ऐतिहासिक एफटीए: भारत-न्यूजीलैंड 27 अप्रैल को करेंगे मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर
सारांश
Key Takeaways
- भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर 27 अप्रैल 2025 को हस्ताक्षर होंगे।
- न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इसकी आधिकारिक पुष्टि की।
- समझौते से न्यूजीलैंड के वाटर जेट इंजन पर लगने वाला 8.25 प्रतिशत टैरिफ भारत को निर्यात पर कम होगा।
- व्यापार मंत्री टोड मैक्ले ने इसे "एक पीढ़ी में एक बार आने वाला मौका" बताया और कहा कि लीगल वेरिफिकेशन पूर्ण हो चुका है।
- इस डील से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को 1.4 अरब की आबादी वाले भारतीय बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी।
- हस्ताक्षर के बाद न्यूजीलैंड में औपचारिक संसदीय संधि समीक्षा शुरू होगी।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत और न्यूजीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब केवल तीन दिन दूर है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि 27 अप्रैल 2025 को दोनों देश इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
प्रधानमंत्री लक्सन की घोषणा और वीडियो संदेश
क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर लिखा, "हम सोमवार को भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करेंगे।" इसके साथ ही उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने न्यूजीलैंड के उद्योग जगत के लिए इस डील के महत्व को विस्तार से समझाया।
वीडियो में लक्सन क्राइस्टचर्च स्थित हैमिल्टन जेट के विनिर्माण संयंत्र में नजर आए। यह कंपनी 70 से अधिक देशों में नौकाओं (बोट) में उपयोग होने वाले जेट इंजन का निर्यात करती है। उन्होंने बताया कि इस एफटीए के लागू होने के बाद वाटर जेट पर लगने वाला 8.25 प्रतिशत का टैरिफ भारत को होने वाले निर्यात पर समाप्त या कम होगा, जिससे कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और उच्च-कौशल रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
कानूनी सत्यापन पूर्ण, दोनों देशों के व्यापारिक प्रतिनिधि रहेंगे मौजूद
इस सप्ताह की शुरुआत में न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टोड मैक्ले ने जानकारी दी थी कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए का लीगल वेरिफिकेशन (कानूनी सत्यापन) प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 27 अप्रैल को होने वाले हस्ताक्षर समारोह में दोनों देशों के व्यापार जगत से जुड़े बड़ी संख्या में प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
मैक्ले ने इस अवसर को "एक पीढ़ी में केवल एक बार आने वाला मौका" करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे न्यूजीलैंड के निर्यातकों को 1.4 अरब की आबादी वाले विशाल भारतीय बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी — एक ऐसी अर्थव्यवस्था, जो शीघ्र ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच क्यों अहम है यह समझौता
मंत्री मैक्ले ने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा वैश्विक व्यापारिक अस्थिरता के माहौल में — जहां अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और टैरिफ युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया है — भारत के साथ यह मुक्त व्यापार समझौता न्यूजीलैंड की आर्थिक समृद्धि के लिए पहले से कहीं अधिक रणनीतिक महत्व रखता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एफटीए पर हस्ताक्षर होते ही न्यूजीलैंड में औपचारिक संसदीय संधि समीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जिससे आम जनता और संसद सदस्य इस समझौते की बारीकियों की पूरी तरह जांच कर सकेंगे।
भारत के लिए क्या मायने रखता है यह एफटीए
भारत के नजरिए से यह समझौता कई क्षेत्रों में लाभकारी हो सकता है। डेयरी उत्पाद, कृषि, मांस और वाइन जैसे न्यूजीलैंड के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर भारत की संवेदनशीलता को देखते हुए, समझौते की शर्तें भारतीय किसानों और उद्योगों के हितों की रक्षा करते हुए तैयार की गई हैं। दूसरी ओर, भारतीय आईटी सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता वर्षों से चल रही थी। यह समझौता उस दिशा में एक निर्णायक कदम है जब भारत अपनी 'मेक इन इंडिया' और वैश्विक व्यापार विविधीकरण नीति को गति दे रहा है।
आगे क्या होगा
27 अप्रैल 2025 को हस्ताक्षर के बाद दोनों देशों में घरेलू अनुसमर्थन (ratification) की प्रक्रिया शुरू होगी। न्यूजीलैंड में संसदीय समीक्षा के बाद यह समझौता लागू होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एफटीए भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत की व्यापारिक उपस्थिति को और मजबूत करेगा और दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह को नई दिशा देगा।