9 अक्टूबर 2026
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इंडिया ब्लॉक ने राष्ट्रपति मुर्मु को सौंपा ज्ञापन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे समेत चार माँगें

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इंडिया ब्लॉक ने राष्ट्रपति मुर्मु को सौंपा ज्ञापन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे समेत चार माँगें

सारांश

इंडिया गठबंधन ने 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति मुर्मु के समक्ष चुनावी व्यवस्था पर बड़ा मोर्चा खोला — CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, 13.30 करोड़ मतदाताओं की बहाली और बैलेट पेपर की वापसी की माँग। खड़गे, राहुल, ममता और उमर अब्दुल्ला एक साथ राष्ट्रपति भवन पहुँचे।

मुख्य बातें

इंडिया गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं ने 9 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर चुनावी अनियमितताओं पर ज्ञापन सौंपा।
चार प्रमुख माँगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और 2023 के कानूनी संरक्षण कानून को वापस लेना शामिल है।
कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करने और SIR अभियान रोकने की माँग।
सभी भावी चुनाव बैलेट पेपर से कराने और पिछले दो वर्षों के 'विवादित' विधानसभा चुनाव निरस्त करने की भी अपील।
प्रतिनिधिमंडल में मल्लिकार्जुन खड़गे , राहुल गांधी , ममता बनर्जी , उमर अब्दुल्ला सहित कई दलों के नेता शामिल थे।

इंडिया गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं ने 9 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में मुलाकात कर देश की चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और मतदान व्यवस्था को लेकर अपनी गंभीर चिंताओं से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि देश के लोकतांत्रिक ढाँचे को कमज़ोर किया जा रहा है और करोड़ों मतदाताओं के मतदान के संवैधानिक अधिकार पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

चार प्रमुख माँगें

इंडिया गठबंधन ने राष्ट्रपति के समक्ष चार सूत्री माँग रखी। पहली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा। दूसरी, वर्ष 2023 में पारित उस कानून को वापस लेना, जो मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को आजीवन कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। तीसरी, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को तत्काल रोकना और कथित तौर पर हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में पुनः बहाल करना। चौथी, सभी भावी चुनाव बैलेट पेपर से कराना और पिछले दो वर्षों में हुए उन विधानसभा चुनावों को निरस्त करना, जिनमें गठबंधन के अनुसार वोट चोरी के निर्णायक प्रमाण मौजूद हैं।

ज्ञापन में मुख्य आरोप

ज्ञापन में विपक्षी दलों ने दावा किया कि विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं। उनके अनुसार ईवीएम और मतदाता सूचियों में हेरफेर की गई है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि मतदान का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत प्रतिनिधिक लोकतंत्र की आधारशिला है और चुनाव आयोग इसका 'संरक्षक है, स्वामी नहीं।'

प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल

राष्ट्रपति से मिलने वाले शिष्टमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सांसद सुप्रिया सुले, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी – मार्क्सवादी (CPI-M) नेता एमए बेबी, राजद सांसद मनोज कुमार झा, भाकपा महासचिव डी. राजा, समाजवादी पार्टी के नेता राजीव राय और वीसीके प्रमुख थिरुमावलवन थोलकाप्पियन सहित कई प्रमुख नेता शामिल थे।

संवैधानिक और राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में चुनाव परिणामों को लेकर विपक्षी दलों में असंतोष उभर रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े विपक्षी गठबंधन ने ईवीएम और मतदाता सूची को लेकर राष्ट्रपति का दरवाज़ा खटखटाया हो, लेकिन इंडिया ब्लॉक का यह प्रतिनिधिमंडल इस मायने में उल्लेखनीय है कि इसमें एक राज्य के मुख्यमंत्री और एकाधिक राष्ट्रीय दलों के प्रमुख एक साथ उपस्थित थे।

आगे क्या

विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति से अपील की कि वह संविधान की संरक्षक के रूप में इस मामले पर संज्ञान लें और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएँ। फिलहाल राष्ट्रपति भवन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है; इस ज्ञापन पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताता है कि यह ज्ञापन कानूनी जीत की उम्मीद से कम और 2027 के चुनावी मौसम से पहले जनता को गोलबंद करने की कोशिश अधिक है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया ब्लॉक ने राष्ट्रपति को ज्ञापन क्यों सौंपा?
इंडिया गठबंधन ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, ईवीएम में हेरफेर के आरोपों और मतदाता सूची से 13.30 करोड़ नाम हटाए जाने की शिकायत लेकर 9 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। गठबंधन ने राष्ट्रपति से संविधान की संरक्षक के रूप में संज्ञान लेने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का आग्रह किया।
इंडिया गठबंधन की चार प्रमुख माँगें क्या हैं?
चार माँगें हैं — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा; 2023 के उस कानून को वापस लेना जो CEC और चुनाव आयुक्तों को आजीवन कानूनी संरक्षण देता है; SIR अभियान रोकना और 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करना; तथा सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराना और पिछले दो वर्षों के 'विवादित' विधानसभा चुनाव निरस्त करना।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के क्या आरोप हैं?
विपक्ष ने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से समझौता हुआ है। उनके इस्तीफे की माँग को 2023 के उस कानून को वापस लेने की माँग से जोड़ा गया है, जो CEC को आजीवन कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटने का विवाद क्या है?
इंडिया गठबंधन का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत कथित तौर पर 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, जिससे उनके संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मतदान के अधिकार का हनन हुआ। गठबंधन ने इन नामों को तत्काल बहाल करने और SIR अभियान रोकने की माँग की है।
इस ज्ञापन के बाद आगे क्या होगा?
राष्ट्रपति भवन की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। संवैधानिक रूप से राष्ट्रपति इस ज्ञापन पर संज्ञान लेने या न लेने के विवेकाधिकार रखती हैं। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया इस राजनीतिक विवाद की दिशा तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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