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सेंसेक्स 533 अंक टूटा, निफ्टी 23,498 पर; आईटी और सर्विसेज सेक्टर पर सबसे ज़्यादा दबाव

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सेंसेक्स 533 अंक टूटा, निफ्टी 23,498 पर; आईटी और सर्विसेज सेक्टर पर सबसे ज़्यादा दबाव

सारांश

वैश्विक कमज़ोरी और घरेलू आईपीओ बाज़ार की बाढ़ — दोनों एक साथ भारतीय बाज़ार पर भारी पड़ रहे हैं। सेंसेक्स 533 अंक टूटा, निफ्टी का इस साल रिटर्न -9.5% और FII ने ₹2,84,000 करोड़ की इक्विटी बेचकर ₹36,000 करोड़ आईपीओ में लगाए — यह महज़ उतार-चढ़ाव नहीं, एक गहरे बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

BSE सेंसेक्स बुधवार सुबह 533 अंक (0.71%) गिरकर 75,044 पर खुला।
NSE निफ्टी 135 अंक (0.57%) की कमज़ोरी के साथ 23,498 पर था।
निफ्टी आईटी और निफ्टी सर्विसेज शीर्ष घाटे में; एनर्जी, फार्मा और मेटल हरे निशान में।
ब्रेंट क्रूड अमेरिका-ईरान तनाव के बीच लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचा।
जून के बाद से आईपीओ लिस्टिंग गेन औसतन 22% ; FII ने इस साल एक्सचेंजों पर ₹2,84,000 करोड़ की इक्विटी बेची, लेकिन आईपीओ में ₹36,000 करोड़ लगाए।
इस साल अब तक निफ्टी का रिटर्न -9.5 प्रतिशत रहा है।

BSE सेंसेक्स बुधवार, 9 सितंबर को शुरुआती कारोबार में 533 अंक यानी 0.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,044 पर आ गया, जबकि NSE निफ्टी 135 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 23,498 पर था। कमज़ोर वैश्विक संकेतों और घरेलू तरलता के दबाव के बीच आईटी और सर्विसेज सेक्टर ने बाज़ार को सबसे अधिक खींचा।

मुख्य घटनाक्रम

सुबह 9 बजकर 22 मिनट पर दर्ज किए गए आँकड़ों के अनुसार, निफ्टी आईटी और निफ्टी सर्विसेज सूचकांक शीर्ष घाटे में रहे। इनके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी कंज़म्पशन, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

हालाँकि, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी पीएसई, निफ्टी फार्मा, निफ्टी मेटल और निफ्टी कमोडिटीज हरे निशान में बने रहे, जिससे बाज़ार में आंशिक राहत दिखी।

गेनर्स और लूज़र्स

सेंसेक्स पैक में L&T, NTPC, Sun Pharma, Power Grid, Tata Steel, BEL, Adani Ports और Kotak Mahindra Bank बढ़त में रहे। वहीं, HCL Tech, Tech Mahindra, Infosys, TCS, HUL, M&M, Bharti Airtel, Bajaj Finance, HDFC Bank, UltraTech Cement, ICICI Bank, Eternal, SBI, Axis Bank, ITC, Titan, Maruti Suzuki और Asian Paints नुकसान में रहे।

वैश्विक बाज़ारों का हाल

एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला रुझान देखने को मिला। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक और सोल हरे निशान में थे, जबकि जकार्ता लाल निशान में कारोबार कर रहा था। इससे पहले मंगलवार को अमेरिकी बाज़ार गिरावट के साथ बंद हुए थे — डाउ जोन्स 1.18 प्रतिशत और नैस्डैक 0.32 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ बंद हुआ।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

बाज़ार जानकारों के अनुसार, फिलहाल भारतीय शेयर बाज़ार पर दो बड़ी चुनौतियाँ हावी हैं। पहली, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है, जो घरेलू अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।

दूसरी और विशेषज्ञों के मुताबिक अधिक प्रभावी चुनौती यह है कि तेज़ी से बढ़ते आईपीओ बाज़ार के कारण मुख्य बाज़ार से तरलता खिंच रही है। जून के बाद से आईपीओ पर औसत लिस्टिंग गेन बढ़कर लगभग 22 प्रतिशत हो गया है, जिससे खुदरा और संस्थागत, दोनों तरह के निवेशक आईपीओ की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

गौरतलब है कि इस साल अब तक निफ्टी का रिटर्न -9.5 प्रतिशत रहा है। यहाँ तक कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने, जिन्होंने इस साल एक्सचेंजों के ज़रिए ₹2,84,000 करोड़ की इक्विटी बेची है, आईपीओ बाज़ार में लगभग ₹36,000 करोड़ का निवेश किया है — जो इस प्रवृत्ति की गहराई को उजागर करता है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू तरलता का दबाव एक साथ बाज़ार पर असर डाल रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक क्रूड की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और आईपीओ की बाढ़ थमती नहीं, तब तक निफ्टी पर दबाव बना रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चिंताजनक है क्योंकि नीति-निर्माता इस तरलता-पुनर्वितरण को आसानी से नियंत्रित नहीं कर सकते। FII का व्यवहार — एक तरफ ₹2,84,000 करोड़ की बिकवाली और दूसरी तरफ ₹36,000 करोड़ का आईपीओ निवेश — यह बताता है कि वे भारतीय बाज़ार में विश्वास खो नहीं रहे, बल्कि जोखिम को पुनर्संतुलित कर रहे हैं। असली सवाल यह है कि जब आईपीओ का उत्साह ठंडा होगा, तो क्या यह तरलता मुख्य बाज़ार में वापस लौटेगी या बाहर चली जाएगी।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

9 सितंबर को सेंसेक्स और निफ्टी कितना गिरे?
9 सितंबर को सुबह 9:22 बजे BSE सेंसेक्स 533 अंक (0.71%) गिरकर 75,044 पर और NSE निफ्टी 135 अंक (0.57%) की कमज़ोरी के साथ 23,498 पर था। कमज़ोर वैश्विक संकेत और आईटी सेक्टर का दबाव इस गिरावट की मुख्य वजह रही।
भारतीय शेयर बाज़ार में आज गिरावट क्यों आई?
विशेषज्ञों के अनुसार दो प्रमुख कारण हैं — पहला, अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचा, और दूसरा, तेज़ी से बढ़ते आईपीओ बाज़ार ने मुख्य बाज़ार से तरलता खींच ली। विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरा कारण अधिक प्रभावशाली है।
आज कौन-से सेक्टर सबसे ज़्यादा नुकसान में रहे?
निफ्टी आईटी और निफ्टी सर्विसेज शीर्ष घाटे में रहे। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल्टी, ऑटो, पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी, मीडिया, कंज़म्पशन, ऑयल एंड गैस और इंडिया मैन्युफैक्चरिंग भी लाल निशान में रहे। एनर्जी, हेल्थकेयर, फार्मा, मेटल और कमोडिटीज़ हरे निशान में थे।
FII ने इस साल भारतीय बाज़ार में क्या किया?
आँकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने इस साल एक्सचेंजों के ज़रिए ₹2,84,000 करोड़ की इक्विटी बेची है। हालाँकि, उन्होंने इसी दौरान आईपीओ बाज़ार में लगभग ₹36,000 करोड़ का निवेश किया, जो दर्शाता है कि वे भारत से पूरी तरह बाहर नहीं निकले बल्कि जोखिम पुनर्संतुलित कर रहे हैं।
आईपीओ बाज़ार का मुख्य बाज़ार पर क्या असर पड़ रहा है?
जून के बाद से आईपीओ पर औसत लिस्टिंग गेन लगभग 22 प्रतिशत हो गया है, जिससे खुदरा और संस्थागत दोनों निवेशक मुख्य बाज़ार से पैसा निकालकर आईपीओ में लगा रहे हैं। इससे निफ्टी में तरलता घट रही है और लगातार दबाव बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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