कच्चे तेल की कीमतें ₹78 डॉलर पार, भारतीय अर्थव्यवस्था सक्षम — WTC चेयरमैन विजय कलंत्री
सारांश
मुख्य बातें
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC) के चेयरमैन विजय कलंत्री ने 9 जुलाई 2026 को कहा कि पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के 78 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था इस दबाव को झेलने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
वैश्विक तनाव की पृष्ठभूमि
कलंत्री ने बताया कि अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेज़ी से बढ़ा है, जिसकी प्रतिक्रिया वैश्विक बाज़ारों में भी दिखाई दे रही है। कच्चे तेल की कीमतें 78 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गई हैं और भारतीय रुपए पर भी दबाव बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि इस अनिश्चित माहौल का सीधा असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा है, जिसके चलते शेयर बाज़ारों में कमज़ोरी दर्ज की गई है। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के ज़रिए पूरा करता है, जिससे तेल की ऊँची कीमतें सीधे आयात बिल और महंगाई दोनों को प्रभावित करती हैं।
भारत की आर्थिक मज़बूती
विजय कलंत्री ने कहा, "कच्चे तेल की ऊँची कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव आ सकता है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के ज़रिए पूरा करता है।"
हालाँकि उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए भरोसा जताया कि भारत इस चुनौती से पार पाने में सक्षम है। उन्होंने कहा, "भारत पहले भी ऐसे दौर का सफलतापूर्वक सामना कर चुका है, जब कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुँच गई थीं। हमारी अर्थव्यवस्था ने पहले भी कई वैश्विक संकटों के दौरान मज़बूती दिखाई है और मौजूदा परिस्थितियों से निपटने में भी सक्षम है।"
आगे की दिशा
कलंत्री के अनुसार पश्चिम एशिया की स्थिति अभी भी लगातार बदल रही है और आने वाले घटनाक्रम अमेरिका, ईरान और अन्य वैश्विक पक्षों के अगले कदमों पर निर्भर करेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे में भारत को घबराने के बजाय अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "स्थिति लगातार बदल रही है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम पर करीबी नज़र रखने की ज़रूरत है। लेकिन भारत पहले भी ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुका है और मुझे विश्वास है कि देश मौजूदा अनिश्चितताओं से भी मज़बूती के साथ निपटेगा।"
विशेषज्ञ का आकलन
WTC चेयरमैन ने अपनी बात दोहराते हुए कहा, "घबराने की ज़रूरत नहीं है। फिलहाल वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता ज़रूर है, लेकिन भारत पहले भी ऊँची तेल कीमतों के दौर से सफलतापूर्वक निकल चुका है।" आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) महंगाई और रुपए के दबाव को नियंत्रित करने के लिए क्या नीतिगत कदम उठाते हैं।