29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूएनएससी में भारत का दो-राष्ट्र समाधान पर जोर, पी. हरीश ने अरबी में दिया ऐतिहासिक संबोधन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूएनएससी में भारत का दो-राष्ट्र समाधान पर जोर, पी. हरीश ने अरबी में दिया ऐतिहासिक संबोधन

सारांश

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने यूएनएससी में अरबी में संबोधन देकर कूटनीतिक संकेत दिया — और गाजा संकट पर भारत की दो-राष्ट्र समाधान की प्रतिबद्धता तथा 17.5 करोड़ डॉलर की सहायता को दोहराया। सुरक्षा परिषद में किसी भारतीय राजनयिक का यह कथित तौर पर पहला अरबी संबोधन है।

मुख्य बातें

हरीश ने 29 जुलाई को यूएनएससी की मध्य पूर्व बहस में अरबी भाषा में संबोधन दिया — सुरक्षा परिषद में किसी भारतीय राजनयिक का कथित तौर पर यह पहला अरबी संबोधन।
भारत ने फिलिस्तीन को विकास, मानवीय सहायता और यूएनआरडब्ल्यूए योगदान सहित कुल लगभग 17.5 करोड़ डॉलर की सहायता दी है।
ब्रसेल्स डोनर बैठक में भारत ने स्पेशलिटी हॉस्पिटल , आर्टिफिशियल लिंब फिटमेंट सेंटर और वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाने का वादा किया।
भारत ने दो-राष्ट्र समाधान — इजराइल के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में एक संप्रभु फिलिस्तीनी राष्ट्र — को संघर्ष का स्थायी हल बताया।
हरीश ने होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को गाजा के मानवीय संकट से ध्यान न भटकाने की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 29 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की मध्य पूर्व पर खुली बहस में फिलिस्तीनी लोगों के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और एक संप्रभु, स्वतंत्र व व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के लिए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया। उल्लेखनीय यह रहा कि हरीश ने अपना संबोधन अंग्रेजी के बजाय अरबी भाषा में दिया — जो सुरक्षा परिषद में किसी भारतीय राजनयिक द्वारा अरबी में संबोधन का कथित तौर पर पहला अवसर है।

अरबी में संबोधन — एक कूटनीतिक संकेत

हरीश ने सुरक्षा परिषद में अरबी में कहा, "होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया का ध्यान और हमारा ध्यान गाजा पट्टी में गंभीर मानवीय संकट से नहीं भटकाना चाहिए।" जैसे ही उन्होंने अरबी में बोलना शुरू किया, संयुक्त राष्ट्र के दुभाषियों ने उनके वक्तव्य का अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पेनिश, रूसी और चीनी सहित अन्य आधिकारिक भाषाओं में तत्काल अनुवाद किया। काहिरा स्थित अमेरिकन यूनिवर्सिटी से अरबी का अध्ययन कर चुके हरीश पहले गाजा में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय में भी तैनात रह चुके हैं — यह पृष्ठभूमि उनके संबोधन को विशेष कूटनीतिक वज़न देती है।

मानवीय संकट पर भारत की चिंता

हरीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "आम लोगों की जान जाना और आम लोगों के इंफ्रास्ट्रक्चर का नष्ट होना ऐसी बड़ी चिंताएँ हैं, जिन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत, बहुत जल्दी और गंभीरता से काम करना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि "भारत उन प्रयासों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जो फिलिस्तीनी लोगों के दैनिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।" यह ऐसे समय में आया है जब गाजा में मानवीय स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।

भारत की वित्तीय और विकास सहायता

हरीश ने बताया कि भारत ने फिलिस्तीन को विकास परियोजनाओं, मानवीय सहायता, फिलिस्तीनी इंस्टिट्यूट ऑफ डिप्लोमेसी के निर्माण और यूएनआरडब्ल्यूए में योगदान को मिलाकर अब तक लगभग 17.5 करोड़ डॉलर की सहायता प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, ब्रसेल्स में आयोजित फिलिस्तीन डोनर ग्रुप की बैठक में भारत ने एक स्पेशलिटी हॉस्पिटल, एक आर्टिफिशियल लिंब फिटमेंट सेंटर और एक वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाने का वचन दिया।

राजनीतिक समाधान पर भारत का रुख

हरीश ने दो-टूक कहा, "भारत का मानना है कि सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजराइल के साथ शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व रखने वाला एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र ही इस लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का स्थायी समाधान है।" गौरतलब है कि भारत दशकों से दो-राष्ट्र समाधान का समर्थक रहा है, और यह संबोधन उस नीतिगत निरंतरता की पुष्टि करता है। मानवीय राहत और राजनीतिक समाधान — दोनों को एक साथ आगे बढ़ाने की भारत की यह दोहरी रणनीति आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में उसकी भूमिका को और स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो भारत की 'बहु-संरेखण' नीति को रेखांकित करता है। भारत एक ओर इजराइल के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग बनाए रखता है, दूसरी ओर फिलिस्तीन के प्रति ऐतिहासिक समर्थन की भाषा भी बोलता है — यह संतुलन तेजी से जटिल होते मध्य पूर्व में भारत के बढ़ते रणनीतिक हितों को दर्शाता है। 17.5 करोड़ डॉलर की सहायता और नई बुनियादी परियोजनाओं का वादा ठोस है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि भारत गाजा में युद्धविराम और जवाबदेही पर बहुपक्षीय मंचों में कितना सक्रिय रुख अपनाता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएनएससी में पी. हरीश ने अरबी में संबोधन क्यों दिया?
पी. हरीश ने मध्य पूर्व पर यूएनएससी की खुली बहस में अरबी में संबोधन देकर फिलिस्तीनी और अरब देशों के प्रति भारत की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का प्रतीकात्मक संकेत दिया। यह सुरक्षा परिषद में किसी भारतीय राजनयिक का कथित तौर पर पहला अरबी संबोधन है। हरीश ने काहिरा स्थित अमेरिकन यूनिवर्सिटी से अरबी का अध्ययन किया है और गाजा में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय में भी काम कर चुके हैं।
भारत ने फिलिस्तीन को कितनी सहायता दी है?
भारत ने फिलिस्तीन को विकास परियोजनाओं, मानवीय सहायता, फिलिस्तीनी इंस्टिट्यूट ऑफ डिप्लोमेसी के निर्माण और यूएनआरडब्ल्यूए में योगदान को मिलाकर लगभग 17.5 करोड़ डॉलर की सहायता दी है। इसके अलावा ब्रसेल्स डोनर बैठक में भारत ने एक स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आर्टिफिशियल लिंब फिटमेंट सेंटर और वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाने का वादा भी किया।
भारत दो-राष्ट्र समाधान के बारे में क्या मानता है?
भारत का मानना है कि सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजराइल के साथ शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व रखने वाला एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र ही इस दीर्घकालिक संघर्ष का स्थायी समाधान है। यह भारत की दशकों पुरानी नीतिगत स्थिति है, जिसे यूएनएससी में एक बार फिर दोहराया गया।
गाजा संकट पर भारत ने क्या चिंता जताई?
भारत ने गाजा में आम नागरिकों की जान जाने और बुनियादी ढाँचे के नष्ट होने पर गहरी चिंता व्यक्त की। पी. हरीश ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल और गंभीर कार्रवाई की अपील की और कहा कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे अन्य मुद्दों को गाजा के मानवीय संकट से ध्यान नहीं भटकाना चाहिए।
ब्रसेल्स में फिलिस्तीन डोनर बैठक में भारत ने क्या वादे किए?
ब्रसेल्स में फिलिस्तीन डोनर ग्रुप की बैठक में भारत ने फिलिस्तीन के लिए एक स्पेशलिटी हॉस्पिटल, एक आर्टिफिशियल लिंब फिटमेंट सेंटर और एक वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाने का वचन दिया। ये प्रतिबद्धताएँ भारत की फिलिस्तीन में दीर्घकालिक विकास सहायता की नीति का हिस्सा हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले