महाराष्ट्र कैबिनेट ने ₹44,800 करोड़ की अर्बन चैलेंज फंड योजना को मंजूरी दी, शहरों को ग्रोथ हब बनाने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र कैबिनेट ने मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को केंद्र-प्रायोजित अर्बन चैलेंज फंड (UCF) योजना को लागू करने की औपचारिक मंजूरी दे दी। 2025-26 से 2030-31 तक चलने वाली यह योजना शहरी स्थानीय निकायों (ULB) को बाज़ार-आधारित वित्तपोषण, म्युनिसिपल बॉन्ड और बैंक ऋण की ओर ले जाने के लिए तैयार की गई है, ताकि पानी-स्वच्छता, रचनात्मक शहरी पुनर्विकास और शहरों को विकास-केंद्र बनाने जैसे तीन प्रमुख स्तंभों के तहत टिकाऊ राजस्व अवसंरचना खड़ी की जा सके।
योजना की वित्तीय संरचना
सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर कुल ₹90,000 करोड़ के प्रोजेक्ट फंड का प्रस्ताव रखा है। महाराष्ट्र के लिए ₹44,800 करोड़ जुटाने का ढाँचा तैयार किया गया है — इसमें केंद्र सरकार से ₹11,200 करोड़, राज्य सरकार से ₹11,200 करोड़ और बाज़ार-आधारित तरीकों से ₹22,400 करोड़ जुटाए जाएंगे। यह त्रिस्तरीय वित्तपोषण मॉडल UCF की सबसे विशिष्ट विशेषता है, जो पारंपरिक सरकारी अनुदान पर निर्भरता कम करने की कोशिश करता है।
मुख्यमंत्री फडणवीस का विज़न
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पहल पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि UCF के तहत अर्बन फाइनेंसिंग सेल के गठन से शहर विकास के इंजन बनेंगे और उनकी प्रगति में आने वाली संरचनात्मक रुकावटें व्यवस्थित रूप से दूर होंगी। उन्होंने इसे एक इनोवेटिव अभियान बताया जो शहरी क्षेत्रों में नागरिक अवसंरचना और सेवा वितरण में उल्लेखनीय सुधार लाएगा।
महाराष्ट्र की पूर्व सफलताएँ
गौरतलब है कि महाराष्ट्र इस दिशा में पहले ही सफल कदम उठा चुका है। नासिक और पुणे नगर निगमों ने पानी आपूर्ति और स्वच्छता परियोजनाओं के लिए सफलतापूर्वक विशेष निधि जुटाई थी, और इन पहलों को राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) से मंजूरी भी मिल चुकी है। अब पिंपरी-चिंचवड़ और नागपुर नगर निगमों की परियोजनाओं को सहयोग देने के लिए जल्द ही इसी तरह के वित्तपोषण तरीके अपनाए जाएंगे।
योजना के 22 फोकस क्षेत्र
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार UCF अभियान में लगभग 22 मुख्य फोकस क्षेत्र शामिल होंगे। इनमें प्रमुख हैं — डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक अवसंरचना विकास, सर्कुलर इकोनॉमी पहल, भीड़ और ट्रैफिक प्रबंधन परियोजनाएँ, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, 5 से 20 वर्ग किमी तक के शहरी क्षेत्रों का कायाकल्प, छोटे और मध्यम शहरों को ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित करना, बाज़ारों का पुनर्विकास, पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के अनुकूल परिवहन, ट्रांज़िट हब और ट्रांज़िट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) अवसंरचना का उन्नयन, तथा रचनात्मक शहरी नवीनीकरण परियोजनाएँ।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के शहरी निकाय राजस्व संकट और बुनियादी ढाँचे की कमी से जूझ रहे हैं। UCF का म्युनिसिपल बॉन्ड और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल शहरी वित्तपोषण में एक नई दिशा स्थापित कर सकता है। योजना के क्रियान्वयन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ULB बाज़ार से किस हद तक पूंजी आकर्षित कर पाते हैं।