17 सितंबर 2026
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जाति जनगणना अभियान: तमिलनाडु के 10 शहरों में कांग्रेस उतरेगी, केंद्र के ओपन-एंडेड फॉर्मेट पर सवाल

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जाति जनगणना अभियान: तमिलनाडु के 10 शहरों में कांग्रेस उतरेगी, केंद्र के ओपन-एंडेड फॉर्मेट पर सवाल

सारांश

तमिलनाडु कांग्रेस 10 शहरों में मैदान में उतर रही है — मुद्दा है जनगणना में OBC जाति डेटा जुटाने का तरीका। ओपन-एंडेड सवालों की जगह ड्रॉप-डाउन लिस्ट की माँग करते हुए पार्टी ने केंद्र पर पिछड़े वर्गों को उनके हक से वंचित रखने की सोची-समझी रणनीति का आरोप लगाया है।

मुख्य बातें

टीएनसीसी 18 सितंबर 2026 से तमिलनाडु के 10 बड़े शहरों में जाति जनगणना जागरूकता अभियान शुरू करेगी।
कांग्रेस ने केंद्र के ओपन-एंडेड प्रश्न फॉर्मेट का विरोध किया; ड्रॉप-डाउन सिस्टम की माँग की।
AICC महासचिव गुलाम अहमद मीर और द्रविड़र कझगम अध्यक्ष के.
वीरमणि शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे।
मणिकम टैगोर का आरोप — केंद्र OBC आबादी के वास्तविक आंकड़े छिपाकर पिछड़ों को प्रतिनिधित्व से वंचित कर रही है।
कांग्रेस नेता ने ₹35,716 करोड़ के कॉर्पोरेट लोन राइट-ऑफ में से केवल 28% वसूली पर भी सवाल उठाए।

तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) 18 सितंबर 2026 से राज्य के 10 प्रमुख शहरों में जाति जनगणना जागरूकता अभियान शुरू कर रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा जनगणना में जातीय आंकड़े जुटाने के प्रस्तावित तरीके की कथित खामियों को जनता के सामने रखना है। पार्टी का आरोप है कि ओपन-एंडेड प्रश्न प्रारूप सामाजिक न्याय नीतियों के लिए आवश्यक विश्वसनीय डेटा देने में सक्षम नहीं है।

अभियान का स्वरूप और नेतृत्व

टीएनसीसी अध्यक्ष एवं विरुधुनगर से सांसद मणिकम टैगोर ने बताया कि यह अभियान जनसभाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के 10 बड़े शहरों में चलाया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव एवं तमिलनाडु प्रभारी गुलाम अहमद मीर और द्रविड़र कझगम के अध्यक्ष के. वीरमणि इस अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।

केंद्र की प्रक्रिया पर मुख्य आपत्तियाँ

कांग्रेस का विरोध केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को लेकर है जिसमें अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित जाति की जानकारी ओपन-एंडेड प्रश्नों के जरिए जुटाने की बात कही गई है। मणिकम टैगोर ने सवाल उठाया कि जब SC और ST समुदायों के लिए पहले से स्पष्ट सूचियाँ उपलब्ध हैं, तो OBC के लिए ओपन-एंडेड फॉर्मेट क्यों अपनाया जा रहा है।

कांग्रेस का मानना है कि पहले से तय समुदायों की सूची पर आधारित ड्रॉप-डाउन सिस्टम अपनाने से गलतियाँ कम होंगी, दोहराव रुकेगा और समुदायों का अधिक सटीक वर्गीकरण सुनिश्चित होगा — जो आरक्षण एवं कल्याणकारी नीतियों के लिए बेहद ज़रूरी है।

सरकार पर राजनीतिक आरोप

मणिकम टैगोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह कथित तौर पर OBC की वास्तविक आबादी के आंकड़े छिपाकर पिछड़े वर्गों को राजनीतिक सत्ता, शिक्षा और रोजगार में उनके उचित प्रतिनिधित्व से वंचित करने की सोची-समझी रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र ने पहले परिसीमन से जुड़े मुद्दों का हवाला देकर जाति जनगणना को टाला था।

कॉर्पोरेट लोन और बैंकिंग पारदर्शिता पर निशाना

इस अवसर पर मणिकम टैगोर ने केंद्र पर कॉर्पोरेट लोन राइट-ऑफ में पारदर्शिता न बरतने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ₹35,716 करोड़ के राइट-ऑफ में से केवल 28 प्रतिशत ही वसूला जा सका है। उनके अनुसार, 2015 में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों ने कथित तौर पर जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले कॉर्पोरेट कर्जदारों के नाम सार्वजनिक करने से इनकार किया।

उपचुनाव और गठबंधन की स्थिति

वाम दलों द्वारा आगामी उपचुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने के फैसले पर मणिकम टैगोर ने कहा कि वे उनकी रणनीति पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं, हालाँकि उन्होंने यह ज़रूर जताया कि जिन दलों ने विधानसभा में सरकार का समर्थन किया, उनके अलग चुनाव लड़ने के फैसले पर आश्चर्य होता है। गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब जनगणना का दूसरा चरण — जिसमें जाति डेटा संकलन प्रस्तावित है — आरक्षण और सामाजिक न्याय नीतियों पर अपने दूरगामी प्रभाव के कारण राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली लड़ाई अब डेटा संकलन की पद्धति पर आ गई है — और यहीं कांग्रेस ने एक तकनीकी, पर राजनीतिक रूप से धारदार मुद्दा पकड़ा है। ओपन-एंडेड सवाल बनाम ड्रॉप-डाउन लिस्ट की बहस सुनने में प्रशासनिक लग सकती है, लेकिन इसके परिणाम — OBC की गिनती कम या ज़्यादा होना — सीधे आरक्षण की राजनीति को आकार देंगे। तमिलनाडु में जहाँ द्रविड़ आंदोलन की विरासत OBC पहचान की नींव पर टिकी है, वहाँ यह अभियान कांग्रेस को DMK-नेतृत्व वाले गठबंधन में प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश भी है। लेकिन जब तक केंद्र की जनगणना अधिसूचना का अंतिम स्वरूप सामने नहीं आता, यह बहस काफ़ी हद तक अनुमानों पर टिकी है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में कांग्रेस का जाति जनगणना अभियान क्या है?
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) 18 सितंबर 2026 से राज्य के 10 प्रमुख शहरों में जनसभाओं और संवाद कार्यक्रमों के जरिए जाति जनगणना जागरूकता अभियान चला रही है। इसका उद्देश्य केंद्र के प्रस्तावित ओपन-एंडेड प्रश्न फॉर्मेट की खामियाँ उजागर करना और ड्रॉप-डाउन सिस्टम की माँग को जन-समर्थन दिलाना है।
कांग्रेस का ओपन-एंडेड फॉर्मेट से क्या विरोध है?
कांग्रेस का कहना है कि OBC जाति डेटा ओपन-एंडेड सवालों के ज़रिए जुटाने से गलतियाँ बढ़ेंगी और दोहराव होगा, जिससे वास्तविक आबादी का सही आकलन नहीं हो पाएगा। पार्टी पहले से तय समुदायों की सूची पर आधारित ड्रॉप-डाउन सिस्टम की वकालत करती है, जो SC और ST के लिए पहले से लागू है।
अभियान का नेतृत्व कौन कर रहा है?
टीएनसीसी अध्यक्ष एवं विरुधुनगर सांसद मणिकम टैगोर इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। AICC महासचिव गुलाम अहमद मीर और द्रविड़र कझगम अध्यक्ष के. वीरमणि शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होंगे।
जाति जनगणना का दूसरा चरण क्यों अहम माना जा रहा है?
जनगणना के दूसरे चरण में जाति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी, जो आरक्षण और कल्याणकारी नीतियों के निर्माण में सीधे उपयोग होगी। OBC की सही गिनती न होने पर उनका हिस्सा शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में प्रभावित हो सकता है।
कांग्रेस ने कॉर्पोरेट लोन राइट-ऑफ पर क्या आरोप लगाए?
मणिकम टैगोर ने दावा किया कि ₹35,716 करोड़ के कॉर्पोरेट लोन राइट-ऑफ में से केवल 28 प्रतिशत ही वसूला गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2015 में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद RBI और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित सार्वजनिक संस्थानों ने कथित तौर पर जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के नाम सार्वजनिक करने से इनकार किया।
राष्ट्र प्रेस
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