हेमा मालिनी का ओम बिरला को पत्र: पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक माहौल पर सवाल उठाए
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक फासीवाद
- कलाकारों के संघर्ष
- सुरक्षा का मुद्दा
- राजनीति से संस्कृति को दूर रखने की अपील
- आजीविका पर असर
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल की स्थिति के प्रति गहरी चिंता व्यक्त की है। इस पत्र में उन्होंने विशेष रूप से वहां के सांस्कृतिक माहौल और कलाकारों के साथ हो रहे व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में आज कलाकारों को अपने कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
हेमा मालिनी ने पत्र में उल्लेख किया कि वह यह बात केवल एक सांसद के रूप में नहीं, बल्कि एक कलाकार के तौर पर भी कह रही हैं, जिन्होंने अपना जीवन भारतीय संस्कृति, विशेषकर शास्त्रीय नृत्य को समर्पित किया है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्हें कला के प्रति रुचि थी और उन्हें देश भर में अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिला है। उनके लिए संस्कृति सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक पवित्र जिम्मेदारी है, जो लोगों को एक साथ लाने का कार्य करती है।
उन्होंने कहा कि यह देखना अत्यंत दुखद है कि पश्चिम बंगाल में एक प्रकार का सांस्कृतिक फासीवाद पनप रहा है। यह स्थिति इसलिए और अधिक चौंकाने वाली है क्योंकि पश्चिम बंगाल, विशेषकर कोलकाता, हमेशा कला, साहित्य और संस्कृति का केंद्र रहा है। यहां के निवासी हमेशा कला की प्रशंसा करने वाले माने जाते रहे हैं, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस छवि को धक्का पहुंचाया है।
हेमा मालिनी ने अपने हाल के अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि 15 मार्च को कोलकाता के प्रसिद्ध धोनो धान्यों ऑडिटोरियम में उनका द्रौपदी नृत्य-नाटिका कार्यक्रम होना था, लेकिन अंतिम समय में इसे रद्द कर दिया गया। इसके पीछे जो कारण दिए गए, वे बार-बार बदलते रहे—कभी लॉजिस्टिक समस्या तो कभी चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला।
इसी प्रकार, साइंस सिटी हॉल में कार्यक्रम की अनुमति भी नहीं दी गई। कहा गया कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के कारण यह संभव नहीं है, जबकि वास्तविकता में वहां प्रधानमंत्री का कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं था। हेमा मालिनी ने स्पष्ट कहा कि उन्हें इस तरह के आयोजनों का अनुभव है और आमतौर पर ऐसे कारणों से अन्य कार्यक्रमों में बाधा नहीं आती।
उन्होंने यह भी कहा कि ये घटनाएं एक-दो बार की नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से एक पैटर्न बन गई हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को या तो अंतिम समय पर अनुमति मिलती है या फिर मना कर दिया जाता है, जिससे कलाकारों और आयोजकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इससे न केवल कार्यक्रम प्रभावित होते हैं, बल्कि कई कलाकारों की आजीविका पर भी असर पड़ता है।
उन्होंने सुरक्षा के मुद्दे पर भी बात की। उनका कहना है कि पिछले 8-9 वर्षों में पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन करना कलाकारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती। इस तरह का माहौल कला के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है।
हेमा मालिनी ने यह भी कहा कि उन्होंने पूरे देश में प्रदर्शन किए हैं और उनके कार्यक्रम हमेशा गैर-राजनीतिक रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल संस्कृति को बढ़ावा देना और लोगों को एकजुट करना होता है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यक्रमों में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल होते हैं और उन्होंने हमेशा कलाकारों को प्रोत्साहित किया है।
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अपील की कि सांस्कृतिक मंचों को राजनीति से दूर रखा जाए। चुनावी प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है, लेकिन जब बात देश की सांस्कृतिक विरासत की हो तो सभी को मिलकर कार्य करना चाहिए।