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माधुरी दीक्षित: 'मां बहन' में पितृसत्ता को चुनौती, बोलीं — हँसाते हुए समाज का सच दिखाना ज़्यादा असरदार

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माधुरी दीक्षित: 'मां बहन' में पितृसत्ता को चुनौती, बोलीं — हँसाते हुए समाज का सच दिखाना ज़्यादा असरदार

सारांश

माधुरी दीक्षित की 'मां बहन' सिर्फ एक मनोरंजक फिल्म नहीं — यह पितृसत्तात्मक दोहरे मापदंडों पर सीधा प्रहार है। माधुरी का मानना है कि हँसाते हुए समाज का सच दिखाना उपदेश से ज़्यादा असरदार होता है। नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही इस फिल्म में महिलाएँ पारंपरिक नियमों को तोड़ती नज़र आती हैं।

मुख्य बातें

माधुरी दीक्षित की फिल्म 'मां बहन' नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है, जिसका निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है।
माधुरी ने कहा — मनोरंजन के साथ दिया गया सामाजिक संदेश दर्शकों के दिल तक सीधे पहुँचता है।
अभिनेत्री ने पितृसत्तात्मक समाज के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाया — पुरुष को 'रोमियो', महिला को 'बुरा' कहने की परंपरा पर।
फिल्म में तृप्ति डिमरी , रवि किशन , गीतांजलि कुलकर्णी , अरुणोदय सिंह और शार्दुल भारद्वाज भी अहम भूमिकाओं में हैं।
माधुरी का संदेश — "हर महिला सम्मान और गरिमा के साथ जीने की हकदार है।"

बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री माधुरी दीक्षित की नई फिल्म 'मां बहन' इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। 10 जून को मुंबई में अपनी इस फिल्म को लेकर बात करते हुए माधुरी ने मनोरंजन और सामाजिक संदेश के गहरे रिश्ते पर खुलकर अपने विचार रखे। उनका स्पष्ट मत है कि हँसते-हँसाते समाज की सच्चाई दिखाना किसी भी उपदेश से कहीं अधिक प्रभावशाली होता है।

मनोरंजन और सामाजिक संदेश का रिश्ता

माधुरी ने कहा, "जब लोग किसी फिल्म या शो को देखने बैठते हैं, तो उनका मकसद कुछ समय के लिए तनाव से दूर होकर अच्छा समय बिताना होता है। ऐसे में अगर कहानी के ज़रिए समाज की सच्चाई भी दिखाई जाए, तो उसका असर कहीं ज़्यादा होता है। लोग हँसते हुए भी यह समझ सकते हैं कि हमारे आसपास क्या हो रहा है और समाज में कौन-सी बातें सही हैं या गलत। मनोरंजन के साथ दिया गया संदेश लोगों के दिल और दिमाग तक आसानी से पहुँचता है।"

अभिनेत्री ने यह भी जोड़ा कि बार-बार उपदेश देने से लोग दूरी बना लेते हैं। उनके अनुसार, जब कोई बात मज़ेदार और दिलचस्प तरीके से परदे पर उतारी जाती है, तो दर्शक उसे ध्यान से देखते हैं और उस पर विचार भी करते हैं।

पितृसत्तात्मक सोच पर सीधा सवाल

माधुरी ने समाज में महिलाओं और पुरुषों के प्रति दोहरे मापदंडों पर बेबाकी से बात की। उन्होंने कहा, "यह एक पितृसत्तात्मक समाज है जो प्यार और रिश्तों के मामलों में आज भी दोहरे मापदंड अपनाता हुआ आया है। अगर कोई पुरुष गर्लफ्रेंड बनाता है तो उसे रोमियो कहा जाता है, लेकिन अगर कोई महिला वैसा ही करती है तो उसे बुरा-भला कहा जाता है और नकारात्मक नज़रिए से देखा जाता है।"

यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी सिनेमा में महिला-केंद्रित कहानियों की माँग लगातार बढ़ रही है और 'स्त्री 2' जैसी फिल्मों की सफलता ने साबित किया है कि दर्शक ऐसे किरदारों को सराहते हैं।

'मां बहन' की कहानी और संदेश

माधुरी ने बताया, "मेरी फिल्म 'मां बहन' इन्हीं पुरानी परंपराओं और नियमों को चुनौती देती है। फिल्म में महिलाओं को मज़बूत और पारंपरिक नियमों को तोड़ने वाला किरदार दिया गया है। हर महिला सम्मान और गरिमा के साथ जीने की हकदार है।"

फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है, जो इससे पहले 'तुम्हारी सुलु' जैसी सामाजिक रूप से प्रासंगिक फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। गौरतलब है कि त्रिवेणी की फिल्मों में महिला पात्रों की स्वायत्तता केंद्र में रहती है, और 'मां बहन' उसी परंपरा को आगे बढ़ाती दिखती है।

स्टारकास्ट और स्ट्रीमिंग

फिल्म में माधुरी दीक्षित के साथ तृप्ति डिमरी, धारणा दुर्गा, रवि किशन, गीतांजलि कुलकर्णी, अरुणोदय सिंह और शार्दुल भारद्वाज अहम भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है, जिससे इसकी पहुँच देश-विदेश के हिंदी दर्शकों तक सुनिश्चित होती है।

माधुरी दीक्षित की यह फिल्म न केवल मनोरंजन का वादा करती है, बल्कि समाज में बदलाव की एक ज़रूरी बातचीत को भी परदे पर जीवंत करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नेटफ्लिक्स के लिए बनी फिल्मों में 'नारीवाद' को अक्सर सतही रखा जाता है। माधुरी की पितृसत्ता पर टिप्पणी तीखी है, पर मुख्यधारा की कवरेज इसे महज़ प्रचार का हिस्सा मान कर छोड़ देती है — जबकि यह एक बड़े सांस्कृतिक विमर्श की शुरुआत हो सकती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माधुरी दीक्षित की फिल्म 'मां बहन' किस बारे में है?
'मां बहन' एक ऐसी फिल्म है जो पितृसत्तात्मक परंपराओं और सामाजिक दोहरे मापदंडों को चुनौती देती है, जिसमें महिला किरदारों को मज़बूत और नियम-तोड़ने वाले रूप में दिखाया गया है। फिल्म नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है।
'मां बहन' का निर्देशन किसने किया है और इसमें कौन-कौन हैं?
फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है। इसमें माधुरी दीक्षित के साथ तृप्ति डिमरी, धारणा दुर्गा, रवि किशन, गीतांजलि कुलकर्णी, अरुणोदय सिंह और शार्दुल भारद्वाज अहम भूमिकाओं में हैं।
माधुरी दीक्षित ने पितृसत्ता पर क्या कहा?
माधुरी ने कहा कि समाज आज भी प्यार और रिश्तों में दोहरे मापदंड अपनाता है — पुरुष को 'रोमियो' कहा जाता है जबकि वही काम करने पर महिला को नकारात्मक नज़रिए से देखा जाता है। उन्होंने इसे पितृसत्तात्मक सोच का उदाहरण बताया।
माधुरी दीक्षित के अनुसार मनोरंजन और सामाजिक संदेश में क्या संबंध है?
माधुरी का मानना है कि मनोरंजन के साथ दिया गया संदेश उपदेश की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली होता है। उनके अनुसार, जब दर्शक हँसते हुए कोई बात देखते हैं, तो वह उनके दिल और दिमाग तक सीधे पहुँचती है।
'मां बहन' कहाँ देख सकते हैं?
'मां बहन' नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है, जिससे भारत और विदेश में हिंदी दर्शक इसे देख सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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