स्वामित्व योजना के 12 साल: गुजरात ने जारी किए 18.50 लाख प्रॉपर्टी कार्ड, देश में नंबर-1
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना ने ग्रामीण भारत में संपत्ति अधिकारों की तस्वीर बदल दी है — और इस राष्ट्रव्यापी अभियान में गुजरात ने 18,50,614 प्रॉपर्टी कार्ड जारी कर देश में पहला स्थान हासिल किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों में यह योजना सबसे उल्लेखनीय मानी जा रही है, क्योंकि दशकों से कानूनी दस्तावेज़ों के अभाव में ग्रामीण अपनी आवासीय संपत्तियों पर वित्तीय और कानूनी अधिकारों से वंचित थे।
योजना के दूसरे चरण में गुजरात की अग्रणी भूमिका
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात 2021-22 में स्वामित्व योजना के दूसरे चरण से जुड़ा और आज राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष पर है। आंकड़ों के अनुसार, इस चरण में देशभर के 58,197 गांवों में ड्रोन उड़ानें हुईं और कुल 32,35,260 प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए गए। इनमें से अकेले गुजरात ने 14,900 गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण और 11,511 गांवों का प्रमाणीकरण पूरा कर देश के कुल कार्डों में 50 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी हासिल की है।
तकनीक और समन्वय: सफलता की नींव
इस अभियान में भारतीय सर्वेक्षण विभाग, गुजरात राजस्व विभाग और गुजरात पंचायती राज विभाग के बीच समन्वय को सफलता का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक और GIS आधारित मैपिंग के ज़रिए ग्रामीण संपत्तियों का सटीक मानचित्रण किया गया, जिससे ग्राम नियोजन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो गई है।
जिला स्तर पर मेहसाणा (1,66,504 कार्ड) और अहमदाबाद (1,53,125 कार्ड) सबसे आगे हैं। इसके अलावा खेड़ा, बनासकांठा और आणंद में भी 1 लाख से अधिक कार्ड तैयार किए गए हैं।
आम जनता पर असर: भूमि विवाद से मुक्ति, बैंक लोन तक पहुँच
पारदर्शी सत्यापन के बाद कार्ड जारी होने से पीढ़ियों से चले आ रहे भूमि विवाद और अदालती मामले लगभग समाप्त हो गए हैं। कानूनी मान्यता मिलने के बाद ग्रामीण अब अपने प्रॉपर्टी कार्ड के आधार पर बैंकों से ऋण प्राप्त कर रहे हैं। गुजरात में इस कार्ड के आधार पर ₹50 लाख तक के बैंक ऋण स्वीकृत किए गए हैं।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण महिलाओं और वंचित वर्गों की औपचारिक वित्तीय प्रणाली तक पहुँच सीमित रही है। संपत्ति का कानूनी दस्तावेज़ मिलने से इन वर्गों के लिए व्यवसाय, शिक्षा और आजीविका के नए रास्ते खुले हैं।
जन-भागीदारी: 14,000 से अधिक ग्राम सभाएँ
योजना को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए राज्यभर में 14,000 से अधिक ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया है। गौरतलब है कि यह पहल 'डिजिटल और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत' के व्यापक विज़न का हिस्सा है, जिसमें प्रौद्योगिकी को शासन के साथ जोड़ा गया है।
आगे की राह
गुजरात के इस प्रदर्शन को अन्य राज्यों के लिए एक 'रोल मॉडल' के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। स्वामित्व योजना के शेष चरणों में देश के अन्य राज्यों में भी इसी गति से कार्ड वितरण की उम्मीद है, जो ग्रामीण भारत में संपत्ति अधिकारों की क्रांति को और गहरा करेगा।