21 जुलाई 2026
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लाल डोरा संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड: सीएम रेखा गुप्ता ने स्वामित्व योजना की समीक्षा की, 12,232 संपत्तियों का सर्वे पूरा

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लाल डोरा संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड: सीएम रेखा गुप्ता ने स्वामित्व योजना की समीक्षा की, 12,232 संपत्तियों का सर्वे पूरा

सारांश

दिल्ली के लाल डोरा गांवों में दशकों से चले आ रहे अप्रमाणित संपत्ति स्वामित्व की समस्या का डिजिटल समाधान आकार ले रहा है। 48 में से 30 गांवों का सर्वे पूरा, 8,423 विवाद-मुक्त संपत्तियों को क्यूआर-कोड युक्त स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड मिलने की तैयारी है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 21 जुलाई 2026 को राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक में स्वामित्व योजना की प्रगति की समीक्षा की।
48 गांवों में से 30 गांवों का सर्वेक्षण पूरा; कुल 12,232 संपत्तियों का सर्वे हो चुका है।
8,423 संपत्तियाँ विवाद-मुक्त (लगभग 69% ); इनके स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू।
दक्षिण और उत्तर-पश्चिम जिले की सर्वेक्षित सभी संपत्तियाँ विवाद-मुक्त।
प्रत्येक कार्ड पर क्यूआर कोड होगा जो डिजिटल फॉर्म-13 से जुड़ा होगा; रिकॉर्ड डोरिस से रियल टाइम में लिंक होगा।
कार्ड यूआईडीएआई मानकों के अनुरूप पीवीसी फॉर्मेट में होंगे और एक भव्य कार्यक्रम में वितरित किए जाएंगे।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 21 जुलाई 2026 को राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए घोषणा की कि राजधानी के लाल डोरा और आबादी गांवों की संपत्तियों का व्यापक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुँच गई है। स्वामित्व योजना (सर्वे ऑफ विलेज एंड मैपिंग विद इंप्रोवाज्ड टेक्नोलॉजी इन विलेज एरिया) के तहत अब तक 12,232 संपत्तियों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है और जल्द ही पात्र निवासियों को स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाएंगे।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में बताया गया कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग के साथ हुए समझौते के तहत 48 गांवों को इस योजना में शामिल किया गया है। इनमें से 30 गांवों का सर्वेक्षण पूर्ण हो चुका है और उनके अंतिम प्रॉपर्टी कार्ड तैयार कर लिए गए हैं। अब इन कार्डों में डिजिटल हस्ताक्षर जोड़ने और स्मार्ट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

सर्वेक्षित 12,232 संपत्तियों में से 8,423 संपत्तियाँ विवाद-मुक्त हैं, जो कुल सर्वेक्षित संपत्तियों का लगभग 69 प्रतिशत है। दक्षिण और उत्तर-पश्चिम जिले में सर्वे की गई सभी संपत्तियाँ विवाद-मुक्त हैं, जबकि अन्य जिलों में विवादों के समाधान के साथ आगे की प्रक्रिया जारी है।

डिजिटल सर्वे की प्रक्रिया

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि यह योजना केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है — पूरी प्रक्रिया अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली पर आधारित है। सबसे पहले लाल डोरा क्षेत्र की सीमाओं का चिन्हांकन किया जाता है, इसके बाद भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा ड्रोन के माध्यम से पूरे गांव का हवाई सर्वे किया जाता है।

राजस्व विभाग के अधिकारी जमीन पर जाकर ड्रोन सर्वे के नक्शे का वास्तविक स्थिति से मिलान करते हैं। विसंगति मिलने पर रिपोर्ट भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भेजी जाती है और आवश्यक सुधार किए जाते हैं। तत्पश्चात प्रत्येक संपत्ति को एक विशिष्ट संपत्ति पहचान संख्या (पीआईडी) प्रदान की जाती है और आधिकारिक प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किया जाता है।

गौरतलब है कि पूरे रिकॉर्ड को दिल्ली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इन्फॉर्मेशन सिस्टम (डोरिस) से रियल टाइम में जोड़ा जाएगा, ताकि भविष्य में रिकॉर्ड लगातार अद्यतन रहे।

स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड में क्या होगा

दिल्ली सरकार यूआईडीएआई मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले पीवीसी स्मार्ट प्लास्टिक स्वामित्व प्रॉपर्टी कार्ड जारी करेगी। प्रत्येक कार्ड पर संपत्ति पहचान संख्या (पीआईडी), जारी करने की तिथि, गांव, उप-मंडल, जिला, कब्जाधारी का नाम, पिता या पति का नाम, हिस्सेदारी, कुल क्षेत्रफल, निर्मित एवं खुला क्षेत्र, भू-आधार नंबर, सह-कब्जाधारियों का विवरण और संपर्क नंबर अंकित होगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक कार्ड पर क्यूआर कोड भी होगा। इसे स्कैन करते ही संपत्ति का पूरा डिजिटल फॉर्म-13 उपलब्ध होगा, जिसमें विस्तृत नक्शा, चारों दिशाओं की सीमाएं, पड़ोसी संपत्तियों के पीआईडी, खसरा नंबर, तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षर, आधिकारिक मुहर और दिल्ली आबादी देह सर्वेक्षण एवं रिकॉर्ड प्रबंधन नियम, 2025 की धारा 36 के अंतर्गत वैध कब्जा प्रमाणपत्र भी उपलब्ध रहेगा।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब लाल डोरा क्षेत्रों में संपत्ति विवाद और अप्रमाणित स्वामित्व दशकों से निवासियों के लिए बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं का लाभ और संपत्ति हस्तांतरण में बाधा बनते रहे हैं। स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद निवासी अपनी संपत्ति को आधिकारिक दस्तावेज के रूप में उपयोग कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल सर्वेक्षण करना नहीं, बल्कि राजधानी के ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। एक भव्य कार्यक्रम के माध्यम से पात्र निवासियों को स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए जाएंगे।

क्या होगा आगे

शेष 18 गांवों का सर्वेक्षण और प्रॉपर्टी कार्ड तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। अन्य जिलों में विवादित संपत्तियों के समाधान के बाद उनके कार्ड भी जारी किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि स्वामित्व योजना भविष्य में संपत्ति संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बनाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और स्वामित्व योजना सही दिशा में उठाया गया कदम है — लेकिन असली परीक्षा 69% विवाद-मुक्त संपत्तियों की नहीं, बल्कि शेष 31% विवादित मामलों के निपटारे की गति की होगी। ड्रोन सर्वे और पीआईडी प्रणाली तकनीकी रूप से सुदृढ़ है, परंतु यदि विवाद-समाधान तंत्र उतना ही तेज नहीं हुआ तो हजारों परिवार इस सुधार के दायरे से बाहर रह जाएंगे। यह भी ध्यान देने योग्य है कि केंद्र की स्वामित्व योजना देशभर में चल रही है — दिल्ली की विशिष्टता इसके घनत्व और शहरी-ग्रामीण मिश्रित स्वरूप में है, जो विवादों को और जटिल बनाती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाल डोरा संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड क्यों बनाया जा रहा है?
लाल डोरा क्षेत्रों में वर्षों से संपत्तियों का व्यवस्थित और प्रमाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, जिससे निवासियों को बैंक ऋण, संपत्ति हस्तांतरण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती थी। स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे और डिजिटल प्रणाली से प्रत्येक संपत्ति की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित की जा रही है।
स्वामित्व योजना के तहत दिल्ली में अब तक कितनी संपत्तियों का सर्वे हुआ है?
21 जुलाई 2026 तक दिल्ली के 48 गांवों में से 30 गांवों का सर्वे पूरा हो चुका है और कुल 12,232 संपत्तियों (पॉलीगॉन) का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इनमें से 8,423 संपत्तियाँ विवाद-मुक्त हैं, जो लगभग 69 प्रतिशत है।
स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड में क्या-क्या जानकारी होगी?
यूआईडीएआई मानकों के अनुरूप पीवीसी कार्ड पर संपत्ति पहचान संख्या (पीआईडी), कब्जाधारी का नाम, भू-आधार नंबर, कुल क्षेत्रफल, हिस्सेदारी और क्यूआर कोड होगा। क्यूआर कोड स्कैन करने पर डिजिटल फॉर्म-13 मिलेगा जिसमें विस्तृत नक्शा, सीमाएं और तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षर सहित वैध कब्जा प्रमाणपत्र भी उपलब्ध होगा।
दिल्ली में लाल डोरा सर्वे की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
पहले लाल डोरा क्षेत्र की सीमाओं का चिन्हांकन होता है, फिर भारतीय सर्वेक्षण विभाग ड्रोन से हवाई सर्वे करता है। राजस्व अधिकारी जमीन पर जाकर नक्शे का मिलान करते हैं और विसंगति मिलने पर सुधार किए जाते हैं। इसके बाद प्रत्येक संपत्ति को पीआईडी दी जाती है और रिकॉर्ड डोरिस प्रणाली से रियल टाइम में जोड़ा जाता है।
विवादित संपत्तियों का क्या होगा?
सर्वेक्षित 12,232 संपत्तियों में से लगभग 31 प्रतिशत संपत्तियाँ अभी विवाद-मुक्त नहीं हैं। अन्य जिलों में विवादों के समाधान के साथ-साथ आगे की प्रक्रिया जारी है और समाधान होने के बाद उन्हें भी स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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