मनी लॉन्ड्रिंग मामले में AAP मंत्री संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से खारिज
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी ने खुली अदालत में यह आदेश सुनाया, जिससे अरोड़ा की रिहाई की उम्मीदों को एक बड़ा झटका लगा है।
मामले का पृष्ठभूमि
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अरोड़ा को 9 मई 2026 को कथित वित्तीय अनियमितताओं और जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था, और तब से वह हिरासत में हैं। गुरुग्राम की विशेष अदालत ने 15 जून को उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज की थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
यह मामला हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) से जुड़ा है, जिसके प्रमुख अरोड़ा पहले रह चुके हैं। ED की जांच ₹102.5 करोड़ के मोबाइल फोन निर्यात से जुड़े लेनदेन और कथित जीएसटी धोखाधड़ी पर केंद्रित है।
बचाव पक्ष की दलीलें
अरोड़ा की ओर से जमानत याचिका में तर्क दिया गया था कि वह कैबिनेट मंत्री का पद संभालने के बाद HSRL के रोजमर्रा के कामकाज से अलग हो गए थे। पूर्व राज्यसभा सांसद अरोड़ा ने अपनी याचिका में कहा कि उनकी समाज में गहरी जड़ें हैं और उनका सार्वजनिक जीवन बेदाग रहा है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मोबाइल फोन निर्यात से जुड़े लेनदेन वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों का हिस्सा थे, जिन्हें चालान, जीएसटी रिकॉर्ड, सीमा शुल्क दस्तावेज और बैंकिंग रिकॉर्ड से प्रमाणित किया जा सकता है। उनके आवास, उनके बेटे के आवास और कंपनी परिसरों में हुई तलाशी में भी कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, यह दलील भी अदालत के सामने रखी गई।
ED का पक्ष
प्रवर्तन निदेशालय की जांच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के खरीदारों को मोबाइल फोन के कथित निर्यात में अनियमितताओं और जीएसटी रिफंड के कथित फर्जी दावों पर केंद्रित है। एजेंसी के अनुसार, ये लेनदेन वास्तविक व्यापार की आड़ में मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा थे।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ED ने देशभर में राजनेताओं और व्यवसायियों से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में कार्रवाई तेज की है।
आगे की राह
हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद अरोड़ा के पास सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने का विकल्प बचा है। उनका मंत्री पद फिलहाल बरकरार है, लेकिन लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बीच पंजाब सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।