आईआईएम बेंगलुरु का इंडोनेशिया में पहला अंतरराष्ट्रीय परिसर, मलांग के सिंगहसारी SEZ में दो चरणों में होगा विस्तार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु (IIM-B) इंडोनेशिया के मलांग स्थित सिंगहसारी विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय परिसर स्थापित करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा 7 जुलाई को इंडोनेशिया यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त वक्तव्य में की। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना दो चरणों में लागू की जाएगी।
दो चरणों में क्या होगा
पहले चरण में वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के नेताओं और सार्वजनिक क्षेत्र के पेशेवरों के लिए कार्यकारी शिक्षा कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य कार्यरत पेशेवरों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नेतृत्व और प्रबंधन कौशल से लैस करना है।
पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद दूसरे चरण में नियमित डिग्री प्रदान करने वाले प्रबंधन पाठ्यक्रम आरंभ किए जाएंगे। इसके लिए IIM बेंगलुरु और सिंगहसारी SEZ के प्रबंधन एवं विकास निकाय के बीच औपचारिक समझौता किया जाएगा।
पाठ्यक्रम की प्राथमिकताएँ
इंडोनेशिया परिसर का पाठ्यक्रम आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था की माँगों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इसमें पाँच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा — वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ, डिजिटल परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास, और स्वास्थ्य प्रबंधन।
कार्यक्रमों में उद्योग जगत के वरिष्ठ नेतृत्व, प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ संवाद के अवसर भी उपलब्ध होंगे। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों को बेंगलुरु स्थित मुख्य परिसर में अल्पकालिक शैक्षणिक भ्रमण का अवसर भी मिलेगा, जिससे वे भारत के नवाचार तंत्र और कारोबारी परिवेश को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे।
भारत की वैश्विक शिक्षा विस्तार की कड़ी
गौरतलब है कि यह पहल अकेली नहीं है। इससे पहले IIM अहमदाबाद ने दुबई में, IIT दिल्ली ने अबू धाबी में और IIT मद्रास ने जांजीबार में अपने अंतरराष्ट्रीय परिसर स्थापित कर भारत की शैक्षिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। IIM बेंगलुरु का इंडोनेशिया विस्तार इस श्रृंखला की अगली महत्वपूर्ण कड़ी है।
यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की उस परिकल्पना को भी साकार करती है, जिसमें देश के शीर्ष संस्थानों को वैश्विक स्तर पर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय शिक्षा मॉडल की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और बढ़ेगी।
आसियान क्षेत्र पर नज़र
यह परिसर मुख्य रूप से इंडोनेशियाई छात्रों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है, लेकिन दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों के विद्यार्थियों और पेशेवरों को भी आकर्षित करने की योजना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह परिसर केवल इंडोनेशिया नहीं, बल्कि पूरे आसियान क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल भारत-इंडोनेशिया के बीच केवल शैक्षणिक सहयोग नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल विकास और मानव संसाधन निर्माण के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम है। आने वाले वर्षों में यह परिसर भारत की 'ज्ञान कूटनीति' का एक प्रमुख स्तंभ बन सकता है।