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ब्रिक्स में मोदी की भूमिका सराहनीय: CM हिमंत बिस्वा सरमा ने X पर की तारीफ

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ब्रिक्स में मोदी की भूमिका सराहनीय: CM हिमंत बिस्वा सरमा ने X पर की तारीफ

सारांश

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर PM मोदी की भू-राजनीतिक जटिलताओं के बीच आम सहमति बनाने की क्षमता को सराहा। उन्होंने कहा कि वैश्विक मीडिया में मिली पहचान इस बात का प्रमाण है कि सही नेतृत्व से कठिन परिस्थितियों में भी समाधान निकाला जा सकता है।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 13 सितंबर 2026 को एक्स पर PM नरेंद्र मोदी की ब्रिक्स में आम सहमति बनाने की भूमिका की तारीफ की।
सरमा ने कहा कि वैश्विक मीडिया ने मोदी की भूमिका को बड़े पैमाने पर स्वीकृति दी।
शिखर सम्मेलन से पहले आलोचकों को आशंका थी कि सदस्य देशों के मतभेद किसी ठोस नतीजे को रोकेंगे।
भारत में संपन्न ब्रिक्स समिट में भू-राजनीतिक तनाव , आर्थिक प्रशासन और बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई।
सरमा ने कहा — सही नेतृत्व से मुश्किल हालात में भी आम सहमति संभव है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 13 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आम सहमति बनाने की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि समिट के नतीजों ने साबित किया है कि मुश्किल भू-राजनीतिक चुनौतियों से भी मजबूत नेतृत्व, संवाद और सहयोग के जरिये निपटा जा सकता है।

सरमा की एक्स पोस्ट में क्या कहा

मुख्यमंत्री सरमा ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'रविवार सुबह, जब मैंने दुनिया भर के बड़े अखबारों की हेडलाइन देखीं तो ब्रिक्स देशों के बीच आम सहमति बनाने में प्रधानमंत्री मोदी की शानदार भूमिका को मिली बड़े पैमाने पर पहचान देखकर बहुत अच्छा लगा।' उन्होंने यह भी कहा कि वे इस वैश्विक स्वीकृति से उत्साहित हैं।

सरमा ने जोर दिया कि शिखर सम्मेलन से पहले आलोचकों को आशंका थी कि सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेद किसी ठोस नतीजे तक पहुँचने में बाधा बनेंगे। उनके शब्दों में, 'आज के मुश्किल भू-राजनीतिक माहौल में बुरे सपने देखने वाले पूरी ताकत से सामने आए थे, उन्हें यकीन था कि समिट सिर्फ खोखले बयानों में बदल जाएगा।'

समिट के नतीजे और भारत की कूटनीतिक भूमिका

भारत में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बड़े समूह के नेताओं ने वैश्विक आर्थिक प्रशासन, बहुपक्षीय सहयोग और भू-राजनीतिक तनावों सहित कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में ब्रिक्स काफी विस्तृत हुआ है और अब उसमें अलग-अलग राजनीतिक, आर्थिक तथा रणनीतिक हितों वाले देश शामिल हैं।

सरमा ने कहा कि 'सही लीडरशिप के साथ, सबसे मुश्किल हालात में भी आम सहमति और समाधान निकाले जा सकते हैं।' उन्होंने समिट के नतीजे को भारत की कूटनीतिक क्षमता की एक ठोस मिसाल के रूप में पेश किया।

ब्रिक्स के भीतर मतभेदों की चुनौती

विश्लेषकों के अनुसार, सहयोग बनाए रखते हुए सदस्य देशों के परस्पर विरोधी हितों को संतुलित करना ब्रिक्स की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौतियों में से एक रही है। यह ऐसे समय में और भी जटिल हो जाती है जब पश्चिमी देशों तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच वैश्विक तनाव चरम पर हों।

मुख्यमंत्री सरमा ने इसी संदर्भ में कहा कि ब्रिक्स के अनुभव से पता चलता है कि रचनात्मक जुड़ाव और प्रभावी नेतृत्व के जरिये देश कठिन परिस्थितियों में भी साझा जमीन खोज सकते हैं।

भारत की वैश्विक भूमिका का संदर्भ

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आर्थिक प्रशासन और बदलते अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर चर्चाओं को आकार देने में अपनी भूमिका को निरंतर सुदृढ़ करना चाह रहा है। सरमा की टिप्पणियाँ इस बात को रेखांकित करती हैं कि भारत सरकार ब्रिक्स मंच को केवल एक बहुपक्षीय मंच के रूप में नहीं, बल्कि भारत के कूटनीतिक प्रभाव को प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में भी देखती है।

आगे देखें तो ब्रिक्स के विस्तार और नए सदस्यों के समावेश के साथ भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मध्यस्थ की भूमिका स्थापित करना चाहता है। असली सवाल यह है कि ब्रिक्स के भीतर बनी 'आम सहमति' कितनी ठोस है — क्या यह दीर्घकालिक सहयोग की नींव है या केवल कूटनीतिक शिष्टाचार का परिणाम। जब तक समिट के ठोस दस्तावेज़ और कार्यान्वयन योजना सामने नहीं आते, तब तक यह सराहना एकतरफा राजनीतिक आख्यान से अधिक नहीं दिखती।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमंत बिस्वा सरमा ने PM मोदी की तारीफ क्यों की?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 13 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट करते हुए PM मोदी की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आम सहमति बनाने की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैश्विक मीडिया में मिली पहचान इस बात का प्रमाण है कि मजबूत नेतृत्व से भू-राजनीतिक जटिलताओं को भी पार किया जा सकता है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
भारत में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक प्रशासन, बहुपक्षीय सहयोग और भू-राजनीतिक तनावों सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। हाल के वर्षों में ब्रिक्स के विस्तार के बाद अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच आम सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती रही है।
ब्रिक्स में आम सहमति बनाना इतना कठिन क्यों है?
ब्रिक्स में अब अलग-अलग राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक हितों वाले देश शामिल हैं, जो कभी-कभी परस्पर विरोधी भी होते हैं। इन मतभेदों को सहयोग बनाए रखते हुए संतुलित करना समूह की प्रमुख आंतरिक चुनौती रही है।
सरमा के अनुसार ब्रिक्स समिट के नतीजे क्या दर्शाते हैं?
सरमा के अनुसार, ब्रिक्स समिट के नतीजे यह दर्शाते हैं कि प्रभावी नेतृत्व और रचनात्मक कूटनीति से कठिन परिस्थितियों में भी आम सहमति प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने इसे भारत के कूटनीतिक जुड़ाव की सफलता के रूप में देखा।
भारत ब्रिक्स में अपनी भूमिका को क्यों महत्व देता है?
भारत वैश्विक आर्थिक प्रशासन और बदलते अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर चर्चाओं को आकार देने में अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहता है। ब्रिक्स इस लक्ष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जहाँ भारत अपनी मध्यस्थ और नेतृत्वकारी क्षमता का प्रदर्शन कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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