हिमाचल विधानसभा: स्पीकर पठानिया ने बिजली संकट, SC रिकॉर्ड गड़बड़ी और चिट्टा तस्करी पर विभागों से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सोमवार, 31 अगस्त को 'शून्य काल' के दौरान उठाए गए जनहित के मुद्दों पर संबंधित विभागों से तत्काल जवाब तलब किया। बिजली आपूर्ति की बदहाली, राजस्व रिकॉर्ड में तकनीकी गड़बड़ियाँ और ऊपरी बल्ह क्षेत्र में सिंथेटिक ड्रग 'चिट्टा' के बढ़ते प्रसार — तीनों मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने सदन का ध्यान खींचा और स्पीकर ने शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बिजली संकट: पीने का पानी और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
बिलासपुर से विधायक त्रिलोक जमवाल ने अपने क्षेत्र में कम वोल्टेज और बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कटौती का मुद्दा सदन में उठाया। उनके अनुसार, अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण पेयजल योजनाएँ बाधित हो रही हैं और बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई व कोचिंग पर गंभीर असर पड़ रहा है। कई इलाकों में पूरे दिन बिजली नहीं रहती।
जमवाल ने सरकार से माँग की कि विश्व बैंक से वित्त पोषित परियोजनाओं सहित सभी बिजली परियोजनाओं के टेंडर समय पर पूरे किए जाएँ, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
SC रिकॉर्ड में स्पेलिंग की गलती से 'फलेडा' समुदाय परेशान
बरसर से विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने अनुसूचित जाति के 'फलेडा' समुदाय की गंभीर समस्या सदन के सामने रखी। उन्होंने बताया कि पुराने राजस्व अभिलेखों में इस समुदाय का नाम 'फलेडा' सही दर्ज था, परंतु कम्प्यूटरीकरण के दौरान वर्तनी की त्रुटि के कारण इसे 'पापेडा' के रूप में दर्ज कर दिया गया।
इस तकनीकी चूक के चलते समुदाय के सदस्यों को नए अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र बनवाने और पुराने प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कराने में भारी कठिनाइयाँ झेलनी पड़ रही हैं। लखनपाल ने माँग की कि कम्प्यूटर रिकॉर्ड को पुराने राजस्व अभिलेखों के आधार पर तत्काल सुधारा जाए।
ऊपरी बल्ह में 'चिट्टा' का कहर, पुलिस स्टेशन की माँग
बल्ह से विधायक इंद्र सिंह गांधी ने ऊपरी बल्ह क्षेत्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सिंथेटिक ड्रग 'चिट्टा' के बढ़ते इस्तेमाल पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने अपराध पर लगाम लगाने के लिए क्षेत्र में एक नया पुलिस स्टेशन खोलने की तत्काल माँग की।
गांधी ने सदन को याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार ने इस इलाके के लिए पुलिस स्टेशन को मंजूरी दी थी, जिसे वर्तमान सरकार ने रद्द कर दिया। उनका तर्क था कि बिगड़ते हालात को देखते हुए यह फैसला पुनः विचार की माँग करता है।
स्पीकर की प्रतिक्रिया और आगे की राह
स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने तीनों मुद्दों की गंभीरता को स्वीकार करते हुए संबंधित विभागों को शीघ्र जवाब देने के निर्देश दिए। यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार विपक्ष के बढ़ते दबाव का सामना कर रही है। गौरतलब है कि शून्य काल में उठाए गए मुद्दे अक्सर जमीनी स्तर पर प्रशासनिक विफलताओं का आईना होते हैं — और इन तीन मुद्दों का एक साथ उठना संकेत देता है कि सुशासन की चुनौतियाँ कई मोर्चों पर एक साथ हैं।