यूएनएससी में भारत का दो-राष्ट्र समाधान पर जोर, पी. हरीश ने अरबी में दिया ऐतिहासिक संबोधन
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 29 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की मध्य पूर्व पर खुली बहस में फिलिस्तीनी लोगों के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और एक संप्रभु, स्वतंत्र व व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के लिए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया। उल्लेखनीय यह रहा कि हरीश ने अपना संबोधन अंग्रेजी के बजाय अरबी भाषा में दिया — जो सुरक्षा परिषद में किसी भारतीय राजनयिक द्वारा अरबी में संबोधन का कथित तौर पर पहला अवसर है।
अरबी में संबोधन — एक कूटनीतिक संकेत
हरीश ने सुरक्षा परिषद में अरबी में कहा, "होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया का ध्यान और हमारा ध्यान गाजा पट्टी में गंभीर मानवीय संकट से नहीं भटकाना चाहिए।" जैसे ही उन्होंने अरबी में बोलना शुरू किया, संयुक्त राष्ट्र के दुभाषियों ने उनके वक्तव्य का अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पेनिश, रूसी और चीनी सहित अन्य आधिकारिक भाषाओं में तत्काल अनुवाद किया। काहिरा स्थित अमेरिकन यूनिवर्सिटी से अरबी का अध्ययन कर चुके हरीश पहले गाजा में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय में भी तैनात रह चुके हैं — यह पृष्ठभूमि उनके संबोधन को विशेष कूटनीतिक वज़न देती है।
मानवीय संकट पर भारत की चिंता
हरीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "आम लोगों की जान जाना और आम लोगों के इंफ्रास्ट्रक्चर का नष्ट होना ऐसी बड़ी चिंताएँ हैं, जिन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत, बहुत जल्दी और गंभीरता से काम करना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि "भारत उन प्रयासों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जो फिलिस्तीनी लोगों के दैनिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।" यह ऐसे समय में आया है जब गाजा में मानवीय स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।
भारत की वित्तीय और विकास सहायता
हरीश ने बताया कि भारत ने फिलिस्तीन को विकास परियोजनाओं, मानवीय सहायता, फिलिस्तीनी इंस्टिट्यूट ऑफ डिप्लोमेसी के निर्माण और यूएनआरडब्ल्यूए में योगदान को मिलाकर अब तक लगभग 17.5 करोड़ डॉलर की सहायता प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, ब्रसेल्स में आयोजित फिलिस्तीन डोनर ग्रुप की बैठक में भारत ने एक स्पेशलिटी हॉस्पिटल, एक आर्टिफिशियल लिंब फिटमेंट सेंटर और एक वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाने का वचन दिया।
राजनीतिक समाधान पर भारत का रुख
हरीश ने दो-टूक कहा, "भारत का मानना है कि सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजराइल के साथ शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व रखने वाला एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र ही इस लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का स्थायी समाधान है।" गौरतलब है कि भारत दशकों से दो-राष्ट्र समाधान का समर्थक रहा है, और यह संबोधन उस नीतिगत निरंतरता की पुष्टि करता है। मानवीय राहत और राजनीतिक समाधान — दोनों को एक साथ आगे बढ़ाने की भारत की यह दोहरी रणनीति आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उसकी भूमिका को और स्पष्ट करेगी।