'तड़प तड़प के' पहले किसी और फिल्म के लिए बना था — इस्माइल दरबार ने बताया केके से जुड़ा भावुक किस्सा
सारांश
मुख्य बातें
संगीतकार इस्माइल दरबार ने खुलासा किया है कि हिंदी सिनेमा का मशहूर दर्दभरा गीत 'तड़प तड़प के' मूल रूप से संजय लीला भंसाली की फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' के लिए नहीं बनाया गया था। उन्होंने बताया कि यह गीत पहले किसी अन्य बड़े प्रोजेक्ट के लिए एक स्क्रैच ट्रैक के रूप में तैयार हो रहा था, और दिवंगत गायक केके ने शुरू में इसे गाने से मना कर दिया था।
कैसे बना यह गीत
इस्माइल दरबार ने बताया कि जब उन्हें 'हम दिल दे चुके सनम' नहीं मिली थी, तब वे किसी दूसरी बड़ी फिल्म के लिए इस गीत का स्क्रैच वर्जन रिकॉर्ड कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'यह उस समय की बात है, जब मुझे 'हम दिल दे चुके सनम' नहीं मिली थी। मैं किसी और बड़ी फिल्म के लिए इसका स्क्रैच वर्जन रिकॉर्ड कर रहा था।' यह रिकॉर्डिंग मुंबई के बांद्रा स्थित 'पर्पल हेज स्टूडियो' में हुई थी।
भंसाली तक कैसे पहुंचा गाना
इस्माइल दरबार के अनुसार, कुछ समय बाद संजय लीला भंसाली ने उन्हें बुलाया और लगभग 6 महीने तक साथ काम चला। जब उन्होंने भंसाली को यह गीत सुनाया, तो उनकी प्रतिक्रिया अत्यंत भावुक करने वाली थी। इस्माइल दरबार ने बताया कि भंसाली ने कहा था, 'आज इस्माइल, मुझे पता चल गया कि मेरी फिल्म का इंटरवल कहां होगा और कहां एंड होगा। आज मैंने अपनी फिल्म पूरी कर ली।'
केके की पहली प्रतिक्रिया
इस्माइल दरबार ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार केके को यह गीत सुनाया, तो गायक ने तुरंत कह दिया, 'इस्माइल भाई, सबसे पहले तो यह मेरी स्टाइल का गाना नहीं है, इसलिए मैं इसे नहीं गा सकता।' संगीतकार ने फिर भी हार नहीं मानी। उन्होंने केके को समझाया कि उनकी वोकल रेंज — लो नोट्स, मिडल रेंज और हाई नोट्स — इस कंपोजिशन के लिए एकदम सटीक है और गवाने की जिम्मेदारी उनकी है।
रिकॉर्डिंग का भावुक पल
केके ने थोड़ी हिचकिचाहट के बाद राजी होते हुए कहा था, 'देखो, बाद में मुझ पर गुस्सा मत करना। मैं पहले ही बता रहा हूं, मैं यह गाना नहीं गा सकता।' लेकिन जब रिकॉर्डिंग पूरी हुई, तो इस्माइल दरबार के अनुसार सबसे पहले केके की पत्नी इस गाने को सुनकर रो पड़ी थीं — जो इस गीत की भावनात्मक गहराई का प्रमाण था।
इंडियन आइडल में यादें ताज़ा हुईं
इस्माइल दरबार ने ये यादें इंडियन आइडल के आगामी एपिसोड के प्रोमो में साझा कीं, जब प्रतियोगी मनराज वीर ने इस गीत की प्रस्तुति दी। जज विशाल डडलानी ने अनुमान लगाया कि केके ने शायद कहा होगा, 'मैं यह कैसे गाऊंगा? यह तो मेरा स्टाइल ही नहीं है' — जो लगभग सटीक निकला और इस्माइल दरबार को भी प्रभावित कर गया। 'तड़प तड़प के' आज भी हिंदी फिल्म संगीत के सबसे यादगार गीतों में गिना जाता है, और केके की आवाज में इसकी पहचान अमर बनी हुई है।