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भारत-रूस 'लैंड सिस्टम सब ग्रुप' की पाँचवीं बैठक नई दिल्ली में, संयुक्त रक्षा उत्पादन पर जोर

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भारत-रूस 'लैंड सिस्टम सब ग्रुप' की पाँचवीं बैठक नई दिल्ली में, संयुक्त रक्षा उत्पादन पर जोर

सारांश

नई दिल्ली में भारत-रूस आर्मी लैंड सिस्टम सब ग्रुप की पाँचवीं बैठक 4 से 7 अगस्त 2026 तक चल रही है। उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह और मेजर जनरल अलेक्जेंडर तुफेकची के नेतृत्व में दोनों देश संयुक्त रक्षा उत्पादन और नई सैन्य तकनीकों पर सहमति बना रहे हैं।

मुख्य बातें

भारत-रूस आर्मी लैंड सिस्टम सब ग्रुप मीटिंग का पाँचवाँ संस्करण 4 से 7 अगस्त 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर.
सिंह और रूसी पक्ष का नेतृत्व मेजर जनरल अलेक्जेंडर तुफेकची कर रहे हैं।
बैठक में संयुक्त रक्षा उत्पादन, नई सैन्य तकनीकों में सहयोग और औद्योगिक साझेदारी पर विशेष ज़ोर दिया गया।
इसी वर्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में SCO बैठक के दौरान रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव से मुलाकात की थी।
भारतीय सशस्त्र बलों में लड़ाकू विमान, पनडुब्बियाँ और मिसाइल प्रणालियाँ सहित कई प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म रूसी मूल के हैं।

भारत और रूस के बीच आर्मी लैंड सिस्टम सब ग्रुप मीटिंग का पाँचवाँ संस्करण 4 अगस्त 2026 से नई दिल्ली में शुरू हुआ, जो 7 अगस्त तक जारी रहेगा। दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी इस मंच पर भविष्य के रक्षा सहयोग, सैन्य आधुनिकीकरण और संयुक्त औद्योगिक साझेदारी पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। यह बैठक भारत-रूस सैन्य एवं सैन्य-तकनीकी सहयोग तंत्र के अंतर्गत आयोजित की जा रही है।

प्रतिनिधिमंडल और नेतृत्व

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह कर रहे हैं। रूसी पक्ष की अगुवाई रूसी रक्षा मंत्रालय के मुख्य बख्तरबंद निदेशालय के उप प्रमुख मेजर जनरल अलेक्जेंडर तुफेकची कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच रक्षा संबंधों को और सुदृढ़ करने का संकल्प दोहराया गया तथा नई सैन्य तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

मुख्य एजेंडा और चर्चा के बिंदु

बैठक में रक्षा उत्पादन बढ़ाने, संयुक्त विकास परियोजनाओं को गति देने और औद्योगिक सहयोग को विस्तार देने पर केंद्रित चर्चा हुई। भारतीय सेना ने बताया कि यह मंच दोनों देशों के बीच रक्षा परियोजनाओं और सैन्य आधुनिकीकरण से जुड़े मुद्दों पर नियमित संवाद का माध्यम है। विशेष रूप से भारत में ही संयुक्त रूप से रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया गया, जो 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

राजनाथ-बेलौसोव मुलाकात की पृष्ठभूमि

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब इसी वर्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव से मुलाकात की थी। राजनाथ सिंह ने उस बातचीत को 'बेहतरीन और सार्थक' बताया था। नई दिल्ली की मौजूदा बैठक उसी उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवाद की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है।

दशकों पुरानी रक्षा साझेदारी

भारत और रूस दशकों से रक्षा क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार रहे हैं। भारतीय सशस्त्र बलों में उपयोग होने वाले अनेक प्रमुख सैन्य प्लेटफॉर्म — जिनमें लड़ाकू विमान, पनडुब्बियाँ और मिसाइल प्रणालियाँ शामिल हैं — रूसी मूल के हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियाँ तेज़ी से बदल रही हैं और भारत अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने के साथ-साथ घरेलू उत्पादन क्षमता भी मज़बूत करना चाहता है।

आगे की राह

दोनों देश रक्षा उत्पादन में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमत हैं। भारत में संयुक्त निर्माण को प्रोत्साहन देने की दिशा में इस बैठक के नतीजे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। 7 अगस्त को वार्ता के समापन के बाद संयुक्त वक्तव्य जारी होने की संभावना है, जो दोनों देशों के बीच अगले चरण की रक्षा परियोजनाओं की रूपरेखा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है — यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने मॉस्को के साथ रक्षा संवाद की लय बनाए रखी है, जो उसकी 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति का व्यावहारिक प्रमाण है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि रूसी उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता — विशेषकर स्पेयर पार्ट्स और रखरखाव के लिए — एक दीर्घकालिक भेद्यता बनी हुई है जिसे 'आत्मनिर्भर भारत' अभी पूरी तरह दूर नहीं कर पाया है। संयुक्त निर्माण पर जोर सही दिशा है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि कितने समझौते वास्तविक उत्पादन में तब्दील होते हैं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-रूस लैंड सिस्टम सब ग्रुप मीटिंग क्या है?
यह भारत-रूस सैन्य एवं सैन्य-तकनीकी सहयोग तंत्र के अंतर्गत आयोजित एक नियमित द्विपक्षीय बैठक है, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी थल सेना के उपकरणों, रक्षा परियोजनाओं और आधुनिकीकरण पर चर्चा करते हैं। नई दिल्ली में हो रही यह इस व्यवस्था की पाँचवीं बैठक है।
इस बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हो रही है?
बैठक में संयुक्त रक्षा उत्पादन, नई सैन्य तकनीकों में सहयोग, औद्योगिक साझेदारी और भारत में ही रक्षा उपकरणों के संयुक्त निर्माण को बढ़ावा देने पर मुख्य रूप से विचार-विमर्श हो रहा है।
इस बैठक का नेतृत्व कौन कर रहा है?
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह कर रहे हैं, जबकि रूसी पक्ष की अगुवाई रूसी रक्षा मंत्रालय के मुख्य बख्तरबंद निदेशालय के उप प्रमुख मेजर जनरल अलेक्जेंडर तुफेकची कर रहे हैं।
राजनाथ सिंह और रूसी रक्षा मंत्री की मुलाकात कब और कहाँ हुई थी?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव की मुलाकात इसी वर्ष किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई थी। राजनाथ सिंह ने उस बातचीत को 'बेहतरीन और सार्थक' बताया था।
भारत की रक्षा क्षमता में रूस की क्या भूमिका है?
भारतीय सशस्त्र बलों में उपयोग होने वाले कई प्रमुख सैन्य प्लेटफॉर्म — जिनमें लड़ाकू विमान, पनडुब्बियाँ और मिसाइल प्रणालियाँ शामिल हैं — रूसी मूल के हैं। दोनों देश दशकों से रक्षा क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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