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स्वामित्व योजना के 12 साल: गुजरात ने जारी किए 18.50 लाख प्रॉपर्टी कार्ड, देश में नंबर-1

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स्वामित्व योजना के 12 साल: गुजरात ने जारी किए 18.50 लाख प्रॉपर्टी कार्ड, देश में नंबर-1

सारांश

स्वामित्व योजना के दूसरे चरण में गुजरात ने 18.50 लाख प्रॉपर्टी कार्ड जारी कर देश में पहला स्थान हासिल किया — देश के कुल कार्डों में आधे से ज़्यादा अकेले गुजरात के। ड्रोन मैपिंग से भूमि विवाद खत्म, बैंक लोन तक पहुँच बनी — यह मोदी सरकार के 12 वर्षों की ग्रामीण नीति का सबसे ठोस परिणाम।

मुख्य बातें

गुजरात ने स्वामित्व योजना के तहत 18,50,614 प्रॉपर्टी कार्ड जारी कर देशभर में पहला स्थान हासिल किया।
देश के कुल 32,35,260 कार्डों में गुजरात की हिस्सेदारी 50% से अधिक रही।
गुजरात ने 14,900 गांवों में ड्रोन उड़ान और 11,511 गांवों का प्रमाणीकरण पूरा किया।
जिला स्तर पर मेहसाणा ( 1,66,504 कार्ड ) और अहमदाबाद ( 1,53,125 कार्ड ) अग्रणी।
गुजरात में प्रॉपर्टी कार्ड के आधार पर ₹50 लाख तक के बैंक ऋण स्वीकृत।
राज्यभर में 14,000 से अधिक ग्राम सभाओं का आयोजन कर योजना को जन-जन तक पहुँचाया गया।

प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना ने ग्रामीण भारत में संपत्ति अधिकारों की तस्वीर बदल दी है — और इस राष्ट्रव्यापी अभियान में गुजरात ने 18,50,614 प्रॉपर्टी कार्ड जारी कर देश में पहला स्थान हासिल किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों में यह योजना सबसे उल्लेखनीय मानी जा रही है, क्योंकि दशकों से कानूनी दस्तावेज़ों के अभाव में ग्रामीण अपनी आवासीय संपत्तियों पर वित्तीय और कानूनी अधिकारों से वंचित थे।

योजना के दूसरे चरण में गुजरात की अग्रणी भूमिका

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात 2021-22 में स्वामित्व योजना के दूसरे चरण से जुड़ा और आज राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष पर है। आंकड़ों के अनुसार, इस चरण में देशभर के 58,197 गांवों में ड्रोन उड़ानें हुईं और कुल 32,35,260 प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए गए। इनमें से अकेले गुजरात ने 14,900 गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण और 11,511 गांवों का प्रमाणीकरण पूरा कर देश के कुल कार्डों में 50 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी हासिल की है।

तकनीक और समन्वय: सफलता की नींव

इस अभियान में भारतीय सर्वेक्षण विभाग, गुजरात राजस्व विभाग और गुजरात पंचायती राज विभाग के बीच समन्वय को सफलता का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक और GIS आधारित मैपिंग के ज़रिए ग्रामीण संपत्तियों का सटीक मानचित्रण किया गया, जिससे ग्राम नियोजन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो गई है।

जिला स्तर पर मेहसाणा (1,66,504 कार्ड) और अहमदाबाद (1,53,125 कार्ड) सबसे आगे हैं। इसके अलावा खेड़ा, बनासकांठा और आणंद में भी 1 लाख से अधिक कार्ड तैयार किए गए हैं।

आम जनता पर असर: भूमि विवाद से मुक्ति, बैंक लोन तक पहुँच

पारदर्शी सत्यापन के बाद कार्ड जारी होने से पीढ़ियों से चले आ रहे भूमि विवाद और अदालती मामले लगभग समाप्त हो गए हैं। कानूनी मान्यता मिलने के बाद ग्रामीण अब अपने प्रॉपर्टी कार्ड के आधार पर बैंकों से ऋण प्राप्त कर रहे हैं। गुजरात में इस कार्ड के आधार पर ₹50 लाख तक के बैंक ऋण स्वीकृत किए गए हैं।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण महिलाओं और वंचित वर्गों की औपचारिक वित्तीय प्रणाली तक पहुँच सीमित रही है। संपत्ति का कानूनी दस्तावेज़ मिलने से इन वर्गों के लिए व्यवसाय, शिक्षा और आजीविका के नए रास्ते खुले हैं।

जन-भागीदारी: 14,000 से अधिक ग्राम सभाएँ

योजना को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए राज्यभर में 14,000 से अधिक ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया है। गौरतलब है कि यह पहल 'डिजिटल और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत' के व्यापक विज़न का हिस्सा है, जिसमें प्रौद्योगिकी को शासन के साथ जोड़ा गया है।

आगे की राह

गुजरात के इस प्रदर्शन को अन्य राज्यों के लिए एक 'रोल मॉडल' के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। स्वामित्व योजना के शेष चरणों में देश के अन्य राज्यों में भी इसी गति से कार्ड वितरण की उम्मीद है, जो ग्रामीण भारत में संपत्ति अधिकारों की क्रांति को और गहरा करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी कार्डों की संख्या नहीं, बल्कि उनका ज़मीनी उपयोग है — कितने लाभार्थियों ने वास्तव में बैंक ऋण लिया, कितने भूमि विवाद अदालत से बाहर सुलझे। ₹50 लाख तक के ऋण की मंज़ूरी उत्साहजनक है, पर यह आंकड़ा कितने परिवारों तक पहुँचा, इसका सत्यापन-योग्य डेटा अभी सार्वजनिक नहीं है। दूसरी बात, योजना के दूसरे चरण में देश के 58,197 गांवों में ड्रोन उड़ानें हुईं — यानी लाखों गाँव अभी भी बाहर हैं। गुजरात का 'रोल मॉडल' तभी सार्थक होगा जब अन्य राज्य इसे दोहराने में सक्षम हों और केंद्र इसके लिए संसाधन और समयसीमा तय करे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना क्या है?
प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक पहल है जिसके तहत ड्रोन तकनीक और GIS मैपिंग से ग्रामीण आवासीय संपत्तियों का सर्वेक्षण कर निवासियों को कानूनी 'प्रॉपर्टी कार्ड' दिए जाते हैं। इससे ग्रामीणों को संपत्ति का कानूनी स्वामित्व मिलता है, जिसका उपयोग वे बैंक ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए कर सकते हैं।
गुजरात स्वामित्व योजना में देश में नंबर-1 कैसे बना?
गुजरात ने योजना के दूसरे चरण में 14,900 गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण और 11,511 गांवों का प्रमाणीकरण पूरा कर 18,50,614 प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए, जो देश के कुल कार्डों का 50% से अधिक है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग, राजस्व विभाग और पंचायती राज विभाग के बेहतर समन्वय को इस सफलता का आधार बताया जा रहा है।
प्रॉपर्टी कार्ड से ग्रामीणों को क्या फायदा होता है?
प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद ग्रामीण अपनी संपत्ति को वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में उपयोग कर बैंकों से ऋण ले सकते हैं। गुजरात में इस कार्ड के आधार पर ₹50 लाख तक के ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिससे व्यवसाय, शिक्षा और आजीविका के नए अवसर बने हैं।
स्वामित्व योजना के दूसरे चरण में देशभर में कितने गांव और कार्ड शामिल हुए?
आंकड़ों के अनुसार, दूसरे चरण में देशभर के 58,197 गांवों में ड्रोन उड़ानें हुईं और कुल 32,35,260 प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए गए। इनमें से गुजरात अकेले 18,50,614 कार्डों के साथ सबसे आगे रहा।
गुजरात में किस जिले में सबसे अधिक प्रॉपर्टी कार्ड बने?
गुजरात में मेहसाणा जिले में सबसे अधिक 1,66,504 प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए गए, इसके बाद अहमदाबाद में 1,53,125 कार्ड बने। खेड़ा, बनासकांठा और आणंद में भी 1 लाख से अधिक कार्ड जारी किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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