जाति जनगणना अभियान: तमिलनाडु के 10 शहरों में कांग्रेस उतरेगी, केंद्र के ओपन-एंडेड फॉर्मेट पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) 18 सितंबर 2026 से राज्य के 10 प्रमुख शहरों में जाति जनगणना जागरूकता अभियान शुरू कर रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा जनगणना में जातीय आंकड़े जुटाने के प्रस्तावित तरीके की कथित खामियों को जनता के सामने रखना है। पार्टी का आरोप है कि ओपन-एंडेड प्रश्न प्रारूप सामाजिक न्याय नीतियों के लिए आवश्यक विश्वसनीय डेटा देने में सक्षम नहीं है।
अभियान का स्वरूप और नेतृत्व
टीएनसीसी अध्यक्ष एवं विरुधुनगर से सांसद मणिकम टैगोर ने बताया कि यह अभियान जनसभाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के 10 बड़े शहरों में चलाया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव एवं तमिलनाडु प्रभारी गुलाम अहमद मीर और द्रविड़र कझगम के अध्यक्ष के. वीरमणि इस अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।
केंद्र की प्रक्रिया पर मुख्य आपत्तियाँ
कांग्रेस का विरोध केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को लेकर है जिसमें अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित जाति की जानकारी ओपन-एंडेड प्रश्नों के जरिए जुटाने की बात कही गई है। मणिकम टैगोर ने सवाल उठाया कि जब SC और ST समुदायों के लिए पहले से स्पष्ट सूचियाँ उपलब्ध हैं, तो OBC के लिए ओपन-एंडेड फॉर्मेट क्यों अपनाया जा रहा है।
कांग्रेस का मानना है कि पहले से तय समुदायों की सूची पर आधारित ड्रॉप-डाउन सिस्टम अपनाने से गलतियाँ कम होंगी, दोहराव रुकेगा और समुदायों का अधिक सटीक वर्गीकरण सुनिश्चित होगा — जो आरक्षण एवं कल्याणकारी नीतियों के लिए बेहद ज़रूरी है।
सरकार पर राजनीतिक आरोप
मणिकम टैगोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह कथित तौर पर OBC की वास्तविक आबादी के आंकड़े छिपाकर पिछड़े वर्गों को राजनीतिक सत्ता, शिक्षा और रोजगार में उनके उचित प्रतिनिधित्व से वंचित करने की सोची-समझी रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र ने पहले परिसीमन से जुड़े मुद्दों का हवाला देकर जाति जनगणना को टाला था।
कॉर्पोरेट लोन और बैंकिंग पारदर्शिता पर निशाना
इस अवसर पर मणिकम टैगोर ने केंद्र पर कॉर्पोरेट लोन राइट-ऑफ में पारदर्शिता न बरतने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ₹35,716 करोड़ के राइट-ऑफ में से केवल 28 प्रतिशत ही वसूला जा सका है। उनके अनुसार, 2015 में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों ने कथित तौर पर जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाले कॉर्पोरेट कर्जदारों के नाम सार्वजनिक करने से इनकार किया।
उपचुनाव और गठबंधन की स्थिति
वाम दलों द्वारा आगामी उपचुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने के फैसले पर मणिकम टैगोर ने कहा कि वे उनकी रणनीति पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं, हालाँकि उन्होंने यह ज़रूर जताया कि जिन दलों ने विधानसभा में सरकार का समर्थन किया, उनके अलग चुनाव लड़ने के फैसले पर आश्चर्य होता है। गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब जनगणना का दूसरा चरण — जिसमें जाति डेटा संकलन प्रस्तावित है — आरक्षण और सामाजिक न्याय नीतियों पर अपने दूरगामी प्रभाव के कारण राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना हुआ है।