माता-पिता के निधन के बाद भी मैदान पर उतरे ये 5 भारतीय क्रिकेटर, दिल पर पत्थर रखकर दिलाई जीत

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माता-पिता के निधन के बाद भी मैदान पर उतरे ये 5 भारतीय क्रिकेटर, दिल पर पत्थर रखकर दिलाई जीत

सारांश

सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, मोहम्मद सिराज, ऋषभ पंत और मुकेश चौधरी — इन 5 भारतीय क्रिकेटरों ने माता-पिता के निधन के बावजूद मैदान पर उतरकर टीम के लिए यादगार प्रदर्शन किया। इनकी कहानियां भारतीय क्रिकेट की सबसे भावुक और प्रेरणादायक विरासत हैं।

Key Takeaways

  • सचिन तेंदुलकर ने पिता रमेश तेंदुलकर के निधन के बाद 23 मई 1999 को केन्या के खिलाफ 101 गेंदों में 140 रन की ऐतिहासिक पारी खेली।
  • विराट कोहली ने 2006 में महज 18 साल की उम्र में पिता के निधन के अगले दिन रणजी ट्रॉफी में 90 रन बनाए।
  • मोहम्मद सिराज कोविड बायो-बबल के कारण पिता का अंतिम संस्कार नहीं कर सके, फिर भी 2020 ऑस्ट्रेलिया दौरे में 3 टेस्ट में 13 विकेट लिए।
  • ऋषभ पंत ने IPL 2017 में पिता के निधन के बाद दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए 36 गेंदों में 57 रन बनाए।
  • मुकेश चौधरी ने मां के निधन के मात्र 48 घंटे बाद 23 अप्रैल 2026 को CSK के लिए मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेलते हुए क्विंटन डी कॉक का विकेट लिया।
  • इन सभी खिलाड़ियों की कहानियां भारतीय क्रिकेट में मानसिक दृढ़ता और टीम के प्रति समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल हैं।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ ऐसे अदम्य खिलाड़ी हुए हैं, जिन्होंने माता या पिता के निधन जैसे असहनीय व्यक्तिगत दुख के बावजूद देश और टीम के लिए मैदान पर कदम रखा। यह साहस केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक दृढ़ता का प्रतीक है। मुकेश चौधरी से लेकर सचिन तेंदुलकर तक — इन खिलाड़ियों की कहानियां हर भारतीय के दिल को छू जाती हैं।

सचिन तेंदुलकर — पिता को खोकर भी खेली ऐतिहासिक पारी

सचिन तेंदुलकर साल 1999 के क्रिकेट विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जब 19 मई, 1999 को उनके पिता रमेश तेंदुलकर का निधन हो गया। उस दिन सचिन ने जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच खेला था और उसी रात उनके सिर से पिता का साया उठ गया।

सचिन अंतिम संस्कार के लिए भारत लौटे और फिर महज कुछ दिनों में इंग्लैंड के लिए रवाना हो गए। 23 मई, 1999 को उन्होंने केन्या के खिलाफ बल्लेबाजी करते हुए मात्र 101 गेंदों में 140 रन की अविस्मरणीय पारी खेली — यह पारी उन्होंने अपने दिवंगत पिता को समर्पित की थी।

विराट कोहली — 18 साल की उम्र में दिखाई मानसिक मजबूती

साल 2006 में रणजी ट्रॉफी के दौरान दिल्ली बनाम कर्नाटक मैच के बीच विराट कोहली के पिता का हृदयाघात से निधन हो गया। उस समय विराट की उम्र मात्र 18 वर्ष थी।

इस कठिन घड़ी में भी विराट ने हार नहीं मानी और अगले दिन दिल्ली की ओर से बल्लेबाजी करने मैदान पर उतरे। उन्होंने 90 रनों की शानदार पारी खेलकर न केवल टीम को संकट से उबारा, बल्कि अपने क्रिकेट करियर की नींव भी इसी जज्बे पर रखी।

मोहम्मद सिराज — पिता का अंतिम संस्कार भी न कर सके, फिर भी रचा इतिहास

मोहम्मद सिराज की कहानी शायद सबसे दर्दनाक है। साल 2020 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टीम कोविड-19 बायो-बबल में थी, जिसके कारण सिराज अपने पिता का अंतिम संस्कार करने भारत नहीं लौट सके।

इस असहनीय पीड़ा को सीने में दबाए सिराज ने उसी सीरीज में टेस्ट डेब्यू किया और 3 मैचों में 13 विकेट लेकर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारत की ऐतिहासिक जीत के नायक बने। यह जीत सिराज के त्याग और समर्पण का जीवंत प्रमाण है।

ऋषभ पंत — पिता को खोने के बाद IPL में उतरे और चमके

आईपीएल 2017 के आरंभ से ठीक दो दिन पहले ऋषभ पंत के पिता का निधन हो गया था। पिता का अंतिम संस्कार करने के तुरंत बाद पंत दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) से जुड़ गए।

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ पहले ही मैच में उन्होंने 36 गेंदों में 57 रन की विस्फोटक पारी खेली। यह पारी उनके अदम्य साहस और क्रिकेट के प्रति अटूट लगाव की मिसाल बन गई।

मुकेश चौधरी — मां के निधन के 48 घंटे बाद CSK के लिए खेले

आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाज मुकेश चौधरी की मां 21 अप्रैल, 2026 को लंबी बीमारी के बाद चल बसीं। मात्र 48 घंटे बाद, 23 अप्रैल, 2026 को मुकेश मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैदान पर उतरे।

उन्होंने 4 ओवर के स्पेल में 31 रन देकर क्विंटन डी कॉक का अहम विकेट लिया। मुकेश का यह कदम न केवल उनकी फ्रेंचाइजी के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारतीय क्रिकेटरों का जज्बा व्यक्तिगत दुख से भी बड़ा होता है।

इन खिलाड़ियों की कहानियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेंगी। भारतीय क्रिकेट में ऐसे और भी खिलाड़ी सामने आएंगे जो इसी परंपरा को आगे बढ़ाएंगे और साबित करेंगे कि असली खेल भावना क्या होती है।

Point of View

वहीं सचिन और कोहली जैसे दिग्गजों का यह साहस स्वैच्छिक था। यह प्रश्न भी उठता है कि क्या खिलाड़ियों को ऐसे मौकों पर पर्याप्त मानसिक स्वास्थ्य सहायता मिलती है। BCCI और फ्रेंचाइजियों को इस दिशा में स्पष्ट नीति बनानी चाहिए ताकि खिलाड़ी दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से मैदान पर उतरें।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

सचिन तेंदुलकर ने पिता के निधन के बाद कौन सी पारी खेली थी?
सचिन तेंदुलकर ने पिता रमेश तेंदुलकर के निधन के कुछ दिनों बाद 23 मई 1999 को केन्या के खिलाफ 101 गेंदों में 140 रनों की शानदार पारी खेली थी। यह पारी 1999 विश्व कप में खेली गई थी और सचिन ने इसे अपने पिता को समर्पित किया था।
विराट कोहली के पिता का निधन कब हुआ था और उन्होंने क्या किया?
साल 2006 में रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान विराट कोहली के पिता का हृदयाघात से निधन हुआ था। 18 वर्षीय विराट ने अगले दिन दिल्ली की ओर से मैदान पर उतरकर 90 रनों की पारी खेली थी।
मोहम्मद सिराज अपने पिता के अंतिम संस्कार में क्यों नहीं जा सके?
साल 2020 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान कोविड-19 के कारण भारतीय टीम बायो-बबल में थी और सिराज को बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने उसी सीरीज में टेस्ट डेब्यू करते हुए 3 मैचों में 13 विकेट लिए।
मुकेश चौधरी की मां का निधन कब हुआ और वह कब मैदान पर उतरे?
मुकेश चौधरी की मां का निधन 21 अप्रैल 2026 को हुआ था। मात्र दो दिन बाद 23 अप्रैल 2026 को वह चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेले और क्विंटन डी कॉक का विकेट भी लिया।
ऋषभ पंत ने पिता के निधन के बाद IPL में कैसा प्रदर्शन किया?
IPL 2017 के शुरू होने से दो दिन पहले ऋषभ पंत के पिता का निधन हुआ था। अंतिम संस्कार के बाद दिल्ली डेयरडेविल्स से जुड़े पंत ने RCB के खिलाफ 36 गेंदों में 57 रनों की दमदार पारी खेली थी।
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