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भारत-बांग्लादेश मीडिया सहयोग: ढाका में भारतीय उच्चायोग ने महिला पत्रकारों के साथ किया विशेष संवाद

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भारत-बांग्लादेश मीडिया सहयोग: ढाका में भारतीय उच्चायोग ने महिला पत्रकारों के साथ किया विशेष संवाद

सारांश

भारत-बांग्लादेश संबंधों में राजनयिक तनाव के बीच ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने सॉफ्ट डिप्लोमेसी का नया अध्याय खोला। 11-24 मई की दो हफ्ते की भारत यात्रा के बाद बांग्लादेशी महिला पत्रकारों के साथ हुए संवाद ने मीडिया-स्तर पर लोगों-से-लोगों के संपर्क को नई ऊर्जा दी, जिसमें SRFTI कोलकाता का SDG-केंद्रित प्रशिक्षण केंद्र में रहा।

मुख्य बातें

ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने मंगलवार को बांग्लादेशी महिला पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल से विशेष संवाद किया।
प्रतिनिधिमंडल 11 से 24 मई तक भारत के दौरे पर था और SRFTI कोलकाता में प्रशिक्षित हुआ।
पाठ्यक्रम 'जर्नलिज़्म फॉर ए बेटर वर्ल्ड: रिपोर्टिंग फॉर एसडीजीज़' ITEC कार्यक्रम के तहत आयोजित।
प्रभारी राजदूत पवनकुमार बधे ने द्विपक्षीय मीडिया सहयोग पर बल दिया।
प्रतिनिधिमंडल ने रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक आवास, साइंस सिटी और भारतीय संग्रहालय का दौरा किया।

ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने 11 से 24 मई तक भारत यात्रा पर गए बांग्लादेशी महिला पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मंगलवार को विशेष संवाद सत्र आयोजित किया। बांग्लादेश के प्रमुख प्रिंट और टेलीविज़न मीडिया संस्थानों की इन पत्रकारों ने कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविज़न संस्थान (SRFTI) में आयोजित विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में भाग लिया था।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का स्वरूप

यह पाठ्यक्रम — ‘जर्नलिज़्म फॉर ए बेटर वर्ल्ड: रिपोर्टिंग फॉर एसडीजीज़’ — भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य पत्रकारों को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जुड़े मुद्दों की प्रभावी और ज़िम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए प्रशिक्षित करना था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को नीति-आधारित रिपोर्टिंग, डेटा-संचालित कथा-निर्माण और विकास पत्रकारिता के समकालीन उपकरणों से परिचित कराया गया।

उच्चायोग की प्रतिक्रिया

संवाद सत्र में भारतीय उच्चायोग के प्रभारी राजदूत (चार्ज डी'अफेयर्स) पवनकुमार बधे ने प्रतिनिधिमंडल की भारत यात्रा की समीक्षा की। उन्होंने भारत और बांग्लादेश के मीडिया संस्थानों के बीच गहरे सहयोग और संवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि दोनों देशों का मीडिया सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्य-केंद्रित दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूती मिलेगी।

सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण

प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रतिनिधिमंडल ने कोलकाता के कई प्रमुख सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक स्थलों का दौरा किया। इनमें नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर का पैतृक आवास, साइंस सिटी और भारतीय संग्रहालय शामिल रहे। इन यात्राओं के माध्यम से प्रतिभागियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और आधुनिक विकास को करीब से समझने का अवसर मिला।

क्यों मायने रखता है यह कदम

यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब भारत-बांग्लादेश संबंधों में राजनयिक स्तर पर कई नई चुनौतियाँ उभरी हैं और दोनों देशों के बीच लोगों-से-लोगों के संपर्क की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उच्चायोग ने बुधवार को कहा कि इस प्रकार के क्षमता-निर्माण कार्यक्रम पेशेवर कौशल विकसित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंधों को भी मज़बूत बनाते हैं। गौरतलब है कि ITEC कार्यक्रम के तहत भारत बांग्लादेशी पेशेवरों को सबसे अधिक प्रशिक्षण स्लॉट उपलब्ध कराने वाले देशों में रहा है। आने वाले महीनों में मीडिया आदान-प्रदान के और दौर आयोजित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक रणनीतिक संदेश है। जब आधिकारिक कूटनीतिक चैनलों पर तनाव हो, तब मीडिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे ट्रैक-टू माध्यम संबंधों को ज़िंदा रखते हैं। SRFTI में SDG-केंद्रित प्रशिक्षण चुनना भी सोच-समझकर उठाया गया कदम है — यह विवादास्पद राजनीतिक विषयों से बचते हुए साझा विकास एजेंडे पर ध्यान केंद्रित करता है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये पहलें द्विपक्षीय आख्यान में मापने योग्य बदलाव ला पाती हैं।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ढाका में भारतीय उच्चायोग ने महिला पत्रकारों से क्यों संवाद किया?
उच्चायोग ने 11 से 24 मई के बीच भारत यात्रा पर गए बांग्लादेशी महिला पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल की यात्रा की समीक्षा के लिए मंगलवार को विशेष संवाद सत्र आयोजित किया। उद्देश्य द्विपक्षीय मीडिया सहयोग को मज़बूत करना और प्रशिक्षण अनुभवों को साझा करना था।
SRFTI कोलकाता में किस तरह का प्रशिक्षण दिया गया?
बांग्लादेशी पत्रकारों ने ITEC कार्यक्रम के तहत आयोजित 'जर्नलिज़्म फॉर ए बेटर वर्ल्ड: रिपोर्टिंग फॉर एसडीजीज़' पाठ्यक्रम में भाग लिया। यह पाठ्यक्रम सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े मुद्दों की प्रभावी एवं ज़िम्मेदार रिपोर्टिंग पर केंद्रित था।
ITEC कार्यक्रम क्या है?
ITEC यानी भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम भारत सरकार की एक प्रमुख क्षमता-निर्माण पहल है, जिसके तहत मित्र देशों के पेशेवरों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है। बांग्लादेश इस कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक है।
प्रतिनिधिमंडल ने कोलकाता में किन स्थलों का दौरा किया?
प्रतिनिधिमंडल ने नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक आवास, साइंस सिटी, भारतीय संग्रहालय और अन्य महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक स्थलों का दौरा किया। इन यात्राओं ने प्रतिभागियों को भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया।
यह संवाद भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर हाल के तनाव के बीच इस तरह के मीडिया आदान-प्रदान लोगों-से-लोगों के संपर्क और आपसी समझ को बढ़ावा देते हैं। उच्चायोग के अनुसार ऐसे क्षमता-निर्माण कार्यक्रम पेशेवर कौशल विकसित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंधों को भी मज़बूत बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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