'उस खुदा से': इस्माइल दरबार और जैद दरबार की पहली पिता-पुत्र जोड़ी, दोनों ने साझा किए दिल के जज़्बात
सारांश
मुख्य बातें
दिग्गज संगीतकार इस्माइल दरबार और उनके बेटे जैद दरबार पहली बार एक साझा म्यूज़िक प्रोजेक्ट 'उस खुदा से' के ज़रिए एक मंच पर आए हैं। इस भावनात्मक गाने में इस्माइल दरबार ने संगीत रचना की है, जबकि जैद दरबार ने इसका निर्देशन किया है। यह पिता-पुत्र की जोड़ी का पहला संयुक्त सृजन है, जो हिंदी संगीत जगत में एक भावुक अध्याय जोड़ता है।
जैद का अनुभव: 'दिल का हिस्सा बन गया यह गाना'
जैद दरबार ने इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा, 'कुछ प्रोजेक्ट ऐसे होते हैं, जो दर्शकों तक पहुंचने से पहले ही आपके दिल का हिस्सा बन जाते हैं और 'उस खुदा से' गाना मेरे लिए बिल्कुल ऐसा ही है। इस गाने पर अपने पिता के साथ काम करना मेरे लिए ऐसी याद है, जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगा।'
जैद ने बचपन से पिता को संगीत बनाते देखने के अनुभव को याद करते हुए कहा, 'मैंने बहुत करीब से अपने पिता को संगीत बनाते हुए देखा है। इसलिए उनके द्वारा तैयार किए गए किसी गाने पर अपनी सोच और अपना विज़न सामने रखने का मौका मिलना मेरे लिए बहुत खास है। हमने इस गाने के लिए अपना दिल और पूरी मेहनत लगा दी है। मुझे सच में उम्मीद है कि जब लोग इसे सुनेंगे और देखेंगे, तो वे इसके पीछे छिपी भावनाओं को महसूस कर पाएंगे।'
इस्माइल दरबार की नज़र से: 'बेटे के साथ काम करना अलग अनुभव था'
इस्माइल दरबार ने इस सहयोग को अपने करियर का एक भावुक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा, 'संगीत मेरे लिए हमेशा भावनाओं को व्यक्त करने का एक माध्यम रहा है। 'उस खुदा से' गाना मेरे दिल से निकला हुआ गाना है। जैद के साथ काम करना मेरे लिए इसलिए खास रहा, क्योंकि इस बार मैं सिर्फ एक निर्देशक के साथ काम नहीं कर रहा था, बल्कि अपने बेटे के साथ काम कर रहा था।'
उन्होंने आगे बताया कि जैद ने गाने को अपने नज़रिए से समझने और पेश करने की कोशिश की, जिससे पूरा अनुभव और भी यादगार बन गया। इस्माइल ने कहा, 'अपने बेटे को संगीत को समझते हुए देखना मेरे लिए गर्व की बात थी। जैद ने गाने की मूल भावना को बनाए रखते हुए उसमें अपनी रचनात्मक समझ को जोड़ा और यही बात इस पूरे प्रोजेक्ट को खास बनाती है।'
संगीत और वापसी: 'दिल से निकला हो, रिलीज़ के लिए नहीं'
अपनी संगीत यात्रा और इस वापसी के बारे में बात करते हुए इस्माइल दरबार ने कहा, 'हर कलाकार की एक खास संगीत पहचान होती है, जो समय गुज़रने के साथ भी उसके साथ बनी रहती है। 'उस खुदा से' ने मुझे फिर उसी दौर में पहुंचाया, जहाँ धुन, भावनाएं और संगीत की सादगी सबसे ज़्यादा मायने रखती थी।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गाना केवल किसी व्यावसायिक रिलीज़ के लिए नहीं, बल्कि पूरी ईमानदारी से दिल से तैयार किया गया है।
आगे क्या
यह प्रोजेक्ट इस्माइल दरबार की संगीत जगत में सक्रिय वापसी का संकेत देता है। गौरतलब है कि इस्माइल दरबार ने 'हम दिल दे चुके सनम' और 'देवदास' जैसी फिल्मों में संगीत देकर बॉलीवुड में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। 'उस खुदा से' के ज़रिए पिता-पुत्र की यह जोड़ी एक नई पीढ़ी के श्रोताओं तक भावनात्मक संगीत पहुंचाने की कोशिश कर रही है।