स्वामित्व योजना चरण-2: गुजरात ने जारी किए देश के 50% से अधिक संपत्ति कार्ड, 11,500 गाँवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के दूसरे चरण में देशभर में सबसे आगे रहा है — राज्य ने 18,50,614 संपत्ति कार्ड जारी किए, जो राष्ट्रीय कुल 32,35,260 का 50 प्रतिशत से अधिक है। 11,511 गाँवों में ड्रोन-आधारित मानचित्रण पूरा कर गुजरात ने ग्रामीण संपत्ति अभिलेखीकरण में एक नई मिसाल कायम की है।
मुख्य उपलब्धियाँ
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, गुजरात में इस कार्यक्रम के तहत 14,900 ड्रोन उड़ानें संचालित की गईं, जिनसे 11,511 गाँवों का सर्वेक्षण, सत्यापन और पंजीकरण सम्पन्न हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे चरण में 58,197 गाँवों में ड्रोन सर्वेक्षण किए गए, जिनमें गुजरात की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत रही।
जिला-स्तर पर देखें तो मेहसाना में सर्वाधिक 1,66,504 संपत्ति कार्ड जारी हुए, इसके बाद अहमदाबाद में 1,53,125 कार्ड जारी किए गए। खेड़ा, बनासकांठा और आनंद जिलों में भी संपत्ति कार्डों की संख्या एक लाख के पार पहुँची।
योजना की पृष्ठभूमि और महत्त्व
स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की उस पहल का हिस्सा है जिसका उद्देश्य ग्रामीण आवासीय संपत्तियों के लिए औपचारिक कानूनी दस्तावेज़ तैयार करना है। अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण भारत में बड़ी संख्या में परिवारों के पास अपने घरों के लिए कोई कानूनी स्वामित्व प्रमाण नहीं था, जिससे वे बैंकिंग और ऋण सुविधाओं से वंचित रहते थे।
यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब केंद्र सरकार ग्रामीण सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत कर रही है। गौरतलब है कि स्वामित्व योजना आधुनिक ड्रोन और जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) तकनीक का उपयोग करते हुए संपत्ति के सटीक और विवाद-मुक्त अभिलेख तैयार करने पर केंद्रित है।
कार्यान्वयन में समन्वय
गुजरात में इस कार्यक्रम को सर्वे ऑफ इंडिया, गुजरात राजस्व विभाग और गुजरात पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयासों से लागू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन सर्वेक्षण और जीआईएस-आधारित मानचित्रण से न केवल संपत्ति रिकॉर्ड अधिक सटीक बने हैं, बल्कि ग्रामीण नियोजन और प्रशासन में पारदर्शिता भी बढ़ी है।
सरकार के अनुसार, कार्ड जारी करने से पहले अपनाई गई पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया से ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवादों और स्वामित्व दावों से जुड़े अदालती मामलों को कम करने में सहायता मिली है।
आम जनता पर असर
अधिकारियों के अनुसार, इस योजना ने ग्रामीण संपत्तियों को मान्यता प्राप्त आर्थिक परिसंपत्तियों में रूपांतरित किया है। कानूनी स्वामित्व दस्तावेज़ मिलने के बाद ग्रामीण निवासी अपने संपत्ति कार्ड का उपयोग करके औपचारिक बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं और बैंक ऋण अधिक सुगमता से प्राप्त कर सकते हैं।
योजना के व्यापक विस्तार के साथ, आने वाले समय में शेष गाँवों को भी इस अभिलेखीकरण प्रक्रिया में शामिल किए जाने की उम्मीद है।