कंगना रनौत से देशभक्ति न सीखें जो 2014 को आज़ादी मानती हैं: इमरान प्रतापगढ़ी का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने 18 अगस्त 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद कंगना रनौत के 'वंदे मातरम' और देशभक्ति संबंधी बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि जो व्यक्ति यह मानती हैं कि भारत को आज़ादी 2014 के बाद मिली, उनसे देशभक्ति की परिभाषा सीखने की कोई ज़रूरत नहीं है।
कंगना रनौत का मूल बयान
BJP सांसद कंगना रनौत ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि 'वंदे मातरम' भारत की चेतना का प्रतीक है और एक कलाकार के रूप में वे समझती हैं कि कला व कविता लोगों के मन पर कितना गहरा प्रभाव डालती है। उन्होंने 'वंदे मातरम' के प्रति 'विरोध और नफरत' तथा उसके गायन को रोकने की कोशिशों को 'बेहद चिंताजनक' बताया।
रनौत ने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस अब केवल BJP-विरोधी नहीं रह गई, बल्कि 'देश के खिलाफ' भी होती जा रही है।
प्रतापगढ़ी का पलटवार
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, 'कंगना रनौत से देशभक्ति की परिभाषा सीखने की ज़रूरत नहीं है, जो कहती हैं कि 2014 के बाद देश आज़ाद हुआ। उनके हर सवाल का जवाब वहीं खत्म हो जाता है।' उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में जोड़ा कि अच्छी बात है कि रनौत ने अपना करियर अभिनय से शुरू किया, लेकिन अब उन्हें 'पढ़ना-लिखना शुरू करना चाहिए।'
प्रतापगढ़ी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा और दावा किया कि संगठन ने 'लंबे समय तक अपने कार्यालयों पर तिरंगा नहीं फहराया' और संविधान को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस के स्वतंत्रता आंदोलन में 'ऐतिहासिक योगदान' का उल्लेख किया।
झारखंड परीक्षा विवाद और राहुल गांधी
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL परीक्षाएं रद्द करने के फैसले पर प्रतापगढ़ी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले में 'संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप किया।' उन्होंने बताया कि राहुल गांधी द्वारा पत्र लिखे जाने के बाद मुख्यमंत्री सोरेन ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनकी अधिकांश मांगें स्वीकार कर लीं।
ट्रंप के बयान और चुनाव आयोग पर सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर प्रतापगढ़ी ने कहा कि यदि ट्रंप के बयान भारतीय मीडिया के लिए इतने महत्वपूर्ण हैं, तो प्रधानमंत्री की आलोचना करने पर उन्हें 'आंतरिक मामला' क्यों बताया जाता है।
चुनाव आयोग (ECI) पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश में चुनावी प्रक्रिया और आयोग की भूमिका को लेकर 'लंबी बहस की ज़रूरत है।' उनके अनुसार, 'जब भी चुनाव आयोग के इस दौर को याद किया जाएगा, मुझे नहीं लगता कि इसे अच्छे शब्दों में याद किया जाएगा।'
यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब स्वतंत्रता दिवस के बाद राष्ट्रवाद और देशभक्ति की परिभाषा को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच वाक्-युद्ध तेज़ हो गया है।