भारत-रूस सैन्य-तकनीकी सहयोग की 24वीं कार्य समूह बैठक नई दिल्ली में, संयुक्त उत्पादन पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
भारत और रूस के बीच रक्षा साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के सैन्य-तकनीकी सहयोग एवं रक्षा उद्योग से जुड़े 24वें कार्य समूह की बैठक आयोजित हुई। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौजूदा सैन्य-तकनीकी सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन तथा विकास की नई संभावनाओं पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया।
बैठक की अध्यक्षता और भागीदारी
बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और रूस की ओर से सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए संघीय सेवा के प्रथम उप निदेशक आंद्रेई ए. बोयत्सोव ने की। उद्घाटन सत्र में दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। गौरतलब है कि इससे पहले 29 अक्टूबर 2025 को संजीव कुमार के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मॉस्को में इसी कार्य समूह की 23वीं बैठक में भाग लिया था।
मुख्य एजेंडा और चर्चा के विषय
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत और रूस के बीच चल रहे सैन्य-तकनीकी सहयोग की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास की नई पहलों पर विशेष जोर दिया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और सुदृढ़ करना तथा सहयोग के नए क्षेत्रों को आगे बढ़ाना बताया गया है।
रणनीतिक पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग पिछले कई दशकों से रणनीतिक साझेदारी की आधारशिला रहा है। यह संबंध केवल रक्षा उपकरणों की खरीद तक सीमित न रहकर संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी विकास और भारत में रक्षा प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन तक विस्तारित हो चुका है। दोनों देशों के बीच 2021 से 2031 की अवधि के लिए सैन्य-तकनीकी सहयोग का एक दीर्घकालिक समझौता भी लागू है, जिसके अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान, विकास, उत्पादन और रक्षा उपकरणों के रखरखाव से जुड़े सहयोग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
यह बैठक ऐसे समय में आई है जब भारत अपनी 'आत्मनिर्भर भारत' नीति के तहत रक्षा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर दे रहा है और रूस परंपरागत रूप से भारत के सबसे बड़े रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में से एक रहा है।
प्रमुख संयुक्त रक्षा कार्यक्रम
भारत-रूस रक्षा सहयोग के उल्लेखनीय उदाहरणों में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान, टी-90 टैंक और एके-203 राइफल जैसे कार्यक्रम शामिल हैं, जो या तो संयुक्त रूप से विकसित किए गए हैं या भारत में उत्पादित हो रहे हैं। ये कार्यक्रम 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्थानीय विनिर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जाते हैं।
आगे की राह
24वीं बैठक की मेजबानी नई दिल्ली में होने के साथ, दोनों देशों ने सैन्य-तकनीकी सहयोग को नई ऊँचाई देने और रक्षा उद्योग में साझा विकास व उत्पादन की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। अगली बैठक का स्थान और तिथि अभी घोषित नहीं हुई है, परंतु दोनों पक्षों के बीच नियमित संवाद की परंपरा के अनुसार यह क्रम जारी रहने की उम्मीद है।