निजुत मोइना योजना: CM हिमंता का बाल विवाह और ड्रॉपआउट के खिलाफ बड़ा दांव
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के अवसर पर 'मुख्यमंत्री निजुत मोइना' योजना को बाल विवाह और स्कूल छोड़ने की समस्या से निपटने का एक निर्णायक उपकरण बताया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से इस योजना की प्रासंगिकता को नवरात्रि की देवी-शिक्षाओं से जोड़ते हुए असम में शिक्षारत लड़कियों के संकल्प की सराहना की।
योजना में क्या है खास
मुख्यमंत्री निजुत मोइना योजना के तहत असम के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं को प्रतिवर्ष 10 महीने तक मासिक आर्थिक सहायता दी जाती है। हायर सेकेंडरी स्तर की छात्राओं को ₹1,000 प्रति माह, अंडरग्रेजुएट छात्राओं को ₹1,250 प्रति माह और पोस्टग्रेजुएट छात्राओं को ₹2,500 प्रति माह की सहायता मिलती है।
यह सहायता राशि सीधे छात्राओं तक पहुँचाकर उनकी पढ़ाई से जुड़े खर्चों को हल्का करने का प्रयास किया गया है, ताकि परिवारों पर आर्थिक दबाव कम हो और वे अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हों।
सरमा का संदेश: सिर्फ छात्रवृत्ति नहीं, सामाजिक बदलाव
सरमा ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया, 'यह सिर्फ एक स्कॉलरशिप नहीं है। यह बाल विवाह और कम उम्र में पढ़ाई छोड़ने के खिलाफ एक मजबूत कदम है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब कोई लड़की कम उम्र में विवाह के स्थान पर किताबों को चुनती है, तो वह एक प्रकार की तपस्या ही करती है — एक रूपक जो नवरात्रि के आध्यात्मिक संदर्भ से गहराई से जुड़ता है।
मुख्यमंत्री ने योजना का लाभ उठाने वाली लड़कियों के लिए मां ब्रह्मचारिणी का आशीर्वाद माँगा और उनके लिए एकाग्रता, विवेक और बाधारहित सपनों की कामना की।
बाल विवाह और ड्रॉपआउट: असम की सामाजिक चुनौती
असम ऐतिहासिक रूप से बाल विवाह की उच्च दर से प्रभावित रहा है, विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों में। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में बाल विवाह के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी तेज़ की है। निजुत मोइना योजना उस कानूनी कार्रवाई को एक सकारात्मक आर्थिक प्रोत्साहन के साथ पूरक बनाती है — यानी दंड और प्रोत्साहन दोनों के मेल से बदलाव लाने की रणनीति।
गौरतलब है कि पढ़ाई बीच में छोड़ने की समस्या अक्सर परिवार की आर्थिक मजबूरी और लड़कियों की जल्दी शादी करा देने की सामाजिक मानसिकता से जुड़ी होती है। इस योजना का उद्देश्य दोनों मोर्चों पर एक साथ काम करना है।
आम जनता पर असर
योजना का सीधा लाभ असम के सरकारी और अनुदान प्राप्त संस्थानों में पढ़ने वाली उन लड़कियों को मिलता है जो हायर सेकेंडरी से लेकर पोस्टग्रेजुएट स्तर तक अध्ययनरत हैं। मासिक सहायता से न केवल शैक्षणिक खर्च पूरे होते हैं, बल्कि परिवार को यह भी एहसास दिलाया जाता है कि बेटी का पढ़ना आर्थिक रूप से लाभकारी है।
यह पहल असम सरकार की उन नीतियों की कड़ी है जो महिला शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा को एक-दूसरे से जोड़ती हैं। आने वाले समय में इस योजना के प्रभाव का मूल्यांकन राज्य में बाल विवाह और ड्रॉपआउट दर में आए बदलाव से किया जाएगा।