दक्षिण भारत में मानसून कमजोर, 17 जुलाई के बाद केरल-कर्नाटक में बारिश बढ़ने की संभावना
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून 14 जुलाई 2026 को कमजोर बना हुआ है, जिससे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा रही है। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी), चेन्नई के अनुसार, 17 जुलाई के बाद मानसूनी गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार आने और बारिश बढ़ने की संभावना है।
मानसून क्यों पड़ा कमजोर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस कमजोरी का मुख्य कारण भूमध्य रेखा को पार करने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाओं का शिथिल पड़ना है। इसके चलते पश्चिमी अरब सागर के ऊपर बनने वाला 'लो-लेवल जेट' (जिसे 'सोमाली जेट' भी कहते हैं) सामान्य से कमजोर बना हुआ है।
इसके अतिरिक्त, प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो जैसी परिस्थितियाँ भी मानसून की चाल को प्रभावित कर रही हैं। इन दोनों कारणों से अरब सागर से आने वाली नमी में उल्लेखनीय कमी आई है।
मौसमी असर: गर्मी और लू की चेतावनी
मानसून के कमजोर परिसंचरण और वायुमंडल में नीचे की ओर हवा के प्रवाह (सब्सिडेंस) के कारण बादलों का निर्माण घट गया है। अधिकांश क्षेत्रों में आसमान साफ रहने से सूर्य की किरणें सीधे धरातल तक पहुँच रही हैं, जिससे अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है।
इसी स्थिति को देखते हुए आरएमसी, चेन्नई ने तमिलनाडु के आंतरिक जिलों, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों के लिए लू (हीट वेव) की चेतावनी जारी की है। विभाग ने लोगों को अत्यधिक गर्मी से बचने के लिए आवश्यक सावधानियाँ बरतने की सलाह दी है।
17 जुलाई के बाद राहत के संकेत
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के जीएफएस (12 किलोमीटर) मॉडल के विश्लेषण के अनुसार, 17 जुलाई के आसपास 'लो-लेवल जेट' के धीरे-धीरे मजबूत होने की संभावना है। इससे अरब सागर से नमी का प्रवाह बढ़ेगा और दक्षिण-पश्चिम मानसून पुनः सक्रिय होने लगेगा।
आईएमडी का अनुमान है कि 17 जुलाई के बाद केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियाँ तेज होंगी। बादल छाने और बारिश बढ़ने से तापमान में गिरावट आएगी और लू की स्थिति धीरे-धीरे समाप्त होने लगेगी।
आम जनता पर असर
कमजोर मानसून का सबसे अधिक असर किसानों और खेतिहर मजदूरों पर पड़ रहा है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई के लिए यह अवधि निर्णायक होती है। शहरी क्षेत्रों में भी बिजली की माँग बढ़ी है और पेयजल आपूर्ति पर दबाव पड़ रहा है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत पहले से ही सामान्य से अधिक तापमान झेल रहा है। 17 जुलाई के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद के साथ, मौसम विभाग की निगरानी जारी है।