15 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाराष्ट्र कैबिनेट ने ₹44,800 करोड़ की अर्बन चैलेंज फंड योजना को मंजूरी दी, शहरों को ग्रोथ हब बनाने का लक्ष्य

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाराष्ट्र कैबिनेट ने ₹44,800 करोड़ की अर्बन चैलेंज फंड योजना को मंजूरी दी, शहरों को ग्रोथ हब बनाने का लक्ष्य

सारांश

महाराष्ट्र कैबिनेट ने ₹44,800 करोड़ की अर्बन चैलेंज फंड योजना को हरी झंडी दी — यह राज्य के शहरी निकायों को सरकारी अनुदान से आगे बढ़कर म्युनिसिपल बॉन्ड और बाज़ार-आधारित वित्तपोषण की ओर ले जाने की सबसे बड़ी कोशिश है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र कैबिनेट ने 14 जुलाई 2026 को केंद्र-प्रायोजित अर्बन चैलेंज फंड (UCF) योजना को लागू करने की मंजूरी दी।
राष्ट्रीय स्तर पर ₹90,000 करोड़ का प्रोजेक्ट फंड; महाराष्ट्र के लिए ₹44,800 करोड़ का ढाँचा।
वित्तपोषण तीन स्रोतों से: केंद्र से ₹11,200 करोड़ , राज्य से ₹11,200 करोड़ , बाज़ार से ₹22,400 करोड़ ।
योजना की अवधि 2025-26 से 2030-31 तक; 22 फोकस क्षेत्र शामिल।
नासिक और पुणे नगर निगम पहले ही म्युनिसिपल बॉन्ड के ज़रिए सफलतापूर्वक फंड जुटा चुके हैं।
पिंपरी-चिंचवड़ और नागपुर नगर निगमों के लिए भी जल्द इसी मॉडल को अपनाया जाएगा।

महाराष्ट्र कैबिनेट ने मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को केंद्र-प्रायोजित अर्बन चैलेंज फंड (UCF) योजना को लागू करने की औपचारिक मंजूरी दे दी। 2025-26 से 2030-31 तक चलने वाली यह योजना शहरी स्थानीय निकायों (ULB) को बाज़ार-आधारित वित्तपोषण, म्युनिसिपल बॉन्ड और बैंक ऋण की ओर ले जाने के लिए तैयार की गई है, ताकि पानी-स्वच्छता, रचनात्मक शहरी पुनर्विकास और शहरों को विकास-केंद्र बनाने जैसे तीन प्रमुख स्तंभों के तहत टिकाऊ राजस्व अवसंरचना खड़ी की जा सके।

योजना की वित्तीय संरचना

सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर कुल ₹90,000 करोड़ के प्रोजेक्ट फंड का प्रस्ताव रखा है। महाराष्ट्र के लिए ₹44,800 करोड़ जुटाने का ढाँचा तैयार किया गया है — इसमें केंद्र सरकार से ₹11,200 करोड़, राज्य सरकार से ₹11,200 करोड़ और बाज़ार-आधारित तरीकों से ₹22,400 करोड़ जुटाए जाएंगे। यह त्रिस्तरीय वित्तपोषण मॉडल UCF की सबसे विशिष्ट विशेषता है, जो पारंपरिक सरकारी अनुदान पर निर्भरता कम करने की कोशिश करता है।

मुख्यमंत्री फडणवीस का विज़न

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पहल पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि UCF के तहत अर्बन फाइनेंसिंग सेल के गठन से शहर विकास के इंजन बनेंगे और उनकी प्रगति में आने वाली संरचनात्मक रुकावटें व्यवस्थित रूप से दूर होंगी। उन्होंने इसे एक इनोवेटिव अभियान बताया जो शहरी क्षेत्रों में नागरिक अवसंरचना और सेवा वितरण में उल्लेखनीय सुधार लाएगा।

महाराष्ट्र की पूर्व सफलताएँ

गौरतलब है कि महाराष्ट्र इस दिशा में पहले ही सफल कदम उठा चुका है। नासिक और पुणे नगर निगमों ने पानी आपूर्ति और स्वच्छता परियोजनाओं के लिए सफलतापूर्वक विशेष निधि जुटाई थी, और इन पहलों को राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) से मंजूरी भी मिल चुकी है। अब पिंपरी-चिंचवड़ और नागपुर नगर निगमों की परियोजनाओं को सहयोग देने के लिए जल्द ही इसी तरह के वित्तपोषण तरीके अपनाए जाएंगे।

योजना के 22 फोकस क्षेत्र

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार UCF अभियान में लगभग 22 मुख्य फोकस क्षेत्र शामिल होंगे। इनमें प्रमुख हैं — डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक अवसंरचना विकास, सर्कुलर इकोनॉमी पहल, भीड़ और ट्रैफिक प्रबंधन परियोजनाएँ, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, 5 से 20 वर्ग किमी तक के शहरी क्षेत्रों का कायाकल्प, छोटे और मध्यम शहरों को ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित करना, बाज़ारों का पुनर्विकास, पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के अनुकूल परिवहन, ट्रांज़िट हब और ट्रांज़िट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) अवसंरचना का उन्नयन, तथा रचनात्मक शहरी नवीनीकरण परियोजनाएँ।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के शहरी निकाय राजस्व संकट और बुनियादी ढाँचे की कमी से जूझ रहे हैं। UCF का म्युनिसिपल बॉन्ड और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल शहरी वित्तपोषण में एक नई दिशा स्थापित कर सकता है। योजना के क्रियान्वयन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ULB बाज़ार से किस हद तक पूंजी आकर्षित कर पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या महाराष्ट्र के छोटे शहरी निकाय — जिनकी क्रेडिट रेटिंग अक्सर कमज़ोर होती है — वास्तव में बाज़ार से ₹22,400 करोड़ आकर्षित कर पाएंगे। नासिक और पुणे जैसे बड़े निकायों की सफलता को पूरे राज्य का मानक मान लेना जोखिमभरा हो सकता है। यह योजना शहरी वित्तपोषण की संरचना बदलने का महत्वाकांक्षी प्रयास है, पर बिना मज़बूत क्रेडिट एन्हांसमेंट तंत्र और ULB क्षमता-निर्माण के, यह केवल बड़े शहरों की योजना बनकर रह सकती है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्बन चैलेंज फंड (UCF) योजना क्या है?
UCF एक केंद्र-प्रायोजित योजना है जो 2025-26 से 2030-31 तक चलेगी और शहरी स्थानीय निकायों को म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के ज़रिए पूंजी जुटाने में सक्षम बनाएगी। इसका उद्देश्य पानी-स्वच्छता, शहरी पुनर्विकास और विकास-केंद्र निर्माण के तीन स्तंभों पर टिकाऊ अवसंरचना तैयार करना है।
महाराष्ट्र के लिए UCF के तहत कितना फंड निर्धारित है?
महाराष्ट्र के लिए ₹44,800 करोड़ का वित्तपोषण ढाँचा तैयार किया गया है। इसमें केंद्र सरकार से ₹11,200 करोड़, राज्य सरकार से ₹11,200 करोड़ और बाज़ार-आधारित स्रोतों से ₹22,400 करोड़ जुटाए जाएंगे।
UCF योजना से महाराष्ट्र के किन शहरों को फायदा होगा?
योजना से राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों को लाभ मिलने की उम्मीद है। नासिक और पुणे नगर निगम पहले ही इस मॉडल के तहत फंड जुटा चुके हैं, जबकि पिंपरी-चिंचवड़ और नागपुर नगर निगमों को भी जल्द इसी तरह के वित्तपोषण से जोड़ा जाएगा।
UCF के 22 फोकस क्षेत्रों में क्या-क्या शामिल है?
योजना में डिजिटल गवर्नेंस, सर्कुलर इकोनॉमी, ट्रैफिक प्रबंधन, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, 5 से 20 वर्ग किमी के शहरी क्षेत्रों का कायाकल्प, ट्रांज़िट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD), पैदल यात्री-अनुकूल परिवहन, बाज़ार पुनर्विकास और पानी-स्वच्छता परियोजनाएँ शामिल हैं।
UCF योजना पारंपरिक शहरी विकास योजनाओं से कैसे अलग है?
UCF की सबसे बड़ी विशेषता इसका बाज़ार-आधारित वित्तपोषण मॉडल है — कुल फंड का आधा हिस्सा (₹22,400 करोड़) म्युनिसिपल बॉन्ड और PPP से जुटाने का लक्ष्य है। पारंपरिक योजनाएँ मुख्यतः सरकारी अनुदान पर निर्भर रहती थीं, जबकि UCF ULB को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर ज़ोर देती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले