आईएसआई की नकली नोट साजिश: ड्रोन से पंजाब और बांग्लादेश बॉर्डर पर बड़ा खतरा, भारतीय एजेंसियां सतर्क

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आईएसआई की नकली नोट साजिश: ड्रोन से पंजाब और बांग्लादेश बॉर्डर पर बड़ा खतरा, भारतीय एजेंसियां सतर्क

सारांश

पाकिस्तान की आईएसआई कूरियर और ड्रोन — दोनों के ज़रिए भारत में नकली नोट फैलाने की दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। अब तक की कोशिशें नाकाम हुई हैं, लेकिन खुफिया अधिकारी इन्हें 'ड्राई रन' मानते हैं — असली खतरा अभी आना बाकी है।

मुख्य बातें

आईएसआई भारत में नकली नोट फैलाने के लिए कूरियर नेटवर्क और ड्रोन — दोनों का उपयोग कर रही है।
सबसे संवेदनशील क्षेत्र त्रिपुरा-बांग्लादेश सीमा और पंजाब हैं; बांग्लादेश सीमा पर खतरा अधिक गंभीर।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) पश्चिम बंगाल के मालदा में नकली नोट छापने वाली इकाइयों की जाँच कर रही है।
अब तक ड्रोन से नकली नोट गिराने की लगभग सभी कोशिशें नाकाम; अधिकारी इन्हें 'ड्राई रन' मान रहे हैं।
आईएसआई का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाना और आतंकी संगठनों को फंड मुहैया कराना है।
सीमा सुरक्षा बल (BSF) ड्रोन से नशे, हथियार पकड़ने में सफल रहा है, लेकिन नकली नोट अधिक जटिल चुनौती।

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और उसके सहयोगी नेटवर्क भारत में बड़े पैमाने पर नकली भारतीय नोट फैलाने की सुनियोजित कोशिश कर रहे हैं — यह जानकारी सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने 19 मई 2026 को दी। अधिकारियों के अनुसार सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र त्रिपुरा-बांग्लादेश सीमा और पंजाब हैं, जहाँ क्रमशः कूरियर नेटवर्क और ड्रोन के ज़रिए यह खतरा तेज़ी से बढ़ रहा है।

दोहरी रणनीति: अर्थव्यवस्था को नुकसान और आतंकी फंडिंग

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आईएसआई ने नकली भारतीय नोटों को लेकर दो समानांतर उद्देश्य तय किए हैं। पहला — भारतीय अर्थव्यवस्था को अस्थिर करना, और दूसरा — पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के लिए वित्तपोषण जुटाना। अधिकारी के अनुसार, भारत-बांग्लादेश सीमा पर यह समस्या पंजाब की तुलना में कहीं अधिक गंभीर है।

बांग्लादेश सीमा पर नकली नोट भारत में पहुँचाने के लिए मानव कूरियर का उपयोग किया जा रहा है, जबकि पंजाब में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की सख्ती बढ़ रही है, आईएसआई पूरी तरह ड्रोन नेटवर्क की ओर स्थानांतरित हो सकती है।

मालदा मॉड्यूल: पश्चिम बंगाल में नकली नोटों का केंद्र

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) इस खतरे से निपटने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। एजेंसी न केवल सीमाओं पर निगरानी कर रही है, बल्कि पश्चिम बंगाल के भीतर भी कई मामलों की जाँच कर रही है। एनआईए का मुख्य फोकस मालदा ज़िले पर है, जहाँ नकली नोट छापने वाली कई इकाइयाँ उजागर हुई हैं।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि सबसे पहले पश्चिम बंगाल में नकली नोट छापने वाली इकाइयों को बंद करना अनिवार्य है। उनके अनुसार, यदि मालदा मॉड्यूल को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाए, तो समस्या का बड़ा हिस्सा अपने आप कम हो जाएगा — इसके बाद सीमाओं पर तस्करी रोकने पर पूरा ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।

ड्रोन खतरा: 'ड्राई रन' से बड़े हमले की आशंका

इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक अधिकारी ने चेतावनी दी कि आगे चलकर आईएसआई नकली नोट भेजने के लिए ड्रोन का और अधिक उपयोग कर सकती है। उन्होंने बताया कि अब तक ड्रोन के ज़रिए नकली नोट गिराने की लगभग सभी कोशिशें नाकाम की जा चुकी हैं। हालाँकि, अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि इन्हें केवल 'ड्राई रन' यानी परीक्षण माना जाना चाहिए — दुश्मन सुरक्षा तंत्र की कमज़ोरियाँ समझने की कोशिश कर रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, अब तक पकड़े गए नकली नोटों की मात्रा अपेक्षाकृत कम रही है। लेकिन जैसे ही सुरक्षा तंत्र में कोई खामी मिलती है, ड्रोन के ज़रिए बड़ी खेप भेजने की आशंका बनी हुई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) अब तक ड्रोन से गिराए गए नशीले पदार्थ, हथियार और गोला-बारूद पकड़ने में सफल रहा है, लेकिन नकली नोटों का मामला तकनीकी और खुफिया दोनों स्तरों पर अधिक जटिल माना जा रहा है।

आगे की चुनौती

जाँच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले समय में यह चुनौती और बड़ी होने वाली है। अधिकारियों के मुताबिक आईएसआई को पता है कि सुरक्षा एजेंसियों की नज़र सबसे अधिक उन कूरियरों पर रहती है जो नकली नोट लेकर आते हैं — इसीलिए ड्रोन नेटवर्क की ओर रुझान बढ़ रहा है। नकली नोटों के इस रैकेट में ड्रोन का बढ़ता उपयोग सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसके लिए मौजूदा सीमा-निगरानी तंत्र पूरी तरह तैयार नहीं दिखता। मालदा मॉड्यूल वर्षों से जाँच एजेंसियों के रडार पर है, फिर भी यह सक्रिय है — यह सवाल उठाता है कि ज़मीनी स्तर पर कार्रवाई में कहाँ चूक हो रही है। जब तक घरेलू नकली नोट इकाइयों को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाता, सीमा पर निगरानी बढ़ाना केवल आधा समाधान है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएसआई ड्रोन से नकली नोट भेजने की साजिश क्यों रच रही है?
खुफिया अधिकारियों के अनुसार, आईएसआई का उद्देश्य दोहरा है — भारतीय अर्थव्यवस्था को अस्थिर करना और पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के लिए धन जुटाना। ड्रोन का उपयोग इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि कूरियरों पर सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नज़र रहती है।
भारत में नकली नोट तस्करी के सबसे संवेदनशील क्षेत्र कौन से हैं?
अधिकारियों के अनुसार, त्रिपुरा-बांग्लादेश सीमा और पंजाब सबसे अधिक संवेदनशील हैं। बांग्लादेश सीमा पर कूरियर नेटवर्क और पंजाब में ड्रोन के ज़रिए खतरा सबसे अधिक है, और बांग्लादेश सीमा की स्थिति पंजाब से अधिक गंभीर बताई जा रही है।
मालदा नकली नोट मॉड्यूल क्या है और NIA क्या कर रही है?
पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले में नकली नोट छापने वाली कई इकाइयाँ सामने आई हैं, जिन्हें 'मालदा मॉड्यूल' कहा जाता है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) इन इकाइयों को बंद करने और सीमा पर तस्करी रोकने के लिए एक साथ जाँच कर रही है।
क्या ड्रोन से नकली नोट गिराने की कोशिशें सफल हुई हैं?
अधिकारियों के अनुसार, अब तक ड्रोन के ज़रिए नकली नोट गिराने की लगभग सभी कोशिशें नाकाम की जा चुकी हैं। हालाँकि, खुफिया अधिकारी इन्हें 'ड्राई रन' मानते हैं — यानी दुश्मन सुरक्षा तंत्र की कमज़ोरियाँ परखने की कोशिश कर रहा है, असली बड़ा हमला बाद में हो सकता है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ इस खतरे से कैसे निपट रही हैं?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) इस मामले में अग्रणी है और सीमा पर निगरानी के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के भीतर जाँच कर रही है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ड्रोन से गिराए गए नशीले पदार्थ और हथियार पकड़ने में सफल रहा है, लेकिन नकली नोटों की पहचान और रोकथाम अधिक जटिल चुनौती मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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