16 अक्टूबर 2026
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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में AAP मंत्री संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से खारिज

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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में AAP मंत्री संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से खारिज

सारांश

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने AAP कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। ₹102.5 करोड़ के कथित मोबाइल फोन निर्यात घोटाले और जीएसटी धोखाधड़ी में 9 मई से हिरासत में बंद अरोड़ा के पास अब सर्वोच्च न्यायालय ही एकमात्र रास्ता बचा है।

मुख्य बातें

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी ने 16 अक्टूबर 2026 को AAP मंत्री संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज की।
ED ने अरोड़ा को 9 मई 2026 को कथित वित्तीय अनियमितताओं और जीएसटी धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया था।
मामला हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) और ₹102.5 करोड़ के कथित मोबाइल फोन निर्यात लेनदेन से जुड़ा है।
गुरुग्राम की विशेष अदालत ने 15 जून को जमानत खारिज की थी, जिसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
ED की जांच UAE के खरीदारों को कथित निर्यात और फर्जी जीएसटी रिफंड दावों पर केंद्रित है।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी ने खुली अदालत में यह आदेश सुनाया, जिससे अरोड़ा की रिहाई की उम्मीदों को एक बड़ा झटका लगा है।

मामले का पृष्ठभूमि

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अरोड़ा को 9 मई 2026 को कथित वित्तीय अनियमितताओं और जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था, और तब से वह हिरासत में हैं। गुरुग्राम की विशेष अदालत ने 15 जून को उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज की थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

यह मामला हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) से जुड़ा है, जिसके प्रमुख अरोड़ा पहले रह चुके हैं। ED की जांच ₹102.5 करोड़ के मोबाइल फोन निर्यात से जुड़े लेनदेन और कथित जीएसटी धोखाधड़ी पर केंद्रित है।

बचाव पक्ष की दलीलें

अरोड़ा की ओर से जमानत याचिका में तर्क दिया गया था कि वह कैबिनेट मंत्री का पद संभालने के बाद HSRL के रोजमर्रा के कामकाज से अलग हो गए थे। पूर्व राज्यसभा सांसद अरोड़ा ने अपनी याचिका में कहा कि उनकी समाज में गहरी जड़ें हैं और उनका सार्वजनिक जीवन बेदाग रहा है।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मोबाइल फोन निर्यात से जुड़े लेनदेन वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों का हिस्सा थे, जिन्हें चालान, जीएसटी रिकॉर्ड, सीमा शुल्क दस्तावेज और बैंकिंग रिकॉर्ड से प्रमाणित किया जा सकता है। उनके आवास, उनके बेटे के आवास और कंपनी परिसरों में हुई तलाशी में भी कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, यह दलील भी अदालत के सामने रखी गई।

ED का पक्ष

प्रवर्तन निदेशालय की जांच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के खरीदारों को मोबाइल फोन के कथित निर्यात में अनियमितताओं और जीएसटी रिफंड के कथित फर्जी दावों पर केंद्रित है। एजेंसी के अनुसार, ये लेनदेन वास्तविक व्यापार की आड़ में मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा थे।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ED ने देशभर में राजनेताओं और व्यवसायियों से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में कार्रवाई तेज की है।

आगे की राह

हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद अरोड़ा के पास सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने का विकल्प बचा है। उनका मंत्री पद फिलहाल बरकरार है, लेकिन लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बीच पंजाब सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती है। सवाल यह भी है कि मंत्रीपद पर बने रहते हुए माह दर माह हिरासत में रहना शासन की विश्वसनीयता को किस हद तक कमज़ोर करता है। दिल्ली में इसी तरह के ईडी मामलों के अनुभव को देखते हुए, AAP के लिए यह परीक्षा और कठिन होती जा रही है कि वह भ्रष्टाचार-विरोधी छवि को कैसे बनाए रखे।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका क्यों खारिज हुई?
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी ने 16 अक्टूबर 2026 को अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने ED के उन आरोपों को गंभीरता से लिया जो ₹102.5 करोड़ के कथित मोबाइल फोन निर्यात लेनदेन और फर्जी जीएसटी रिफंड दावों से संबंधित हैं।
संजीव अरोड़ा को ED ने कब और किस मामले में गिरफ्तार किया था?
प्रवर्तन निदेशालय ने संजीव अरोड़ा को 9 मई 2026 को गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और जीएसटी धोखाधड़ी के मामले में हुई थी।
हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड मामला क्या है?
हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (HSRL) वह कंपनी है जिसके संजीव अरोड़ा पूर्व में प्रमुख रह चुके हैं। ED की जांच UAE के खरीदारों को मोबाइल फोन के कथित निर्यात में ₹102.5 करोड़ की अनियमितताओं और फर्जी जीएसटी रिफंड दावों पर केंद्रित है।
अब संजीव अरोड़ा के पास क्या कानूनी विकल्प हैं?
हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद अरोड़ा सर्वोच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। इससे पहले गुरुग्राम की विशेष अदालत भी 15 जून को उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी थी।
क्या संजीव अरोड़ा अभी भी पंजाब सरकार में मंत्री हैं?
हाँ, संजीव अरोड़ा अभी भी पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वह पूर्व राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। उन्होंने याचिका में कहा था कि कैबिनेट मंत्री बनने के बाद उन्होंने HSRL के रोजमर्रा के कामकाज में भाग लेना बंद कर दिया था।
राष्ट्र प्रेस
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