आतंकवादी और गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल या उनका समर्थन करने वाले संगठनों से जुड़े कट्टरपंथी और चरमपंथी साहित्य, प्रकाशन और प्रचार सामग्री का लगातार प्रसार किया जा रहा है।'

एटीएस की भूमिका और कानूनी आधार

मुंबई एटीएस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने 17 मार्च को राज्य सरकार को एक पत्र भेजकर सूचित किया था कि कुछ समाचार पत्रों, पुस्तकों, दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों को जब्त करना आवश्यक है, क्योंकि वे भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा तथा सार्वजनिक व्यवस्था के विरुद्ध गतिविधियों से सीधे जुड़ी हैं। इसी पत्र के आधार पर राज्य सरकार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 98(1) के तहत यह अधिसूचना जारी की।

गौरतलब है कि बीएनएसएस 2023 पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह लागू हुई है और इसकी धारा 98(1) राज्य को ऐसी सामग्री पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो।

सामग्री की प्रकृति और खतरे का दायरा

अधिकारियों के अनुसार, प्रतिबंधित सामग्री में मुद्रित पत्रिकाएँ, पुस्तकें, पर्चे और डिजिटल फ़ाइलें शामिल हैं जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में आतंकवाद-रोधी एजेंसियाँ ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण के बढ़ते मामलों पर नज़र रख रही हैं। प्रतिबंधित 114 प्रकाशनों की सूची राजपत्र अधिसूचना के साथ संलग्न की गई है।

आगे क्या होगा

अधिसूचना के लागू होते ही राज्य पुलिस और एटीएस को इन प्रकाशनों की भौतिक एवं डिजिटल प्रतियाँ जब्त करने का अधिकार मिल गया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिबंधित सामग्री रखने या वितरित करने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है। नागरिक अधिकार संगठनों की ओर से इस प्रतिबंध की विस्तृत समीक्षा की माँग उठने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसे कदमों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस होती रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि क्या इस सूची में शामिल प्रत्येक प्रकाशन की स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा हुई है। बीएनएसएस की धारा 98(1) कार्यपालिका को व्यापक अधिकार देती है, जिसका उपयोग अतीत में विवादास्पद रहा है। डिजिटल सामग्री पर प्रतिबंध तकनीकी रूप से जटिल है — वीपीएन और मिरर साइटें इसे आंशिक रूप से निष्प्रभावी कर सकती हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या यह कार्रवाई कट्टरपंथीकरण की जड़ों पर प्रहार करती है, या केवल सतह पर दिखने वाली सामग्री तक सीमित रहती है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार ने किन प्रकाशनों पर प्रतिबंध लगाया है?
महाराष्ट्र सरकार ने आतंकवादी संगठनों से जुड़े 114 कट्टरपंथी प्रकाशनों, पत्रिकाओं और साहित्य पर प्रतिबंध लगाया है। इन प्रकाशनों की सूची 7 अगस्त 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के साथ संलग्न है।
यह प्रतिबंध किस कानून के तहत लगाया गया है?
यह प्रतिबंध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 98(1) के तहत जारी किया गया है, जो राज्य सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक सामग्री पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है।
मुंबई एटीएस की इस मामले में क्या भूमिका रही?
मुंबई एटीएस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने 17 मार्च को राज्य सरकार को पत्र लिखकर इन प्रकाशनों को जब्त करने की सिफारिश की थी। एटीएस की जाँच, खुफिया इनपुट और साइबर निगरानी रिपोर्टें इस प्रतिबंध का मुख्य आधार बनीं।
क्या डिजिटल सामग्री पर भी यह प्रतिबंध लागू होगा?
हाँ, अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंधित प्रकाशनों की भौतिक और डिजिटल दोनों प्रकार की प्रतियाँ सरकार के पक्ष में जब्त की जाएंगी।
इन प्रकाशनों को खतरनाक क्यों माना गया?
सरकार के अनुसार, ये प्रकाशन हिंसक चरमपंथ और जिहाद का महिमामंडन करते हैं, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करते हैं, आतंकवादी संगठनों में भर्ती को बढ़ावा देते हैं और भारत की संप्रभुता, अखंडता तथा सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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