भारत-उज्बेकिस्तान आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह की 10वीं बैठक नई दिल्ली में, द्विपक्षीय सहयोग पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
भारत और उज्बेकिस्तान ने 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह की 10वीं बैठक आयोजित की, जिसमें दोनों देशों ने कट्टरपंथ, आतंकवाद की फंडिंग और तकनीक के दुरुपयोग सहित उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया। इस बैठक की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुहेल अजाज खान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रालय में दक्षिण एशिया, निकट एवं मध्य पूर्व तथा अफ्रीकी देशों के सहयोग विभाग के प्रमुख पिरीमकुलोव गुलोमजोन शोदमोनकुलोविच ने की।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक के दौरान दोनों देशों ने वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों से उत्पन्न खतरों की समीक्षा की। इनमें कट्टरपंथ और उग्रवाद की रोकथाम, आतंकवाद की वित्तीय श्रृंखला पर अंकुश और आतंकी गतिविधियों में डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच बढ़ते गठजोड़ पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने सूचना साझा करने, क्षमता निर्माण और श्रेष्ठ प्रचलनों के आदान-प्रदान के माध्यम से आतंकवाद-रोधी सहयोग को और सुदृढ़ बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की।
सरकार की प्रतिक्रिया और प्रतिबद्धता
विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपनी आधिकारिक एक्स पोस्ट में बताया कि सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने पिरीमकुलोव गुलोमजोन शोदमोनकुलोविच से अलग से मुलाकात की और आतंकवाद-रोधी सहयोग तथा पारस्परिक हित के अन्य मुद्दों पर बातचीत की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र (UN), SCO-RATS और EAG जैसे बहुपक्षीय मंचों पर आपसी समन्वय को मजबूत करने का भी संकल्प लिया। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य एशिया में अस्थिरता की चिंताएँ बढ़ रही हैं और अफगानिस्तान से लगी सीमाओं पर आतंकी गतिविधियों को लेकर क्षेत्रीय सतर्कता ऊँची है।
न्यायिक सहयोग का विस्तार
सुरक्षा क्षेत्र से परे, 4 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उज्बेकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट की अध्यक्ष रोबाखोन मखमुदोवा से मुलाकात की। ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, इस बैठक में न्याय व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग पर विशेष चर्चा हुई।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने समरकंद में आयोजित 'एसोसिएशन ऑफ एशियन कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट्स' की 7वीं कांग्रेस में भी भागीदारी की, जो भारत-उज्बेकिस्तान संस्थागत जुड़ाव की गहराई को दर्शाता है।
व्यापक द्विपक्षीय ढाँचा
गौरतलब है कि इस वर्ष मई 2026 में नई दिल्ली में 'फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन' का 17वाँ दौर आयोजित हुआ था, जिसकी सह-अध्यक्षता सिबी जॉर्ज और उज्बेकिस्तान के प्रथम उप-विदेश मंत्री बाखरोमजोन अलोएव ने की थी। उस बैठक में व्यापार, निवेश, पर्यटन, प्रौद्योगिकी, नवाचार, ऊर्जा, शिक्षा, संस्कृति और वाणिज्यिक सहयोग के सभी आयामों की समीक्षा की गई थी।
यह 10वीं बैठक उस व्यापक जुड़ाव की कड़ी है जिसमें भारत मध्य एशियाई देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को लगातार विस्तार दे रहा है। दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों के बीच परिचालन-स्तरीय सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया, जो इस साझेदारी को कूटनीतिक संवाद से आगे ले जाने का संकेत देता है।