राजस्थान के खिमसर में करंट से पति-पत्नी की मौत, मवेशियों को बचाने में गई जान; बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के गिडा क्षेत्र के खिमसर इलाके में स्थित 'जंडू की ढाणी' में गुरुवार, 22 अक्टूबर को एक दर्दनाक हादसे में किसान रावताराम कड़वासरा और उनकी पत्नी वीरो देवी की हाई-वोल्टेज बिजली का करंट लगने से मौके पर ही मौत हो गई। दोनों अपने पशुबाड़े में फंसी भेड़-बकरियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे, जब एक टूटी बिजली लाइन की चपेट में आ गए। इस हादसे में 13 से 14 भेड़-बकरियों की भी जान चली गई।
हादसे का घटनाक्रम
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, थ्री-फेज हाई-वोल्टेज बिजली लाइन का एक तार टूटकर खेत की लोहे की जालीदार बाड़ पर गिर गया, जिससे पूरी बाड़ और उससे सटा पशुबाड़ा करंटयुक्त हो गया। बाड़े के भीतर मौजूद भेड़-बकरियों को बिजली के झटके लगते देख हिम्मताराम के बेटे रावताराम कड़वासरा मवेशियों को बचाने के लिए अंदर दौड़े, लेकिन प्रवेश करते ही उन्हें जोरदार झटका लगा और वे गिर पड़े।
पति को संकट में देख वीरो देवी उनकी मदद के लिए आगे बढ़ीं। जैसे ही उन्होंने पशुबाड़े का लोहे का गेट छुआ, उन्हें भी जानलेवा करंट लगा और दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, इस हादसे में केवल एक बकरी ही बच पाई।
बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप
इस हादसे ने स्थानीय समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली की लाइन हादसे से एक दिन पहले ही टूट गई थी और इस खतरे की सूचना बिजली विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन पर दे दी गई थी। बावजूद इसके, न तो बिजली की सप्लाई काटी गई और न ही खराब लाइन की मरम्मत की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि समय पर कार्रवाई होती तो यह दोहरी मौत टाली जा सकती थी। पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है और तकनीकी जाँच के आधार पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की अपील की है।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही नागाणा पुलिस थाने की एक टीम और बटाडू पुलिस चौकी के प्रभारी मौके पर पहुँचे और सर्वप्रथम बिजली की सप्लाई कटवाई। पुलिस ने दोनों शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बटाडू मोर्चरी भेजा। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
पशु चिकित्सा विभाग की एक टीम भी घटनास्थल पर पहुँची और मृत मवेशियों की जाँच की। पुलिस ने स्पष्ट किया कि परिवार की शिकायत और तकनीकी जाँच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में आई है जब राजस्थान सहित ग्रामीण भारत में जर्जर बिजली अवसंरचना से होने वाली मौतों की संख्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। गौरतलब है कि खेतों और पशुबाड़ों के निकट से गुजरने वाली हाई-वोल्टेज लाइनें किसान परिवारों के लिए स्थायी खतरा बनी हुई हैं, खासकर मानसून के बाद जब तारों के शिथिल पड़ने और टूटने की आशंका बढ़ जाती है।
इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभागों के पास नागरिकों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई का कोई तंत्र है। जाँच के नतीजे और उनके आधार पर की जाने वाली कानूनी कार्रवाई ही यह तय करेगी कि इस परिवार को न्याय मिलेगा या नहीं।