चेन्नई फर्टिलिटी क्लिनिक विवाद: मां का आरोप — डॉक्टर ने नवजात बेटा दंपति को सौंपा, वापस लेने से इनकार
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई की एक 27 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि कोलाथुर स्थित एक निजी फर्टिलिटी क्लिनिक में 29 जुलाई 2025 को जन्मे उसके नवजात बेटे को अस्पताल स्टाफ ने एक निःसंतान दंपति को सौंप दिया, जो अब बच्चे को वापस करने से साफ इनकार कर रहा है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने क्लिनिक के डॉक्टर तथा तिरुवोत्तियूर के उस दंपति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
चेंगलपट्टू निवासी के. मेगला के अनुसार, फरवरी 2025 में उनके पति का प्राकृतिक कारणों से निधन हो गया था। उस समय वे अपने दूसरे बच्चे के साथ तीन महीने की गर्भवती थीं और गंभीर आर्थिक तंगी में जी रही थीं। उनका एक चार वर्षीय बेटा पहले से था।
मेगला ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर कोलाथुर के एक अस्पताल में मुफ्त प्रसव-सेवा का विज्ञापन दिखा, जिसके बाद वे गर्भावस्था के सातवें महीने में उस क्लिनिक पहुँचीं और डॉक्टरों व कर्मचारियों को अपनी आर्थिक परिस्थिति से अवगत कराया।
अस्पताल में क्या हुआ
मेगला का आरोप है कि 29 जुलाई 2025 को प्रसव के बाद अस्पताल कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि नवजात को आइसोलेशन में रखने की जरूरत है। उनके अनुसार, प्रसव के 10 दिन बाद ही उन्हें पहली बार बच्चा दिखाया गया।
इसके बाद एक दूसरे डॉक्टर ने उन्हें तिरुवोत्तियूर के एक निःसंतान दंपति से मिलवाया और सुझाव दिया कि बच्चे को तीन महीने के लिए उस दंपति के पास रखा जाए और फिर वापस कर दिया जाए। मेगला ने कथित तौर पर इस अस्थायी व्यवस्था पर सहमति जताई।
दंपति ने बच्चा लौटाने से किया इनकार
मेगला का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने बच्चे को उस दंपति को सौंप दिया। जब उन्होंने हाल ही में दंपति से संपर्क कर बेटे को वापस माँगा, तो दंपति ने स्पष्ट मना कर दिया। इसके बाद मेगला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने क्लिनिक के डॉक्टर और दंपति — दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि बच्चा दंपति के पास आखिर किन परिस्थितियों में और किसकी अनुमति से पहुँचा।
जांच में विरोधाभास
पुलिस के अनुसार, मेगला के बयानों में कुछ विरोधाभास भी सामने आए हैं, जिनकी आगे जाँच की जरूरत है। अधिकारियों ने सभी पक्षों — मेगला, क्लिनिक के डॉक्टर और दंपति — से पूछताछ शुरू कर दी है। यह स्पष्ट नहीं है कि कोई औपचारिक दस्तावेज या लिखित समझौता इस व्यवस्था के लिए बनाया गया था या नहीं।
आगे की कार्रवाई
यह मामला भारत में सरोगेसी और शिशु-देखभाल व्यवस्थाओं को लेकर कानूनी खामियों पर सवाल उठाता है, खासकर जब आर्थिक रूप से कमजोर और एकल माताएँ इसमें शामिल हों। पुलिस जांच जारी है और बच्चे की हिरासत का मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकता है।