UNSC में भारत की दो टूक: खाड़ी संघर्ष का हल बातचीत और कूटनीति से, पी. हरीश ने गिनाई दाँव पर लगी हिस्सेदारियाँ
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 16 अक्टूबर 2026 को मध्य पूर्व की स्थिति पर आयोजित तिमाही खुली बहस के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष को तत्काल रोका जाए और इसका स्थायी समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के रास्ते निकाला जाए। हरीश ने रेखांकित किया कि बढ़ता तनाव एक करोड़ प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, भारत की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार — तीनों को एक साथ खतरे में डाल रहा है।
भारत की आर्थिक हिस्सेदारी कितनी बड़ी है
हरीश ने परिषद के सामने ठोस आँकड़े रखते हुए बताया कि केवल गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के छह देशों के साथ भारत का सालाना द्विपक्षीय व्यापार लगभग 180 अरब डॉलर है। इन्हीं देशों से 31 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है और वहाँ से भारत भेजी जाने वाली वार्षिक रेमिटेंस 52 अरब डॉलर से अधिक है।
उन्होंने कहा, "मध्य पूर्व की सुरक्षा, स्थिरता और शांति में भारत की बहुत बड़ी हिस्सेदारी है। इस क्षेत्र के साथ हमारे राजनीतिक, आर्थिक, निवेश, ऊर्जा और लोगों के आपसी संबंध बेहद मजबूत हैं।" गौरतलब है कि यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा ज़रूरतों का भी बड़ा स्रोत है, जिससे किसी भी अस्थिरता का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है।
भारतीय जहाजों पर हमले: गंभीर चिंता
हरीश ने इस सप्ताह भारतीय ध्वज वाले जहाज एमवी डीपी वर्ल्ड कावेरी पर हुए हमले का जिक्र किया। इसके अलावा हाल के सप्ताहों में एमटी पेट्रो डॉल्फिन, एमटी वाल्थेरा, एमटी ऑन पीस और एमटी काज़िमाह III जैसे जहाजों पर हुए हमलों का भी उल्लेख किया, जिन पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत हैं।
उन्होंने साफ कहा कि व्यावसायिक जहाजों और नाविकों पर होने वाले सभी हमले कानूनी और नैतिक रूप से अस्वीकार्य हैं। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री व्यापार का निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय नाविकों की सुरक्षा में सहयोग के लिए ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का आभार भी व्यक्त किया।
सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क का प्रस्ताव
हरीश ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क (SESN) बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह नेटवर्क विभिन्न देशों की समुद्री एजेंसियों और दूतावासों को आपस में जोड़ेगा, जिससे आपातकालीन संदेश भेजने, चिकित्सा सहायता, परिवारों से संपर्क और जरूरत पड़ने पर निकासी में सहायता मिल सकेगी।
इसके साथ ही भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त रूप से संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स' की स्थापना की है, जिसमें 23 देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य समुद्री हमलों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समन्वय को मज़बूत बनाना और नाविकों के अधिकारों की रक्षा करना है।
फिलिस्तीन पर भारत का रुख और सहायता
हरीश ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जारी संकट के बीच फिलिस्तीनी जनता की गंभीर स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। भारत दो राष्ट्र समाधान (Two State Solution) का समर्थन करता है, जिसमें इज़रायल और फिलिस्तीन दोनों स्वतंत्र देशों के रूप में शांतिपूर्वक सहअस्तित्व में रहें।
उन्होंने बताया कि भारत फिलिस्तीनी जनता की सहायता के लिए अस्पताल निर्माण, शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और छात्रवृत्ति कार्यक्रम जैसी परियोजनाएँ चला रहा है और अब तक 5.2 करोड़ डॉलर का योगदान दे चुका है। भारत UNRWA (फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी) के प्रमुख योगदानकर्ताओं में शामिल हो रहा है।
आगे की राह
भारत का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव नए उच्च स्तर पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय कूटनीतिक समाधान की राह तलाश रहा है। SESN जैसी पहल और 23 देशों का नया समूह यह संकेत देते हैं कि भारत अब केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि संस्थागत ढाँचे बनाकर समुद्री सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।