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जींद के किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना बनी संजीवनी, कम खाद में बढ़ रही फसल उत्पादकता

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जींद के किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना बनी संजीवनी, कम खाद में बढ़ रही फसल उत्पादकता

सारांश

जींद के किसान अनूप और धर्मवीर जैसे लाभार्थी बता रहे हैं कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने उनकी खेती की तस्वीर बदल दी है — मिट्टी की वैज्ञानिक जाँच से सही खाद, सही मात्रा और कम लागत में बेहतर उपज का रास्ता खुल रहा है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना हरियाणा के जींद जिले में किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है।
योजना के तहत खेतों से मिट्टी के नमूने प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं और पोषक तत्वों की सटीक रिपोर्ट किसानों को दी जाती है।
किसान अनूप और धर्मवीर ने कहा कि योजना से उर्वरक लागत घटी और भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में मदद मिल रही है।
मिट्टी परीक्षण-आधारित खेती से अनावश्यक रासायनिक खाद के उपयोग पर रोक लग रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित मृदा परीक्षण से राज्य में उर्वरक सब्सिडी बोझ में भी कमी आ सकती है।

हरियाणा के जींद जिले में केंद्र सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना किसानों के लिए एक प्रभावी कृषि सुधार साधन बनकर उभरी है। स्थानीय किसानों के अनुसार, इस योजना के तहत मिट्टी की वैज्ञानिक जाँच से उन्हें अपने खेतों की उर्वरता और पोषक तत्वों की सटीक स्थिति का पता चल रहा है, जिससे उर्वरक लागत में कटौती करते हुए उत्पादन बढ़ाना संभव हो रहा है। 26 अगस्त को जींद से मिली रिपोर्टों के अनुसार, यह योजना ज़मीनी स्तर पर किसानों की कृषि पद्धति बदलने में सहायक साबित हो रही है।

योजना की कार्यप्रणाली

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अंतर्गत किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लिए जाते हैं, जिन्हें प्रयोगशाला में भेजकर विश्लेषण किया जाता है। इस प्रक्रिया से मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश सहित अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता का पता चलता है। रिपोर्ट के आधार पर किसानों को यह जानकारी मिलती है कि उनकी भूमि को किस खाद और कितनी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता है — जिससे अनावश्यक रासायनिक खाद के उपयोग पर रोक लगती है और लागत घटती है।

किसानों की प्रतिक्रिया

जींद के लाभार्थी किसान अनूप ने कहा, 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना बहुत अच्छी योजना है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और किसानों को कम लागत में फायदा होगा। सरकार किसानों के लिए बहुत अच्छा काम कर रही है।' एक अन्य किसान धर्मवीर ने कहा, 'इस योजना के तहत हमें मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बारे में जानकारी मिली है। यह भविष्य में किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी। इससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी और भूमि की उर्वरा शक्ति भी बनी रहेगी।'

आम किसान पर असर

गौरतलब है कि खेती में उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग न केवल उत्पादन लागत बढ़ाता है, बल्कि दीर्घकाल में भूमि की उत्पादन क्षमता को भी नुकसान पहुँचाता है। मृदा परीक्षण-आधारित खेती इस समस्या का एक वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करती है। जींद के किसानों का अनुभव यह दर्शाता है कि सटीक जानकारी मिलने पर वे खाद की मात्रा को तर्कसंगत बना पा रहे हैं, जिससे प्रति एकड़ उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आ रही है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र में लागत घटाकर किसानों की शुद्ध आय बढ़ाने पर ज़ोर दे रही है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को देशभर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। जींद में मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया इस योजना के व्यापक विस्तार की संभावनाओं को और मज़बूत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिट्टी परीक्षण को नियमित कृषि चक्र का हिस्सा बनाया जाए, तो हरियाणा जैसे कृषि-प्रधान राज्यों में उर्वरक सब्सिडी बोझ में भी कमी लाई जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जींद जैसे ज़िलों में नमूना संग्रह से लेकर रिपोर्ट वितरण तक की प्रक्रिया कितनी नियमित और समयबद्ध है। किसानों की सकारात्मक प्रतिक्रिया उत्साहजनक है, परंतु यह योजना तभी दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है जब हर दो-तीन वर्ष में मिट्टी परीक्षण का चक्र सुनिश्चित हो और किसानों को रिपोर्ट की भाषा समझाने के लिए पर्याप्त कृषि विस्तार कार्यकर्ता उपलब्ध हों। हरियाणा जैसे राज्य में, जहाँ रासायनिक खाद का अत्यधिक उपयोग भूजल और मिट्टी दोनों को प्रभावित कर रहा है, इस योजना की सफलता महज़ उत्पादकता का नहीं, पर्यावरणीय स्थिरता का भी प्रश्न है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना क्या है?
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना केंद्र सरकार की एक कृषि पहल है जिसके तहत किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर प्रयोगशाला में उनका विश्लेषण किया जाता है। इस विश्लेषण के आधार पर किसानों को एक कार्ड दिया जाता है जिसमें मिट्टी के पोषक तत्वों की स्थिति और उचित उर्वरक की सिफारिश होती है।
जींद के किसानों को इस योजना से क्या फायदा हो रहा है?
जींद के किसानों के अनुसार, मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट से उन्हें पता चलता है कि उनके खेत को किस खाद की और कितनी मात्रा में ज़रूरत है। इससे अनावश्यक उर्वरक खर्च घटता है और फसल उत्पादकता बढ़ती है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना में मिट्टी की जाँच कैसे होती है?
योजना के तहत कृषि विभाग के कर्मचारी किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र करते हैं और उन्हें सरकारी प्रयोगशाला में भेजते हैं। जाँच के बाद किसान को मिट्टी की पोषण स्थिति और खेती संबंधी सुझाव वाला कार्ड दिया जाता है।
क्या यह योजना भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में मदद करती है?
हाँ, किसान धर्मवीर के अनुसार इस योजना से भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में मदद मिलती है। वैज्ञानिक आधार पर खाद का उपयोग करने से मिट्टी में रासायनिक असंतुलन नहीं होता और दीर्घकाल में उत्पादन क्षमता सुरक्षित रहती है।
हरियाणा में यह योजना किन जिलों में लागू है?
रिपोर्टों के अनुसार, यह योजना हरियाणा के जींद जिले सहित राज्य के अन्य जिलों में भी लागू की जा रही है। केंद्र सरकार इसे देशभर में चरणबद्ध तरीके से विस्तारित कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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