29 सितंबर 2026
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चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप मनी लॉन्ड्रिंग: सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश अरोड़ा की जमानत रद्द की, रोहित विज की याचिका खारिज

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चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप मनी लॉन्ड्रिंग: सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश अरोड़ा की जमानत रद्द की, रोहित विज की याचिका खारिज

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने चीनी फर्जी इन्वेस्टमेंट ऐप नेटवर्क से जुड़े PMLA मामले में सख्त रुख अपनाते हुए भूपेश अरोड़ा की जमानत रद्द की और रोहित विज की याचिका खारिज की। हवाला और विदेशी मुद्रा के ज़रिए पैसा बाहर भेजने के इस मामले में चीनी-ताइवानी नागरिकों की कथित भूमिका भी जांच के दायरे में है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को आरोपी भूपेश अरोड़ा की जमानत रद्द की और रोहित विज की जमानत याचिका खारिज की।
मामला PMLA के तहत दर्ज है; जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी.
वराले की पीठ ने सुनवाई की।
पीठ ने माना कि मूल अपराध में समझौते से जुड़ी आपराधिक गतिविधि समाप्त नहीं होती।
लोक्सम सहित कई फर्जी चीनी ऐप्स ने कथित तौर पर निवेशकों को अधिक रिटर्न का लालच देकर फंसाया और धन हवाला के ज़रिए विदेश भेजा।
रोहित विज पर रंजन मनीकॉर्प और केडीएस फॉरेक्स के ज़रिए धन को नकदी व विदेशी मुद्रा में बदलने का आरोप है।
जांच में चीनी और ताइवानी नागरिकों की कथित संलिप्तता भी सामने आई है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो बड़े फैसले सुनाए — आरोपी भूपेश अरोड़ा को पहले मिली जमानत रद्द कर दी गई, जबकि दूसरे आरोपी रोहित विज की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के अंतर्गत प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने अपने अवलोकन में स्पष्ट किया कि भले ही मूल अपराध में समझौता हो जाए, इससे उससे जुड़ी आपराधिक गतिविधि समाप्त नहीं होती। इसी विधिक आधार पर अदालत ने ED की अर्जी स्वीकार करते हुए अरोड़ा की जमानत निरस्त की।

ED की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक और वकील अर्कज कुमार ने पक्ष रखा। भूपेश अरोड़ा का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने किया, जबकि रोहित विज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल पेश हुए।

धोखाधड़ी का तरीका

ED की जांच के अनुसार, लोक्सम सहित कई फर्जी चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप्स के एक संगठित नेटवर्क की जांच की जा रही है। आरोप है कि ये ऐप्स निवेशकों को अधिक रिटर्न का लालच देकर फंसाते थे। इन ऐप्स से जमा की गई राशि को कई बैंक खातों और कंपनियों के माध्यम से घुमाया जाता था, फिर उसे नकदी और विदेशी मुद्रा में बदलकर हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजा जाता था।

रोहित विज की कथित भूमिका

जांच में आरोप है कि रोहित विज ने अपराध से प्राप्त धन को ठिकाने लगाने में अहम भूमिका निभाई। वह रंजन मनीकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड और केडीएस फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों से जुड़ा था। कथित तौर पर इन कंपनियों के ज़रिए बैंक हस्तांतरण को नकदी और विदेशी मुद्रा में तब्दील कर हवाला नेटवर्क के माध्यम से बाहर भेजा गया।

अंतरराष्ट्रीय कड़ी

जांच में कथित तौर पर चीनी और ताइवानी नागरिकों के साथ संबंधों का भी उल्लेख है। आरोप है कि इन विदेशी नागरिकों ने ऐसी कंपनियाँ और बैंक खाते खुलवाने में मदद की, जिनका उपयोग इन फर्जी ऐप्स से प्राप्त धन को रूट करने के लिए किया गया। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में फर्जी चीनी ऐप-आधारित वित्तीय धोखाधड़ी के कई मामले देश के अलग-अलग हिस्सों में सामने आ चुके हैं।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद भूपेश अरोड़ा को हिरासत में लिया जाएगा, जबकि रोहित विज की जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनकी न्यायिक हिरासत जारी रहेगी। अदालत का यह निर्णय PMLA मामलों में जमानत के मानदंडों को लेकर एक महत्वपूर्ण स्थापना माना जा रहा है। ED की जांच आगे भी जारी रहने की उम्मीद है, और मामले में अन्य संबंधित पक्षों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्थापना भविष्य के मनी लॉन्ड्रिंग मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है। फर्जी चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप्स का यह नेटवर्क केवल एक वित्तीय अपराध नहीं, बल्कि एक व्यापक साइबर-वित्तीय धोखाधड़ी की पारिस्थितिकी का हिस्सा है जो पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से उभरी है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर अदालती आदेश तक सिमट जाती है, लेकिन असली सवाल यह है कि हवाला नेटवर्क और विदेशी नागरिकों की कथित भूमिका की जांच कहाँ तक पहुँची है। जब तक मूल संचालकों तक ED की पहुँच नहीं होती, तब तक यह सफलता आधी-अधूरी ही मानी जाएगी।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप मनी लॉन्ड्रिंग मामला क्या है?
यह मामला लोक्सम सहित कई फर्जी चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप्स के एक नेटवर्क से जुड़ा है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने निवेशकों को अधिक रिटर्न का लालच देकर धन एकत्र किया और उसे हवाला चैनलों के ज़रिए विदेश भेजा। ED ने इस मामले को PMLA के तहत दर्ज किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश अरोड़ा की जमानत क्यों रद्द की?
सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि मूल अपराध में समझौता हो जाने के बावजूद उससे जुड़ी आपराधिक गतिविधि समाप्त नहीं होती। इसी विधिक आधार पर अदालत ने ED की अर्जी स्वीकार करते हुए भूपेश अरोड़ा को पहले दी गई जमानत निरस्त की।
रोहित विज पर क्या आरोप हैं?
जांच में आरोप है कि रोहित विज ने रंजन मनीकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड और केडीएस फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिए अपराध से अर्जित धन को नकदी और विदेशी मुद्रा में बदलकर हवाला नेटवर्क के माध्यम से बाहर भेजने में अहम भूमिका निभाई। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।
इस मामले में चीनी और ताइवानी नागरिकों की क्या भूमिका बताई जा रही है?
जांच में कथित तौर पर चीनी और ताइवानी नागरिकों की संलिप्तता सामने आई है। आरोप है कि इन्होंने फर्जी कंपनियाँ और बैंक खाते खुलवाने में मदद की, जिनका उपयोग ऐप्स से प्राप्त धन को रूट करने के लिए किया गया।
इस फैसले का PMLA मामलों पर क्या असर होगा?
सर्वोच्च न्यायालय की यह स्थापना — कि मूल अपराध में समझौते से मनी लॉन्ड्रिंग का दायित्व समाप्त नहीं होता — भविष्य के PMLA मामलों में जमानत के मानदंडों को और सख्त बना सकती है। यह फैसला ED को इसी तर्ज पर अन्य मामलों में भी राहत माँगने का आधार प्रदान कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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