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असम की 'निजुत बाबू मोइना' योजना: 5.42 लाख विद्यार्थियों को शिक्षा सहायता, सरमा ने बताई उपलब्धियाँ

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असम की 'निजुत बाबू मोइना' योजना: 5.42 लाख विद्यार्थियों को शिक्षा सहायता, सरमा ने बताई उपलब्धियाँ

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि 'निजुत बाबू मोइना' योजना अब 5.42 लाख विद्यार्थियों को शिक्षा सहायता दे रही है। यह पहल बाल विवाह रोकने, स्कूल ड्रॉपआउट घटाने और असम की बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार का सबसे व्यापक कदम है।

मुख्य बातें

असम की निजुत बाबू मोइना योजना से 5.42 लाख विद्यार्थियों को शिक्षा सहायता मिल रही है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 19 अक्टूबर 2026 को एक्स पोस्ट के ज़रिये यह जानकारी साझा की।
यह पहल पूर्ववर्ती निजुत मोइना योजना का विस्तारित रूप है, जो उच्च माध्यमिक, स्नातक और स्नातकोत्तर छात्राओं को मासिक वित्तीय सहायता देती थी।
योजना का उद्देश्य बाल विवाह को हतोत्साहित करना और लड़कियों की स्कूल ड्रॉपआउट दर घटाना है।
नई पहल में पुरुष विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया है, जबकि मूल योजना का ध्यान छात्राओं पर केंद्रित है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 19 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार की निजुत बाबू मोइना योजना के तहत अब 5.42 लाख विद्यार्थियों को सीधी शिक्षा सहायता मिल रही है। यह पहल युवा महिलाओं को उच्च शिक्षा के ज़रिये आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में असम सरकार के सबसे बड़े कदमों में से एक है।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'हर लड़की में निहित शक्ति का सम्मान करते हुए हम असम की बेटियों को अपना भविष्य स्वयं संवारने के लिए सशक्त बना रहे हैं। निजुत बाबू मोइना के माध्यम से हम 5.42 लाख विद्यार्थियों को आत्मनिर्भरता और बड़े सपनों की ओर बढ़ने में सहायता कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि इस पहल का मूल उद्देश्य असम की बेटियों को शिक्षा प्राप्त कर बेहतर अवसरों की आकांक्षा रखने में सक्षम बनाना है।

योजना की पृष्ठभूमि और संरचना

निजुत बाबू मोइना पहल, राज्य सरकार की पूर्ववर्ती निजुत मोइना योजना का विस्तारित रूप है। मूल निजुत मोइना योजना उच्च माध्यमिक, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययनरत छात्राओं को वित्तीय सहायता देने के लिए शुरू की गई थी। पात्र छात्राओं को निर्धारित शर्तों के अनुसार शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर मासिक वित्तीय सहायता दी जाती है, जिससे परिवारों पर शिक्षा का बोझ कम हो सके।

गौरतलब है कि नई निजुत बाबू मोइना पहल के अंतर्गत राज्य की शिक्षा सहायता योजनाओं का दायरा पुरुष विद्यार्थियों तक भी विस्तारित किया गया है, जबकि मूल निजुत मोइना योजना का केंद्रबिंदु अभी भी छात्राएँ ही हैं।

सामाजिक उद्देश्य और प्रभाव

यह योजना असम सरकार के उन व्यापक प्रयासों का हिस्सा है जिनका लक्ष्य स्कूल और कॉलेज छोड़ने की दर को कम करना, परिवारों को बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करना, और बाल विवाह को हतोत्साहित करना है। आलोचकों का मानना है कि वित्तीय सहायता उन सामाजिक बाधाओं से निपटने में प्रभावी हो सकती है जो युवा महिलाओं को उच्च शिक्षा तक पहुँचने से रोकती हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर महिला साक्षरता और उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने की दिशा में कई राज्य सरकारें अपनी-अपनी योजनाएँ संचालित कर रही हैं। असम की यह पहल उत्तर-पूर्व भारत में छात्राओं के सशक्तीकरण के लिए एक उल्लेखनीय मॉडल बन सकती है।

आम जनता और विद्यार्थियों पर असर

मासिक वित्तीय सहायता का सीधा लाभ यह है कि आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की बेटियाँ अब पढ़ाई बीच में छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होंगी। सरकार ने इस पहल को शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं के नामांकन और ठहराव दर में सुधार के साथ-साथ युवा महिलाओं में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम बताया है।

आगे की राह

सरकार का व्यापक उद्देश्य शिक्षा तक पहुँच में सुधार करना और राज्य के युवाओं को अपनी आकांक्षाएँ पूरी करने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध कराना है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि 5.42 लाख की यह संख्या और किस हद तक बढ़ती है तथा छात्राओं के शैक्षणिक परिणामों पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव कैसा रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस वित्तीय सहायता से छात्राओं की शिक्षा पूर्णता दर में कितना वास्तविक सुधार हुआ है — नामांकन और ठहराव दो अलग पैमाने हैं। बाल विवाह और ड्रॉपआउट जैसी समस्याएँ केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक भी हैं, और मासिक वज़ीफ़ा उनका पूरा समाधान नहीं हो सकता। उत्तर-पूर्व भारत में इस तरह की योजनाओं की सफलता का मूल्यांकन तब होगा जब स्वतंत्र ऑडिट से नामांकन, ठहराव और रोज़गार के ठोस आँकड़े सामने आएँगे।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निजुत बाबू मोइना योजना क्या है?
निजुत बाबू मोइना असम सरकार की एक शिक्षा सहायता पहल है जो राज्य की पूर्ववर्ती निजुत मोइना योजना का विस्तारित रूप है। इसके तहत उच्च माध्यमिक, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययनरत छात्राओं को मासिक वित्तीय सहायता दी जाती है; नई पहल में पुरुष विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया है।
इस योजना से अभी तक कितने विद्यार्थियों को लाभ मिला है?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026 तक इस योजना से 5.42 लाख विद्यार्थियों को सहायता मिल रही है। यह संख्या राज्य की शिक्षा सहायता योजनाओं में अब तक की सबसे बड़ी охват में से एक है।
निजुत मोइना और निजुत बाबू मोइना में क्या अंतर है?
निजुत मोइना योजना मुख्य रूप से छात्राओं पर केंद्रित थी और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए मासिक वित्तीय सहायता देती थी। निजुत बाबू मोइना इसी का विस्तारित संस्करण है जिसमें पुरुष विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया है, हालाँकि छात्राओं पर ध्यान अभी भी प्राथमिक बना हुआ है।
इस योजना का सामाजिक उद्देश्य क्या है?
योजना का व्यापक लक्ष्य लड़कियों की स्कूल और कॉलेज ड्रॉपआउट दर घटाना, बाल विवाह को हतोत्साहित करना और परिवारों को बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करना है। वित्तीय सहायता से परिवारों पर शिक्षा का आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।
इस योजना का लाभ कौन उठा सकता है?
असम में उच्च माध्यमिक, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययनरत पात्र छात्राएँ इस योजना का लाभ उठा सकती हैं। सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करने पर मासिक वित्तीय सहायता दी जाती है; विस्तारित निजुत बाबू मोइना पहल के तहत कुछ पुरुष विद्यार्थी भी पात्र हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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