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क्या गुजरात में पहली बार ‘फॉरेस्ट सॉइल हेल्थ कार्ड’ का लोकार्पण हुआ?

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क्या गुजरात में पहली बार ‘फॉरेस्ट सॉइल हेल्थ कार्ड’ का लोकार्पण हुआ?

सारांश

गुजरात ने वन विकास में एक नई दिशा दी है। यहाँ 28 टेरिटरी डिविजनों में 'फॉरेस्ट सॉइल हेल्थ कार्ड' का लोकार्पण हुआ है। यह परियोजना राज्य के वनों के संरक्षण और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जानें इस पहल के बारे में अधिक जानकारी।

मुख्य बातें

फॉरेस्ट सॉइल हेल्थ कार्ड का लोकार्पण गुजरात में हुआ।
इसमें १,२१५ मिट्टी के नमूने लिए गए हैं।
परियोजना का उद्देश्य वनों के संरक्षण और विकास में मदद करना है।
यह पहल कैंपा द्वारा अनुदानित है।
वन मंत्री ने अधिकारियों को संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

गांधीनगर, २५ सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। राज्य में वन विकास के क्षेत्र में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई, जब मुख्यमंत्री कार्यालय से वन और पर्यावरण मंत्री मुलुभाई बेरा के हस्ते २८ टेरिटरी डिविजनों में ‘फॉरेस्ट सॉइल हेल्थ कार्ड’ का लोकार्पण किया गया। यह पहली बार है कि गुजरात में इस तरह की महत्वाकांक्षी परियोजना लागू हुई है।

वन और पर्यावरण मंत्री मुलुभाई बेरा ने बताया कि राज्य में विभिन्न ४४४ स्थानों से तीन अलग-अलग गहराई पर १,२१५ मिट्टी के नमूने एकत्रित कर उनका परीक्षण किया गया है। इस प्रक्रिया से प्राप्त जानकारी के आधार पर गुजरात में वनों के संरक्षण और विकास में महत्वपूर्ण परिणाम प्राप्त होंगे।

उन्होंने आगे बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष २००५ में आयोजित कृषि महोत्सव में पहली बार ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ की अवधारणा प्रस्तुत की थी, जिसका उद्देश्य कृषि भूमि की गुणवत्ता का परीक्षण करना था। केंद्र सरकार द्वारा १९ फरवरी २०१५ को इस योजना की शुरुआत की गई थी, ताकि किसानों को अत्यधिक रासायनिक और दवा उपयोग से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। अब वन क्षेत्रों के लिए यह पहल ‘फॉरेस्ट सॉइल हेल्थ कार्ड’ के रूप में लागू की गई है, जिससे वन विभाग को वनों की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक दिशा मिल सकेगी।

इस परियोजना के तहत गुजरात, राजस्थान और दादरा नागर हवेली में कार्य पूरा किया गया है। कुल ४४४ स्थलों से १,२१५ मिट्टी के नमूने लिए गए और प्रत्येक नमूने का परीक्षण १२ महत्वपूर्ण मानकों (पीएच, ईसी, कार्बनिक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सल्फर, जिंक, बोरॉन, आयरन, मैंगनीज, कॉपर) पर किया गया।

इस पहल के अंतर्गत २८ भू-सम्बंधित वन विभागों के लिए ‘फॉरेस्ट सॉइल हेल्थ कार्ड’ तैयार किए गए हैं।

गुजरात राज्य वन विभाग के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक और हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स डा. एपी. सिंह ने बताया कि यह परियोजना कैंपा (प्रतिपूरक वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण) द्वारा अनुदानित है और इसके माध्यम से वनों के लिए मिट्टी की गुणवत्ता का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है।

वन मंत्री मुलुभाई बेरा ने सभी अधिकारियों से अनुरोध किया कि फॉरेस्ट सॉइल हेल्थ कार्ड का उपयोग करते हुए वनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं और इस पहल को सफल बनाएं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह राज्य के पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह परियोजना किसानों और वन विभाग दोनों के लिए लाभदायक साबित होगी, जिससे वनों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फॉरेस्ट सॉइल हेल्थ कार्ड क्या है?
यह एक वैज्ञानिक विश्लेषण है जो वनों की मिट्टी की गुणवत्ता को मापता है।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य वनों के संरक्षण और विकास में मदद करना है।
कितने स्थलों से मिट्टी के नमूने लिए गए हैं?
४४४ स्थलों से १,२१५ मिट्टी के नमूने लिए गए हैं।
इस परियोजना को कौन अनुदानित कर रहा है?
यह परियोजना कैंपा द्वारा अनुदानित है।
क्या यह पहली बार है कि गुजरात में ऐसा कार्यक्रम शुरू हुआ है?
हाँ, यह पहली बार है कि गुजरात में ‘फॉरेस्ट सॉइल हेल्थ कार्ड’ का लोकार्पण किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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