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राजस्थान: करंट लगने से किसान दंपती की मौत, मवेशी बचाने गए थे — बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप

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राजस्थान: करंट लगने से किसान दंपती की मौत, मवेशी बचाने गए थे — बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप

सारांश

राजस्थान के खिमसर में एक टूटी थ्री-फेज बिजली लाइन ने लोहे की बाड़ को करंटयुक्त बना दिया। मवेशियों को बचाने दौड़े किसान रावताराम कड़वासरा और उनकी पत्नी वीरो देवी दोनों की मौके पर मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि खतरे की पूर्व सूचना देने के बावजूद बिजली विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया।

मुख्य बातें

राजस्थान के खिमसर स्थित 'जंडू की ढाणी' में 22 अक्टूबर 2026 को करंट लगने से किसान रावताराम कड़वासरा और उनकी पत्नी वीरो देवी की मौत हुई।
टूटी थ्री-फेज हाई-वोल्टेज लाइन का तार लोहे की जालीदार बाड़ पर गिरने से पशुबाड़े में करंट फैल गया।
हादसे में 13 से 14 भेड़-बकरियाँ भी मारी गईं; केवल एक बकरी बच सकी।
ग्रामीणों का आरोप: लाइन टूटने की सूचना एक दिन पहले ही बिजली विभाग को दी गई थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित परिवार ने जिम्मेदार अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की माँग की है।
पुलिस ने शव बटाडू मोर्चरी भेजे; तकनीकी जाँच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

राजस्थान के गिडा क्षेत्र के खिमसर इलाके में स्थित 'जंडू की ढाणी' में 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को एक दर्दनाक हादसे में किसान रावताराम कड़वासरा और उनकी पत्नी वीरो देवी की बिजली का करंट लगने से मौके पर ही मौत हो गई। दोनों अपने पशुबाड़े में फँसी भेड़-बकरियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे, जब एक टूटी हाई-वोल्टेज बिजली लाइन से करंट फैल गया था। इस हादसे में 13 से 14 भेड़-बकरियों की भी मौत हो गई।

हादसे का क्रम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, थ्री-फेज हाई-वोल्टेज बिजली लाइन का एक तार टूटकर खेत की लोहे की जालीदार बाड़ पर जा गिरा। इससे पशुबाड़े में करंट फैल गया और अंदर बंद भेड़-बकरियों को बिजली के झटके लगने लगे।

हिम्मताराम के बेटे रावताराम कड़वासरा मवेशियों की चीख सुनकर उन्हें बचाने के लिए बाड़े में दौड़े, लेकिन अंदर घुसते ही उन्हें जोरदार बिजली का झटका लगा। अपने पति को संकट में देखकर वीरो देवी आगे बढ़ीं और जैसे ही उन्होंने बाड़े का लोहे का गेट छुआ, उन्हें भी जानलेवा करंट लगा। दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप

स्थानीय लोगों में इस हादसे को लेकर गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली की यह लाइन हादसे से एक दिन पहले ही टूट गई थी और इस खतरे की सूचना बिजली विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन पर दे दी गई थी।

ग्रामीणों का कहना है कि सूचना मिलने के बावजूद न तो बिजली की आपूर्ति काटी गई और न ही टूटी लाइन की मरम्मत के लिए कोई कदम उठाया गया। पीड़ित परिवार और स्थानीय निवासियों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की माँग की है।

पुलिस की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही नागाणा पुलिस थाने की एक टीम और बटाडू पुलिस चौकी के प्रभारी मौके पर पहुँचे और बिजली की आपूर्ति कटवाई। पुलिस ने दोनों शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बटाडू मोर्चरी भेज दिया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएँगे।

पशु चिकित्सा विभाग की एक टीम भी घटनास्थल पर पहुँची और मृत मवेशियों की जाँच की। रिपोर्टों के अनुसार इस हादसे में केवल एक बकरी ही बच सकी।

आम जनता पर असर और माँगें

यह घटना ग्रामीण राजस्थान में बिजली अवसंरचना की खस्ता हालत पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोग जाँच के आधार पर जिम्मेदार बिजली विभाग कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि परिवार की शिकायत और तकनीकी जाँच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

क्या होगा आगे

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की तकनीकी जाँच से यह स्पष्ट होगा कि बिजली विभाग की लापरवाही कानूनी रूप से सिद्ध होती है या नहीं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी और जर्जर बिजली लाइनों को लेकर समय-समय पर शिकायतें आती रही हैं। शोकाकुल स्थानीय समुदाय अब जवाबदेही तय होने का इंतज़ार कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक व्यवस्थागत विफलता की कहानी है — खतरे की पूर्व सूचना देने के बावजूद समय पर कार्रवाई न होने से दो जानें गईं। ग्रामीण राजस्थान में जर्जर बिजली अवसंरचना का यह पहला मामला नहीं है, लेकिन हर बार जाँच के बाद जवाबदेही तय होने की बजाय मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। असली सवाल यह है कि बिजली विभाग में शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई का कोई बाध्यकारी प्रोटोकॉल क्यों नहीं है। जब तक ऐसी व्यवस्था नहीं बनती, ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे और परिवार केवल मुआवज़े की भीख माँगते रहेंगे।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान के खिमसर में करंट से हुई मौत की घटना क्या है?
22 अक्टूबर 2026 को खिमसर के 'जंडू की ढाणी' में एक टूटी थ्री-फेज बिजली लाइन का तार लोहे की बाड़ पर गिरने से पशुबाड़े में करंट फैल गया। मवेशियों को बचाने गए किसान रावताराम कड़वासरा और उनकी पत्नी वीरो देवी दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
इस हादसे में कितने मवेशियों की मौत हुई?
इस हादसे में 13 से 14 भेड़-बकरियों की मौत हो गई। रिपोर्टों के अनुसार केवल एक बकरी ही बच सकी। पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर मृत मवेशियों की जाँच की।
बिजली विभाग पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली की लाइन हादसे से एक दिन पहले ही टूट गई थी और इसकी सूचना बिजली विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन पर दे दी गई थी। सूचना मिलने के बावजूद न बिजली काटी गई और न ही लाइन की मरम्मत की गई, जिससे यह जानलेवा हादसा हुआ।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
नागाणा पुलिस थाने और बटाडू पुलिस चौकी की टीमें मौके पर पहुँचीं और बिजली की आपूर्ति कटवाई। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए बटाडू मोर्चरी भेजा गया है। पुलिस ने कहा है कि परिवार की शिकायत और तकनीकी जाँच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने क्या माँगें रखी हैं?
पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने जिम्मेदार बिजली विभाग कर्मियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की माँग की है। उनकी माँग है कि यह जाँच की जाए कि खतरे की सूचना मिलने के बावजूद बिजली लाइन की मरम्मत में देरी क्यों की गई।
राष्ट्र प्रेस
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