क्या इंदौर में 'रण संवाद' में एमसीटीई ने स्वदेशी 5जी तकनीक का प्रदर्शन किया?

सारांश
Key Takeaways
- रण संवाद कार्यक्रम में स्वदेशी 5जी तकनीक का प्रदर्शन किया गया।
- संचार और साइबर सुरक्षा में सुधार के लिए यह तकनीक महत्वपूर्ण है।
- आईआईटी चेन्नई के सहयोग से विकसित यह कार्यान्वयन है।
- सैन्य अभ्यास में नई तकनीकों का समावेश हो रहा है।
- एन कपूर और अशोक कुमार ने इस तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला।
इंदौर, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के इंदौर में 'रण संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई) ने आईआईटी चेन्नई के सहयोग से विकसित अपने स्वदेशी 5जी नेटवर्क का प्रदर्शन किया।
यह 5जी तकनीक सेना के संचार, साइबर युद्ध, आईसीटी, ईडब्ल्यू और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को और बेहतर बनाती है, साथ ही उन्नत अनुसंधान और सुरक्षित सैन्य संचार को सक्षम बनाती है।
सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (सीएलएडब्ल्यू) के महानिदेशक दुष्यंत सिंह ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि रण संवाद एक अनूठी संगोष्ठी है। पहले के सेमिनार ज्यादातर शिक्षा जगत और सेवानिवृत्त दिग्गजों तक सीमित होते थे, लेकिन अब हम वास्तविक युद्ध अभ्यास कर रहे लोगों को एक मंच प्रदान कर रहे हैं।
एमसीटीई के प्रशिक्षक लेफ्टिनेंट कर्नल नैनीश लोहाकरे ने बताया कि स्वदेशी परियोजना की शुरुआत आईआईटी मद्रास में हुई थी। हमने एमसीटीई में एक राष्ट्रीय 5जी टेस्टबेड स्थापित किया है, जो भारतीय सेना के अनुप्रयोगों के परीक्षण के लिए कार्य कर रहा है।
वारफेयर स्टडीज के महानिदेशक अशोक कुमार ने सशस्त्र बलों में नई तकनीकों के समावेश पर प्रकाश डाला। उन्होंने पहलगाम आतंकवादी हमले का भी जिक्र किया।
वहीं, भारतीय वायुसेना के एयर मार्शल एन कपूर ने देश की पश्चिमी सीमाओं (पाकिस्तान सीमा) के बारे में बात की और भारतीय वायुसेना में तकनीक की भूमिका तथा रण संवाद के महत्व पर अपनी राय रखी।