अमिताभ बच्चन ने सराही आम लोगों की भाषाई रचनात्मकता, 'सरबरी' और 'रेडी वॉटर' के किस्से साझा किए
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग पर 15 जून को भाषा और बोलचाल से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि किस तरह आम लोग अंग्रेज़ी शब्दों को अपनी सुविधा और स्थानीय अंदाज़ में ढालकर नए और आत्मीय शब्द गढ़ लेते हैं। उनके अनुसार, यह भाषाई रचनात्मकता न केवल शब्दों को नया रूप देती है, बल्कि भाषा को और अधिक जीवंत व खूबसूरत भी बनाती है।
ब्लॉग की शुरुआत और प्रशंसकों से जुड़ाव
अमिताभ ने अपने ब्लॉग की शुरुआत फैंस को संबोधित करते हुए की। उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में स्पष्ट किया कि ब्लॉग लिखने में हुई देरी आलस्य के कारण नहीं, बल्कि काम में व्यस्तता के चलते हुई। उन्होंने लिखा कि उनका काम तब पूरा महसूस होता है जब वे अपने प्रशंसकों से जुड़ते हैं।
'सरबरी' — माली की ज़बान से निकला नया शब्द
बिग बी ने अपने मुंबई स्थित आवास 'जलसा' में लगे बोगनविलिया पौधों का ज़िक्र करते हुए एक रोचक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि उनके माली को अंग्रेज़ी शब्द 'शरबरी' का उच्चारण करने में कठिनाई होती थी, इसलिए उसने इसे अपनी सुविधा के अनुसार बदलकर 'सरबरी' कहना शुरू कर दिया। अमिताभ ने कहा कि यह नया शब्द सुनने में इतना आत्मीय और दिलचस्प लगता है कि कई बार यह मूल अंग्रेज़ी शब्द से भी अधिक आकर्षक महसूस होता है।
'रेडी वॉटर' — तर्क से जन्मा शब्द
उन्होंने एक और उदाहरण देते हुए बताया कि कई लोग 'रेडिएटर' का सही उच्चारण नहीं कर पाते, इसलिए उन्होंने इसे 'रेडी वॉटर' कहना शुरू कर दिया। लोगों की सोच थी कि चूँकि रेडिएटर में पानी भरा जाता है, इसलिए उसका नाम 'रेडी वॉटर' होना ही चाहिए। अमिताभ ने कहा कि भले ही यह शब्द तकनीकी रूप से सही न हो, लेकिन इसमें एक अलग तरह की तर्कसंगत रचनात्मकता दिखाई देती है।
भाषा में स्थानीयता की मिठास
अमिताभ बच्चन ने कहा कि ऐसे शब्दों का उच्चारण मूल शब्दों के काफ़ी करीब होता है, लेकिन उनमें स्थानीय भाषा और संस्कृति की मिठास भी घुली होती है। उनके अनुसार, भले ही हर व्यक्ति अंग्रेज़ी में पारंगत न हो, लोग अपने अनुभव और समझ के आधार पर शब्दों को नया रूप दे देते हैं — और यही रचनात्मकता भाषा को जीवंत बनाती है।
प्रशंसकों के प्रति आभार
ब्लॉग के अंत में अमिताभ बच्चन ने अपने उन प्रशंसकों का आभार जताया जो हर रविवार उनसे मिलने जलसा आते हैं। उन्होंने कहा कि ये फैंस उनके घर और जीवन को और अधिक सुंदर बना देते हैं। उनका यह ब्लॉग एक बार फिर साबित करता है कि भाषा केवल व्याकरण की किताबों में नहीं, बल्कि आम लोगों की ज़बान पर जीती है।