चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप मनी लॉन्ड्रिंग: सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश अरोड़ा की जमानत रद्द की, रोहित विज की याचिका खारिज
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो बड़े फैसले सुनाए — आरोपी भूपेश अरोड़ा को पहले मिली जमानत रद्द कर दी गई, जबकि दूसरे आरोपी रोहित विज की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के अंतर्गत प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने अपने अवलोकन में स्पष्ट किया कि भले ही मूल अपराध में समझौता हो जाए, इससे उससे जुड़ी आपराधिक गतिविधि समाप्त नहीं होती। इसी विधिक आधार पर अदालत ने ED की अर्जी स्वीकार करते हुए अरोड़ा की जमानत निरस्त की।
ED की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक और वकील अर्कज कुमार ने पक्ष रखा। भूपेश अरोड़ा का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने किया, जबकि रोहित विज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल पेश हुए।
धोखाधड़ी का तरीका
ED की जांच के अनुसार, लोक्सम सहित कई फर्जी चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप्स के एक संगठित नेटवर्क की जांच की जा रही है। आरोप है कि ये ऐप्स निवेशकों को अधिक रिटर्न का लालच देकर फंसाते थे। इन ऐप्स से जमा की गई राशि को कई बैंक खातों और कंपनियों के माध्यम से घुमाया जाता था, फिर उसे नकदी और विदेशी मुद्रा में बदलकर हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजा जाता था।
रोहित विज की कथित भूमिका
जांच में आरोप है कि रोहित विज ने अपराध से प्राप्त धन को ठिकाने लगाने में अहम भूमिका निभाई। वह रंजन मनीकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड और केडीएस फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों से जुड़ा था। कथित तौर पर इन कंपनियों के ज़रिए बैंक हस्तांतरण को नकदी और विदेशी मुद्रा में तब्दील कर हवाला नेटवर्क के माध्यम से बाहर भेजा गया।
अंतरराष्ट्रीय कड़ी
जांच में कथित तौर पर चीनी और ताइवानी नागरिकों के साथ संबंधों का भी उल्लेख है। आरोप है कि इन विदेशी नागरिकों ने ऐसी कंपनियाँ और बैंक खाते खुलवाने में मदद की, जिनका उपयोग इन फर्जी ऐप्स से प्राप्त धन को रूट करने के लिए किया गया। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में फर्जी चीनी ऐप-आधारित वित्तीय धोखाधड़ी के कई मामले देश के अलग-अलग हिस्सों में सामने आ चुके हैं।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद भूपेश अरोड़ा को हिरासत में लिया जाएगा, जबकि रोहित विज की जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनकी न्यायिक हिरासत जारी रहेगी। अदालत का यह निर्णय PMLA मामलों में जमानत के मानदंडों को लेकर एक महत्वपूर्ण स्थापना माना जा रहा है। ED की जांच आगे भी जारी रहने की उम्मीद है, और मामले में अन्य संबंधित पक्षों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।