3 नवंबर 2026
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भारत की नई आतंकवाद विरोधी रणनीति 'प्रहार': हमले से पहले ही साजिश नाकाम करने पर जोर

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भारत की नई आतंकवाद विरोधी रणनीति 'प्रहार': हमले से पहले ही साजिश नाकाम करने पर जोर

सारांश

भारत ने आतंकवाद से लड़ने का तरीका बदल दिया है — 'प्रहार' रणनीति के तहत अब हमले का इंतजार नहीं किया जाता। जम्मू कश्मीर से गुजरात और आंध्र प्रदेश तक, सुरक्षा एजेंसियाँ खुफिया सूचनाओं पर तुरंत कार्रवाई कर मॉड्यूल खत्म कर रही हैं — और ISI की घुसपैठ की कोशिशें नाकाम हो रही हैं।

मुख्य बातें

भारत ने फरवरी 2026 में राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी रणनीति 'प्रहार' लागू की, जो घटना के बाद प्रतिक्रिया की बजाय पूर्व सक्रिय कार्रवाई पर आधारित है।
जम्मू कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने कई आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया और ISI के ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को सक्रिय होने से रोका।
गुजरात में जैश ए मोहम्मद से जुड़े एक स्व निर्मित मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ, जिससे बड़ी मात्रा में चरमपंथी सामग्री बरामद की गई।
कट्टरपंथी मॉड्यूल महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और केरल में सक्रिय पाए गए।
हरकत उल जिहादी इस्लामी और जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश की पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर को निशाना बनाने की कई कोशिशें नाकाम की गईं।
IB , राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल 'प्रहार' की मुख्य विशेषता बताई गई है।

भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक निर्णायक बदलाव आया है — अब सुरक्षा एजेंसियाँ किसी आतंकी हमले के बाद प्रतिक्रिया देने की बजाय खुफिया सूचनाओं के आधार पर पहले ही आतंकी मॉड्यूल की पहचान कर उन्हें नष्ट करने की नीति पर काम कर रही हैं। नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा अपनाई गई जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत इसी वर्ष फरवरी में राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी रणनीति 'प्रहार' को लागू किया गया, जो अब असर दिखाने लगी है।

क्या है 'प्रहार' रणनीति

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी घटना के घटित होने का इंतजार न करें। अधिकारी ने कहा, "ध्यान आतंकी हमलों को रोकने और यह सुनिश्चित करने पर है कि आतंकी मॉड्यूल इतने बड़े न हो जाएँ कि बाद में उन्हें काबू में करना बेहद मुश्किल हो जाए।" 'प्रहार' रणनीति के तहत खुफिया एजेंसियों, राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

जम्मू कश्मीर में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की साजिशें नाकाम

इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक अधिकारी के अनुसार, यह रणनीति पूरे देश में अपनाई जा रही है, खासकर जम्मू कश्मीर में। अधिकारी के मुताबिक, इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) कश्मीर घाटी में बड़े हमलों की साजिश रचने की कोशिश कर रही है और पिछले कई महीनों में उसने अपने ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को सक्रिय करने के साथ साथ घुसपैठ की भी कोशिश की है। हालाँकि, नई रणनीति के कारण उसे बहुत कम सफलता मिली है।

IB अधिकारी ने कहा, "पिछले कुछ महीनों में जम्मू कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवादियों को मार गिराया है, कई मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है और ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को सक्रिय होने से रोका है। एजेंसियों ने सुनिश्चित किया है कि आतंकी हमलों की साजिश रचना और उन्हें अंजाम देना अब ISI की उम्मीद की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल हो गया है।"

देशभर में कट्टरपंथी मॉड्यूल का भंडाफोड़

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आतंकी हमले समस्या का एक हिस्सा हैं, जबकि देश के सामने इससे भी बड़ी चुनौती कट्टरपंथ है। अधिकारी के अनुसार, आपस में जुड़े न होने के बावजूद कट्टरपंथ से जुड़े मॉड्यूल महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में सक्रिय रहे हैं।

विशेष रूप से इस्लामिक स्टेट ने कट्टरपंथ फैलाने पर ध्यान केंद्रित किया है और युवाओं की सोच को प्रभावित करने में कुछ हद तक सफलता पाई है। आंध्र प्रदेश में देशभर से जुड़े एक कट्टरपंथी मॉड्यूल का भंडाफोड़ इस बात का उदाहरण है कि सुरक्षा एजेंसियाँ अब ऐसे मामलों से किस तरह निपट रही हैं — यह मॉड्यूल एक बड़ी समस्या बनने की ओर बढ़ रहा था, लेकिन समय रहते इसे खत्म कर दिया गया।

इसी तरह की कार्रवाई गुजरात में भी हुई, जहाँ जैश ए मोहम्मद से जुड़े एक स्व निर्मित मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया। इस मॉड्यूल से बड़ी मात्रा में चरमपंथी सामग्री भी बरामद हुई।

बांग्लादेश से उत्पन्न खतरों पर नकेल

अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश की ओर से होने वाली आतंकवाद और कट्टरपंथ से जुड़ी गतिविधियों से निपटने में भी यही पूर्व सक्रिय रणनीति अपनाई गई है। हरकत उल जिहादी इस्लामी और जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश की कई कोशिशों को नाकाम किया गया है, जो पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे।

आगे की राह

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियाँ अब आतंकी मॉड्यूल के बड़े होने का इंतजार नहीं करती हैं। अधिकारियों के अनुसार, "अगर खुफिया जानकारी कार्रवाई करने लायक है तो एजेंसियाँ तुरंत मॉड्यूल को खत्म करने और उसे आगे बढ़ने से रोकने के लिए कदम उठाती हैं।" यह ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी देशों से उत्पन्न होने वाले खतरों की प्रकृति लगातार बदल रही है और देश के भीतर कट्टरपंथ का विस्तार एक दीर्घकालिक सुरक्षा चुनौती बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

गौरतलब है कि अधिकांश दावे अज्ञात अधिकारियों के हैं और स्वतंत्र सत्यापन की गुंजाइश सीमित है। कट्टरपंथ की समस्या को आठ राज्यों तक फैले 'असंबद्ध मॉड्यूल' के रूप में स्वीकार करना इस बात का संकेत है कि खतरे की गहराई पहले की स्वीकृति से कहीं अधिक है। असली परीक्षा यह है कि 'पूर्व सक्रिय' कार्रवाई के दावे कितने टिकाऊ हैं, जब संसदीय निगरानी और सार्वजनिक जवाबदेही की व्यवस्था अभी भी कमज़ोर बनी हुई है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की 'प्रहार' आतंकवाद विरोधी रणनीति क्या है?
'प्रहार' एक राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी रणनीति है जिसे इसी वर्ष फरवरी 2026 में लागू किया गया। इसका मूल उद्देश्य किसी हमले के बाद प्रतिक्रिया देने की बजाय खुफिया सूचनाओं के आधार पर पहले ही आतंकी मॉड्यूल की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय करना है। इसमें IB, राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया गया है।
जम्मू कश्मीर में नई रणनीति का क्या असर पड़ा है?
IB अधिकारियों के अनुसार, नई रणनीति के कारण ISI को घाटी में घुसपैठ कराने और ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को सक्रिय करने में बहुत कम सफलता मिली है। सुरक्षा एजेंसियों ने कई आतंकवादियों को मार गिराया है और एकाधिक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है।
भारत के किन किन राज्यों में कट्टरपंथी मॉड्यूल सक्रिय पाए गए?
अधिकारियों के अनुसार महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और केरल में कट्टरपंथ से जुड़े मॉड्यूल सक्रिय रहे हैं। ये मॉड्यूल आपस में जुड़े नहीं हैं, लेकिन इनका एक साथ विस्तार भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है।
गुजरात में जैश ए मोहम्मद से जुड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ कैसे हुआ?
गुजरात में सुरक्षा एजेंसियों ने जैश ए मोहम्मद के विचारों का समर्थन करने वाले एक स्व निर्मित मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। भंडाफोड़ के बाद बड़ी मात्रा में चरमपंथी सामग्री बरामद की गई। यह मॉड्यूल एक गंभीर खतरा बनने की ओर बढ़ रहा था, लेकिन समय रहते इसे खत्म कर दिया गया।
बांग्लादेश से उत्पन्न आतंकी खतरों से कैसे निपटा जा रहा है?
अधिकारियों के अनुसार, हरकत उल जिहादी इस्लामी और जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश की पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों को निशाना बनाने की कई कोशिशों को नाकाम किया गया है। इन मामलों में भी 'प्रहार' की पूर्व सक्रिय रणनीति ही अपनाई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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